ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप ने खामेनेई को फिर धमकाया, कहा- परमाणु वार्ता करो या हमला झेलो

नई दिल्ली। इन दिनों दुनिया में भर में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कई देशों के बीच कूटनीति बहुत तेजी से चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों  ईरान, चीन और रूस से जुड़े मामलों पर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर काफी लंबी और गंभीर बातचीत की। यह बातचीत ठीक उसी दिन हुई जब जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से वीडियो कॉल पर चर्चा की थी।

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ईरान को अलग-थलग करने की प्लानिंग

ईरान-अमेरिका तनाव

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और जिनपिंग की इस बातचीत में सबसे ज्यादा ध्यान ईरान पर रहा। ट्रंप चाहते हैं कि, चीन, ईरान से तेल खरीदना बंद कर दे और दुनिया के अन्य देशों की तरह ईरान को अकेला छोड़ दे। अमेरिका ईरान पर पहले से ही सख्त प्रतिबंध लगा रहा है ताकि उसका परमाणु कार्यक्रम सफल न होने पाए। ट्रंप ने इस फोन कॉल को बहुत अच्छी और लंबी बताया। उन्होंने कहा कि उनके और जिनपिंग के बीच व्यक्तिगत रिश्ता भी बहुत मजबूत है और इसे बनाए रखना जरूरी है। बातचीत के दौरान व्यापार, ताइवान, यूक्रेन युद्ध और ईरान की स्थिति जैसे कई बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इधर, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि खामेनेई को चिंतित रहना चाहिए।

शुक्रवार को होगी वार्ता

ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि, अगर वह परमाणु समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका उस पर हमला भी कर सकता है। बता दें कि, ईरान में पिछले महीने बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन पर सरकार ने सख्ती की। ट्रंप ने उस वक्त भी हमले की बात कही थी और अब वे फिर से दबाव बढ़ा रहे हैं। अब अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान में परमाणु वार्ता हो रही है। पहले जगह को लेकर विवाद हुआ। दरअसल, ईरान ओमान में वार्ता करना चाहता था और अमेरिका इस्तांबुल पर अड़ा था, लेकिन अरब देशों के दबाव में बात ओमान में तय हुई।

इस मीटिंग में ईरान सिर्फ परमाणु मुद्दे पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका मिसाइल और अन्य मुद्दों को भी शामिल करना चाहता है। यह सारी घटनाएं वैश्विक स्तर पर तेल के बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और देशों के बीच ताकत के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। चीन अभी भी ईरान से काफी तेल खरीद रहा है, जबकि ट्रंप उसे रोकने की कोशिश में हैं। रूस और चीन के बीच भी ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है ।

ईरान पर लगा चुका है कड़े प्रतिबंध

उल्लेखनीय है कि, ट्रंप प्रशासन ईरान पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगाए हुए है, जिसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करना है। इसके बावजूद ईरान ने 2024 में लगभग 125 अरब डॉलर का व्यापार किया, जिसमें चीन के साथ 32 अरब डॉलर का कारोबार शामिल था। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ब्लैक मार्केट के जरिए ईरानी तेल की बड़ी मात्रा में खरीद करता है।

ईरान-अमेरिका तनाव

अमेरिका ने हाल में घोषणा की कि जो देश ईरान से कारोबार जारी रखेंगे, उन पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का यह कदम चीन पर सीधा दबाव बनाने के लिए है, क्योंकि चीन ईरान से तेल खरीदने वाला प्रमुख देश है। ट्रंप से बात करने से पहले शी जिनपिंग ने पुतिन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी। इस दौरान, पुतिन ने चीन-रूस ऊर्जा साझेदारी को रणनीतिक बताया और कहा कि, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन रूस का सबसे बड़ा तेल-गैस खरीदार बन गया है।

ईरान को दे रहे धमकी

अनुमानों के अनुसार, युद्ध के बाद चीन ने रूस से 230 अरब डॉलर से ज्यादा की ऊर्जा खरीदी है। यह साझेदारी पश्चिमी प्रतिबंधों से रूस को राहत दे रही है। ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर पहले दबाव बनाया था और 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो अब हटा लिया गया है। भारत ने ईरान से तेल खरीद रोक दी है, लेकिन चीन अब भी ईरानी तेल की खरीद बढ़ा रहा है, खासकर वेनेजुएला से तेल न मिलने के कारण। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर प्रभाव बढ़ा लिया है, जिससे चीन ईरान की ओर मुड़ा है।

ट्रंप की चीन पर नरमी की एक वजह रेयर अर्थ मिनरल्स पर निर्भरता भी है। अमेरिका अपनी जरूरत का 70-80 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल्स चीन से प्राप्त करता है। ट्रंप इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल ईरान पर दबाव बनाने में चीन को अलग-थलग नहीं करना चाहते। ट्रंप ने ईरान को बार-बार हमले की धमकी दी है।

ईरान को कमजोर करने की रणनीति

पिछले साल ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन पर सख्ती की गई। ट्रंप ने तब कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार हुआ तो अमेरिका हमला करेगा। अब प्रदर्शन थम गए हैं, लेकिन ट्रंप की धमकियां जारी हैं। वे कह रहे हैं कि ईरान या तो परमाणु समझौता करे या हमला झेले।

ईरान ने हाल में परमाणु साइट्स पर हमलों का सामना किया है और क्षेत्रीय युद्ध की आशंका जता रहा है। यह पूरी स्थिति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु प्रसार और महाशक्तियों के बीच संतुलन को प्रभावित कर रही है। ट्रंप की रणनीति ईरान को कमजोर करके मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाना है, जबकि चीन-रूस गठजोड़ बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत कर रहा है। भारत जैसे देशों ने अमेरिकी दबाव में ईरान से दूरी बनाई है, लेकिन चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरानी तेल पर निर्भर है।

 

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