WHO की सलाह- सर्दी-जुकाम में न लें एंटीबायोटिक, बताया- ‘कब लेनी चाहिए और कब नहीं’

बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों के इलाज में एंटीबायोटिक दवाएं बेहद कारगर मानी जाती हैं। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये दवाएं न सिर्फ संक्रमण को खत्म करती हैं, बल्कि मरीज को राहत भी दिलाती है, लेकिन अगर इन्हीं दवाओं का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों के लिए किया जाए, तो ये बेअसर साबित होती है और सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।

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एंटीबायोटिक लेते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसी को लेकर जानकारी साझा की है कि, एंटीबायोटिक दवाएं लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और ये दवाएं सर्दी-जुकाम पर असर करती हैं या नहीं।

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अक्सर ऐसा होता है कि, सर्दी-जुकाम होते ही लोग खुद ही एंटीबायोटिक खा लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि, ये दवाएं सर्दी या जुकाम जैसे वायरल संक्रमण को ठीक नहीं कर सकतीं क्योंकि ये बीमारियां वायरस से फैलती हैं, जबकि एंटीबायोटिक दवाएं सिर्फ बैक्टीरिया से होने वाली समस्याओं पर असर दिखाती हैं। यानी वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक लेना बेकार है और इससे शरीर को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

कब लेनी चाहिए एंटीबायोटिक

WHO के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाएं तभी लेनी चाहिए जब डॉक्टर ने उन्हें लिखा हो। इसके साथ मरीज को डॉक्टर से यह भी पूछना चाहिए कि जो एंटीबायोटिक दी जा रही है, वह फर्स्ट लाइन ट्रीटमेंट है या नहीं।

 WHO ने बताए संक्रमण से बचाव के उपाय

  • समय-समय पर हाथ धोते रहें।
  • जरूरी टीके समय पर लगवाएं।

ऐसा करने से बार-बार संक्रमण नहीं होगा और दवा लेने की नौबत भी कम आएगी।

कब नहीं लेनी चाहिए एंटीबायोटिक

WHO ने साफ किया है कि इन स्थितियों में एंटीबायोटिक से बचना चाहिए।

  • आम सर्दी-जुकाम, फ्लू या गले की खराश में, क्योंकि ये दवाएं वायरस का इलाज नहीं करतीं।
  • किसी और के साथ दवा साझा न करें। एक व्यक्ति को दी गई दवा दूसरे के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं।
  • दवा को बाद के लिए बचाकर न रखें। कोर्स के बाद बची दवा को दोबारा इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है।

क्या है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस

एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा या गलत इस्तेमाल करने पर शरीर में मौजूद बैक्टीरिया इन दवाओं से लड़ना सीख लेते हैं और बढ़ते चले जाते हैं। इसके बाद दवा का असर होना बंद हो जाता है। इसी स्थिति को एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है।

ऐसा होने पर बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के विकल्प सीमित हो जाते हैं और मरीज को महंगे इलाज का सहारा लेना पड़ सकता है।

बीमारी लंबी खिंचने का खतरा

शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विकसित होने पर तबीयत जल्दी ठीक नहीं होती और व्यक्ति लंबे समय तक बीमार रह सकता है। इतना ही नहीं, रेजिस्टेंट जर्म्स दूसरे बैक्टीरिया के साथ मिलकर ऐसे नए स्ट्रेन भी बना सकते हैं, जिनका इलाज करना बेहद मुश्किल होता है।

 सही तरीके से लें दवा

WHO की सलाह है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से बचने के लिए इन दवाओं का सही तरीके से और उतना ही इस्तेमाल किया जाए, जितना डॉक्टर ने बताया है। पहले की बची हुई दवा बाद में लेना या बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से एंटीबायोटिक खा लेना पूरी तरह टालना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि,  छोटी-मोटी तकलीफ में दवा की दुकान से खुद एंटीबायोटिक लेने की आदत आगे चलकर बड़ी मुसीबत बन सकती है। इसलिए किसी भी बीमारी में खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

 

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