हाई बीपी के मरीज न उठाएं ज्यादा वजन, फट सकती हैं धमनियां

आज के दौर में जब लोग आधुनिक हो गये हैं, तो उनके खान-पान और जीवन शैली में भी काफी बदलाव आ गया है। जैसे कि एक ही स्थान पर देर तक बैठे रहना और जंक फ़ूड खाना आदि, लेकिन क्या आप जानते हैं ये आदतें धीरे-धीरे इन्सान को बीमार बना रही हैं और शरीर को खोखला कर रही हैं। इन्हीं में से एक सबसे खतरनाक बीमारी है हाई ब्लड प्रेशर, जिसे चिकित्सा जगत में ‘हाइपरटेंशन’ कहा जाता है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर शरीर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण या चेतावनी के दस्तक देता है और महत्पूर्ण अंगों पर हमला करता है।

इसे भी पढ़ें- दिल्ली में चला टीबी जांच अभियान, पोर्टेबल X-ray मशीन का कमाल, बस्तियों में मिले हजारों मरीज

रौंगटे खड़े करने वाले हैं आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी किए गए लेटेस्ट आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं, जिसके अनुसार दुनिया भर में लगभग 1.28 अरब वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि, इनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोगों को अपनी इस जानलेवा स्थिति के बारे में कोई जानकारी तक नहीं है। हर साल दुनिया भर में होने वाली करीब एक करोड़ मौतों के पीछे हाई ब्लड प्रेशर को ही मुख्य कारक माना जाता है।

blood-pressure

जब किसी व्यक्ति को हाइपरटेंशन का पता चलता है, तो अक्सर उसके मन में फिटनेस और व्यायाम को लेकर कई तरह की शंकाएं पैदा हो जाती हैं। बहुत से लोग डर के मारे शारीरिक गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं, तो कुछ लोग अपनी सेहत सुधारने के जुनून में जिम में जाकर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, व्यायाम और ब्लड प्रेशर के बीच का संबंध बहुत ही संवेदनशील है, जहां सही प्रकार का व्यायाम आपके रक्तचाप को नियंत्रित कर आपकी उम्र बढ़ा सकता है। वहीं गलत चुनाव और अत्यधिक जोश आपको सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचा सकता है।

ब्रेन हैमरेज या हार्ट अटैक का खतरा

अक्सर यह भ्रांति समाज में घर कर गई है कि, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को बिस्तर पर आराम करना चाहिए और किसी भी तरह के शारीरिक श्रम से बचना चाहिए, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट इसे नकारते हैं। उनका कहना है कि, नियमित रूप से किया गया सही शारीरिक अभ्यास न केवल ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है, बल्कि यह हृदय की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है, जिससे दिल को खून पंप करने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन असली मुद्दा यहां  क्या करें से ज्यादा क्या न करें पर टिका है। कुछ ऐसी एक्सरसाइज हैं जो व्यायाम के दौरान रक्तचाप को इतनी तेजी से बढ़ा देती हैं कि, वह धमनियों की सहनशक्ति से बाहर चला जाता है, जिससे ब्रेन हैमरेज या हार्ट अटैक का खतरा पैदा हो जाता है।

आजकल युवाओं और फिटनेस के शौकीनों के बीच भारी वजन उठाना यानी वेट लिफ्टिंग एक स्टेटस सिंबल बन गया है, लेकिन चिकित्सक चेतावनी देते हैं कि, जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से ही अनियंत्रित है या जिन्हें हृदय से जुड़ी छोटी-सी भी समस्या है, उनके लिए भारी वजन उठाना मौत को दावत देने जैसा हो सकता है, जब हम अपनी शारीरिक क्षमता के 75 प्रतिशत से अधिक का वजन उठाते हैं, तो हमारे शरीर का वैस्कुलर सिस्टम अचानक से संकुचित हो जाता है और हृदय पर अभूतपूर्व दबाव पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डेडलिफ्ट, भारी स्क्वैट्स या बेंच प्रेस जैसी कंपाउंड एक्सरसाइज करते समय अक्सर लोग अनजाने में अपनी सांस रोक लेते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में वालसाल्वा पैंतरेबाज़ी कहा जाता है। सांस रोकने से छाती के अंदर का दबाव बढ़ जाता है, जो कुछ पलों के लिए ब्लड प्रेशर को खतरनाक रूप से स्पाइक कर देता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को अचानक चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छाना या सीने में असहनीय दबाव महसूस हो सकता है। यह स्थिति उन धमनियों के फटने का कारण बन सकती है जो पहले से ही हाइपरटेंशन की वजह से कमजोर हो चुकी हैं।

तेजी से बढ़ था HIIT का चलन

वर्तमान में हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग यानी HIIT का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। इसमें बहुत कम समय में शरीर को उसकी अधिकतम ऊर्जा सीमा तक धकेला जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि, हालांकि स्वस्थ लोगों के लिए यह बेहतरीन है, लेकिन हाई बीपी के मरीजों, शुरुआती फिटनेस चाहने वालों और अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजर रहे व्यक्तियों के लिए यह सुरक्षित नहीं है। HIIT के दौरान हृदय गति और रक्तचाप बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होता है। यह फ्लक्चुएशन हृदय की धमनियों के लिए एक झटके की तरह काम करता है।

इसी तरह लंबी दूरी की तेज दौड़, क्रॉसफिट और अत्यधिक सहनशक्ति वाली ट्रेनिंग भी उन लोगों के लिए जोखिम भरी है जो हाइपरटेंशन की दवाइयां ले रहे हैं। इसके अलावा, लगातार जोर लगाकर किए जाने वाले पुश-अप्स, पुल-अप्स या बिना रुके रस्सी कूदना भी शरीर पर भारी दबाव डालता है। प्रतिस्पर्धी खेलों में, जहां हार-जीत का तनाव होता है, वहां भी ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

कैसे खुद को फिट रखें मरीज

तो सवाल यह उठता है कि, हाइपरटेंशन के मरीज खुद को फिट कैसे रखें? विशेषज्ञों का मानना है कि एरोबिक एक्सरसाइज इस बीमारी का सबसे बेहतरीन इलाज है। तेज चाल से चलना शायद दुनिया का सबसे सुरक्षित व्यायाम है। इसके अलावा साइकिल चलाना, तैराकी और हल्के एरोबिक्स दिल की सेहत के लिए जादू की तरह काम करते हैं। ये गतिविधियां धमनियों को लचीला बनाती हैं और शरीर में रक्त के संचार को सुगम बनाती हैं।

योग और स्ट्रेचिंग भी हाइपरटेंशन के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राणायाम और ध्यान के जरिए न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि स्वायत्त तंत्रिका तंत्र भी शांत होता है, जिससे ब्लड प्रेशर प्राकृतिक रूप से नीचे आता है। हालांकि, योग में भी ‘शीर्षासन’ जैसे आसनों से बचना चाहिए जिनमें सिर नीचे और पैर ऊपर होते हैं, क्योंकि यह सीधे मस्तिष्क की ओर रक्त का दबाव बढ़ा देते हैं। का दुश्मन न बनने दें।

 

इसे भी पढ़ें- गहलोत का भाजपा पर सिलिकोसिस मरीजों की अनदेखी का आरोप

Back to top button