
नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के लिए आज का दिन यादगार बन गया। नीरू ढांढा ने 2026 एशियन गेम्स में महिलाओं की ट्रैप शूटिंग एकल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन कर दिया। नीरू ने फाइनल में न केवल पहला स्थान हासिल किया, बल्कि एशियन गेम्स का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। वे इन खेलों के इतिहास में ट्रैप की एकल स्पर्धा में सोना जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं।
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नीरू का यह गोल्ड इस साल के एशियन गेम्स में भारत का 5वां स्वर्ण पदक है। इसी के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 47 पहुंच गई है। पदक तालिका में भारत अभी 11वें स्थान पर है।
फाइनल में 30 में से 28 शॉट सटीक
फाइनल मुकाबले में नीरू को कुल 30 शॉट मिले। दबाव भरे इस मुकाबले में उन्होंने इनमें से 28 पर सटीक निशाना लगाया। यह प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि, एशियन गेम्स का पुराना रिकॉर्ड टूट गया। अब वे एशियाई खेलों की चैंपियन होने के साथ-साथ इस एकल स्पर्धा की रिकॉर्ड धारक भी हैं।

ट्रैप शूटिंग शॉटगन की स्पर्धा में निशानेबाज को हवा में तेजी से उड़ते हुए लक्ष्य पर निशाना साधना होता है। यहां पल की चूक भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में 30 में से 28 शॉट का सही लगना नीरू की एकाग्रता और तकनीक का प्रमाण है।
चीन को सिल्वर और कुवैत को मिला ब्रांच
फाइनल में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन नीरू के स्कोर तक कोई निशानेबाज नहीं पहुंच सका। चीन की सुन युनगोंग ने 26 का स्कोर हासिल किए और रजत पदक जीता। कुवैत की हजर अब्दुलमलिक 21 के स्कोर के साथ कांस्य पदक विजेता बनीं। स्वर्ण और रजत के बीच दो अंकों का अंतर बताता है कि, नीरू ने मुकाबले में अपनी बढ़त आखिर तक बनाए रखी।
75 साल का इंतजार खत्म
इस जीत की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है कि, एशियन गेम्स के 75 साल के लंबे इतिहास में अब तक कोई भारतीय महिला निशानेबाज ट्रैप एकल स्पर्धा का स्वर्ण नहीं जीत सकी थी। भारतीय महिला निशानेबाजों को लंबे समय से इस पदक का इंतजार था। नीरू ने यह इंतजार खत्म कर दिया और भारतीय खेल के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।
क्वालीफिकेशन में भी टॉप पर
फाइनल से पहले क्वालीफिकेशन राउंड में भी नीरू का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था। वे इस दौर में शीर्ष पर रहीं। कतर की निशानेबाज के साथ उनका स्कोर बराबर था। दोनों ने 118 अंक बनाए और संयुक्त रूप से पहला स्थान साझा किया। यानी खिताबी मुकाबले में वे पहले से ही मजबूत दावेदार के रूप में उतरी थीं। फाइनल में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड पर कब्जा जमा लिया।
48 साल बाद भारत को मिला गोल्ड
ट्रैप की एकल स्पर्धा में भारत को लंबे समय से गोल्ड का इंतजार था। इससे पहले किसी ट्रैप शूटिंग इवेंट की एकल स्पर्धा में भारत ने आखिरी बार 1978 में सोना जीता था। तब पुरुषों की ट्रैप एकल स्पर्धा में रणधीर सिंह ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।अब 48 साल बाद भारत को गोल्ड हासिल हुआ है। नीरू की जीत ने लगभग पांच दशक पुराने इस इंतजार को खत्म कर दिया।
साल 2026 बना नीरू का साल
नीरू के लिए यह साल पहले से ही शानदार रहा है। जुलाई में उन्होंने इटली में खेले गए शॉटगन वर्ल्ड कप के ट्रैप इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। उस जीत के साथ वे ट्रैप शूटिंग में वर्ल्ड कप गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बनी थीं।

यानी कुछ ही महीनों के भीतर नीरू ने दो बड़े मंचों पर पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया है। पहले विश्व स्तर पर और अब एशियाई स्तर पर। यह लगातार सफलता बताती है कि ट्रैप शूटिंग में भारत को एक भरोसेमंद और प्रतिभाशाली चेहरा मिल गया है।
भारत की झोली में 5वां स्वर्ण
2026 एशियन गेम्स में भारत को अब तक पांच स्वर्ण पदक मिल चुके हैं। इन पांच सोने की कहानी अलग-अलग खेलों से जुड़ी है। महिला क्रिकेट टीम ने गोल्ड जीता। कबड्डी में महिला और पुरुष, दोनों टीमों ने सोना हासिल किया। निशानेबाजी में कमलजीत और सुरुचि सिंह ने स्वर्ण पदक जीता। अब इस सूची में नीरू ढांढा का नाम भी जुड़ गया है।
भारत के खाते में कुल 47 पदक हो चुके हैं और टीम पदक तालिका में 11वें स्थान पर है। खेलों में अभी आगे भी मुकाबले बाकी हैं, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भारतीय खिलाड़ी पदकों की संख्या और तालिका में अपनी स्थिति दोनों में सुधार करेंगे।
निशानेबाजी में दिखी उम्मीद
नीरू की इस कामयाबी से भारतीय निशानेबाजी को नया आत्मविश्वास मिला है। खासकर ट्रैप जैसी स्पर्धा में, जहां लंबे समय तक भारत को बड़े मंचों पर स्वर्ण का इंतजार रहा, यह जीत नई पीढ़ी के निशानेबाजों के लिए प्रेरणा बन सकती है। वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स, दोनों में सोना जीतकर नीरू ने साबित कर दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की उम्मीदों की मजबूत दावेदार हैं।
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