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कई बीमारियां शुरुआती दौर में नहीं दिखातीं कोई लक्षण
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ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की जांच पर विशेषज्ञों का जोर
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हर किसी को हर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं, डॉक्टर की सलाह से तय करें जांच
नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जो शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नहीं दिखातीं, लेकिन जांच कराने पर उनके संकेत मिल सकते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराते रहना फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि 30 साल की उम्र में हर व्यक्ति को सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती।
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हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है जांच की सूची
स्वास्थ्य जांच की जरूरत सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करती। परिवार में किसी बीमारी का इतिहास, व्यक्ति का वजन, खान-पान, जीवनशैली और पहले की स्वास्थ्य रिपोर्ट जैसे कई कारक यह तय करते हैं कि, किसे कौन-सी जांच कब करानी चाहिए। किसी के लिए जो टेस्ट जरूरी है। वही दूसरे के लिए गैरजरूरी हो सकता है, इसलिए कुछ सामान्य जांचों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
ब्लड प्रेशर: लक्षण का इंतजार न करें
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर खामोश बीमारी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती दौर में कई बार कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देता। ऐसे में इसकी जांच सिर्फ तभी कराना, जब सिरदर्द या कोई दूसरी परेशानी हो, सही तरीका नहीं माना जाता। स्वास्थ्य जांच के दौरान ब्लड प्रेशर नापना एक आसान तरीका है, जिससे बढ़े हुए दबाव का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए। अगर पहली जांच में रीडिंग ज्यादा आती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच या घर पर निगरानी की सलाह दे सकते हैं, ताकि स्थिति की सही तस्वीर सामने आ सके।
कोलेस्ट्रॉल: सिर्फ खून की जांच से चलता है पता
शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है या नहीं, इसका पता केवल जांच से ही चलता है। वजह यह है कि, हाई कोलेस्ट्रॉल में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसके लिए साधारण खून की जांच, यानी लिपिड प्रोफाइल कराई जाती है।
अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सीडीसी (CDC) के अनुसार ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों को सामान्य तौर पर हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की जरूरत हो सकती है। वहीं जिन लोगों को हृदय रोग या डायबिटीज है, या जिनके परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है, उन्हें यह जांच ज्यादा बार करानी पड़ सकती है।
ब्लड शुगर और HbA1c पर भी रखें नजर
ब्लड शुगर की जांच से शरीर में ग्लूकोज के मौजूदा स्तर का पता चलता है, जबकि HbA1c टेस्ट पिछले कुछ महीनों के दौरान ब्लड शुगर के औसत स्तर की जानकारी देता है। दोनों जांचें मिलकर डायबिटीज या उसके जोखिम को समझने में मदद करती हैं।
हालांकि, 30 साल की उम्र में हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज की जांच जरूरी नहीं मानी जाती। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी संस्था यूएसपीएसटीएफ (USPSTF) बिना लक्षण वाले 35 से 70 साल के ऐसे वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह देती है, जिनका वजन ज्यादा है या जो मोटापे से ग्रस्त हैं, लेकिन अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर इससे पहले भी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
वजन और कमर का घेरा भी अहम
केवल वजन देखकर सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है। हालांकि, वजन और लंबाई की मदद से बीएमआई (BMI) निकाला जा सकता है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर का वजन सामान्य सीमा में है या नहीं। इसके साथ कमर की चौड़ाई भी देखि जा सकतीहै, क्योंकि पेट के आसपास जमा ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है।
अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, अचानक घट रहा है या शरीर में लगातार कोई बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
महंगी जांचों से पहले लें सलाह
आजकल कई लोग बिना जरूरत ईसीजी (ECG), पूरे शरीर के स्कैन या हर तरह की जांच कराने की ओर झुकाव दिखाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक 30 की उम्र में हर व्यक्ति के लिए ये सभी जांचें जरूरी नहीं होतीं। कौन-सा टेस्ट कराना चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों पर निर्भर करता है।

ऐसे में बिना जरूरत महंगे टेस्ट कराने के बजाय बेहतर यही है कि डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से हेल्थ चेकअप की सूची पूछी जाए। इससे न केवल पैसे और समय की बचत होती है, बल्कि गैरजरूरी चिंता से भी बचा जा सकता है।
जांच का मकसद सिर्फ बीमारी ढूंढना नहीं
नियमित स्वास्थ्य जांच का उद्देश्य केवल बीमारी का पता लगाना नहीं है। इसका बड़ा मकसद स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को समय रहते समझना और उन पर काबू पाना भी है। अगर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या शुगर जैसी चीजें शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ जाएं, तो खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली में बदलाव करके स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
किन चीजों का रखें ध्यान
- जांच रिपोर्ट को संभालकर रखें, ताकि डॉक्टर पुरानी और नई रिपोर्ट की तुलना कर सकें
- परिवार में किसी को हृदय रोग, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल रहा हो तो डॉक्टर को जरूर बताएं
- रिपोर्ट सामान्य आने पर भी संतुलित खान-पान और सक्रिय दिनचर्या बनाए रखें
- खुद से रिपोर्ट देखकर दवा शुरू या बंद न करें, हर फैसला डॉक्टर की सलाह से लें
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नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी जांच या इलाज से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।



