
टॉयलेट जाने के दौरान खून दिखना एक ऐसी समस्या है, जिसे ज्यादातर लोग हल्के में लेते हैं या बवासीर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि, यह लक्षण हमेशा बवासीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार यह आंत या मलाशय से जुड़ी गंभीर बीमारियों का भी शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे में बार-बार खून आने की स्थिति को अनदेखा करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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कई कारण से आता है खून
चिकित्सकों के अनुसार, मल त्याग के दौरान खून आने की सबसे सामान्य वजह बवासीर होती है। यह समस्या खासतौर पर तब सामने आती है जब व्यक्ति को कब्ज की शिकायत हो या मल त्याग के दौरान अत्यधिक जोर लगाना पड़े। ऐसी स्थिति में मलद्वार की नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे कई बार खून आ जाता है, लेकिन यह मान लेना कि हर बार खून आने की वजह सिर्फ बवासीर ही है, चिकित्सकीय दृष्टि से सही नहीं है। इसके अलावा गुदा क्षेत्र में पड़ने वाली छोटी सी दरार, जिसे चिकित्सकीय भाषा में एनल फिशर कहा जाता है, भी खून आने की एक आम वजह है। इस स्थिति में मल त्याग के दौरान दर्द और जलन जैसी परेशानी भी महसूस हो सकती है।

इसके अतिरिक्त लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज, मल का अत्यधिक सख्त हो जाना, आंतों में सूजन, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) और आंतों में बनने वाले पॉलीप जैसी स्थितियां भी रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि, खून के रंग या उसकी मात्रा के आधार पर खुद ही बीमारी का अंदाजा लगाना उचित नहीं है, क्योंकि -अलग कारणों से होने वाली ब्लीडिंग के लक्षण एक जैसे दिख सकते हैं, जबकि उनका उपचार पूरी तरह अलग होता है।
किन लक्षणों के साथ खून आए तो हो जाएं सतर्क
कानपुर ,के स्वरूप नगर स्थित एक निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर श्रॉफ के मुताबिक, अगर मल में खून आने के साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण भी लगातार बने रहें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उनके अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कब्ज या दस्त की शिकायत बनी रहती है, मल त्याग की आदत या मल के आकार में अचानक बदलाव दिखाई देता है, पेट में बार-बार दर्द या ऐंठन महसूस होती है, बिना किसी खास वजह के वजन घटने लगता है या लगातार थकान बनी रहती है, तो ऐसी स्थिति में देर किए बिना डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर श्रॉफ बताते हैं कि कोलन यानी बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर के मामलों में भी मल में खून आना या मलाशय से रक्तस्राव होना एक प्रमुख लक्षण हो सकता है। इसके साथ ही मल त्याग की आदतों में बदलाव, पेट से जुड़ी लगातार परेशानी, अस्पष्टीकृत वजन घटना और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
हालांकि, डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि इन लक्षणों का मौजूद होना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति को कैंसर ही है। दरअसल यही लक्षण कई अन्य सामान्य और गंभीर बीमारियों में भी देखने को मिल सकते हैं, इसलिए सटीक और सही कारण का पता जांच के बाद ही चल पाता है। ऐसे में लक्षण दिखते ही घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा बेहतर विकल्प है।
तुरंत लें डॉक्टर की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर टॉयलेट में लगातार खून आ रहा हो, खून की मात्रा सामान्य से अधिक महसूस हो, टॉयलेट का पानी पूरी तरह लाल रंग का दिखाई दे या मल के साथ बड़े आकार के खून के थक्के निकल रहे हों, तो ऐसी स्थिति को सामान्य मानकर इंतजार करना खतरनाक साबित हो सकता है। इन हालात में जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

इसके अलावा अगर रक्तस्राव के साथ चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना या बेहोशी जैसी स्थिति बनना शुरू हो जाए, तो यह शरीर में अधिक मात्रा में खून बहने का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसी तरह अगर मल का रंग सामान्य से बहुत अधिक गहरा या पूरी तरह काला दिखाई दे और उसके साथ रक्तस्राव भी हो, तो यह स्थिति भी गंभीर मानी जाती है, क्योंकि यह पाचन तंत्र के ऊपरी हिस्से में रक्तस्राव का संकेत हो सकती है।
बार-बार होने वाली ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों की सलाह है कि, अगर किसी व्यक्ति को बार-बार या बिना किसी स्पष्ट कारण के मल में खून आने की शिकायत रहती है, तो इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर सबसे पहले शारीरिक जांच करते हैं, जिसके बाद जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट जैसी जांचें भी की जा सकती हैं। कई बार शुरुआती जांच में स्पष्ट कारण सामने न आने पर डॉक्टर मरीज को आगे की विशेष जांच कराने की सलाह भी दे सकते हैं, ताकि बीमारी की सही वजह का पता लगाया जा सके और समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके।
लापरवाही से बचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, टॉयलेट में खून आने की समस्या को शर्म या झिझक के चलते नजरअंदाज करना कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में यह बवासीर या गुदा की दरार जैसी सामान्य समस्याओं के कारण होता है, जिनका इलाज आसानी से संभव है, लेकिन कुछ मामलों में यह आंतों या मलाशय से जुड़ी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है।
ऐसे में सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरी जांच करवाना ही सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम माना जाता है। लक्षणों को पहचानकर समय रहते इलाज शुरू करने से न केवल बीमारी की सही पहचान हो पाती है, बल्कि गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ही उस पर काबू भी पाया जा सकता है।
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