भाभी के इश्क़ में गई भाई की जान, पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के पीछे निकली 7 साल पुरानी रंजिश

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में हुए बहुचर्चित हत्याकांड की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अपनी ही पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया है, लेकिन इस पूरे मामले की जड़ में जो कहानी छिपी है वह करीब सात साल है। कहानी पुरानी पारिवारिक कलह और एक प्रेम-प्रसंग से जुड़ी बताई जा रही है।

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2019 में हुई थी बड़े भाई की हत्या

परिजनों के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत आज से सात साल पहले हुई थी। अरविंद सिंह के सगे बड़े भाई सुनील सिंह की वर्ष 2019 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सुनील सिंह कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, वे मुंबई में शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के पीआरओ के रूप में काम कर चुके थे। उनकी हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था। इस हत्याकांड में अरविंद के चचेरे भाई मनीष को मुख्य आरोपी बनाया गया था और उसे जेल जाना पड़ा था।

देवर-भाभी के रिश्ते से उपजा विवाद

सुनील सिंह की पत्नी के भाई सूरज सिंह ने इस पूरे मामले पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि, इस हत्याकांड के पीछे असली वजह पारिवारिक रिश्तों में आई दरार थी।

Azamgarh murder case

सूरज सिंह के मुताबिक, अरविंद की पत्नी और मनीष के बीच प्रेम संबंध पनप गए थे। यह बात जब सुनील सिंह को पता चली, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। सुनील ने इस रिश्ते को गलत मानते हुए मनीष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उसके विरुद्ध चोरी, छिनैती व छेड़खानी सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज करवाए। इन मुकदमों के चलते मनीष और उसका साथी अवनीश जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए थे।

जेल से छूटते ही हुई हत्या

अदालत से सजा मिलने के बाद मनीष और अवनीश लंबे समय तक जेल में बंद रहे, लेकिन वर्ष 2019 में जब दोनों जेल से रिहा होकर बाहर आए, तो उसी साल सुनील सिंह की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में मनीष और अवनीश को ही इस हत्याकांड का आरोपी पाया गया और दोनों को दोबारा जेल भेज दिया गया। परिवार के लोगों का मानना था कि यह हत्या उसी पुरानी रंजिश और प्रेम-प्रसंग को लेकर हुए विवाद का नतीजा थी।

डेढ़ महीने पहले ही छूटे थे जेल से

अरविंद के परिजनों के अनुसार, मनीष और अवनीश करीब डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। उनकी रिहाई के बाद से ही परिवार में एक अजीब सा तनाव और डर व्याप्त हो गया था। सुनील सिंह की हत्या की यादें और उसके बाद से चली आ रही पारिवारिक कलह ने घर के सदस्यों को मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। बताया जा रहा है कि, घर में लगभग रोज ही किसी न किसी बात को लेकर विवाद होने लगा था, जिससे पूरा परिवार परेशान रहने लगा था।

सुनील की आत्मा परेशान कर रही है

बढ़ते पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव से परेशान होकर अरविंद की पत्नी बबिता और उसकी सास ने कुछ स्थानीय पंडितों से संपर्क किया। पंडितों से परामर्श करने पर उन्होंने दावा किया कि, दिवंगत सुनील सिंह की आत्मा परिवार को परेशान कर रही है। यही वजह है कि घर में लगातार विवाद और अशांति बनी हुई है।

Azamgarh murder case

पंडितों की इस बात पर विश्वास करते हुए परिवार के सदस्य एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराने के लिए तैयार हो गए। इसी सिलसिले में घर पर पुजारियों को बुलाकर पांच दिवसीय अनुष्ठान शुरू कराया गया, ताकि दिवंगत आत्मा को शांति मिल सके और परिवार का कलह समाप्त हो।

अनुष्ठान के दौरान ही मचा कोहराम

लेकिन यह अनुष्ठान परिवार के लिए शांति नहीं, बल्कि और बड़ी त्रासदी लेकर आया। अनुष्ठान के दौरान ही अरविंद और उसकी पत्नी के बीच पुरानी बातों को लेकर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। परिजनों के अनुसार, हत्या करने से ठीक पहले अरविंद ने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तेरे चक्कर में मेरे भाई सुनील की हत्या हुई थी और अब तू ड्रामा कर रही है। यह सुनकर विवाद और भड़क गया। आपा खोते हुए अरविंद ने अचानक अपने पास मौजूद हथियार से पत्नी पर गोली चला दी। इसके बाद उसने वहां मौजूद दोनों पुजारियों पर भी गोलियां बरसा दीं, जिससे मौके पर ही तीनों की मौत हो गई।

पुलिस मुठभेड़ में मारा गया आरोपी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी अरविंद की तलाश शुरू की। इसी दौरान पुलिस और अरविंद के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें पुलिस ने उसे मार गिराया। इस तरह एक ही घटनाक्रम में परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई। सुनील सिंह की हत्या के सात साल बाद उनकी भाभी, दो पुजारी और खुद हत्यारा अरविंद।

सात साल पुरानी रंजिश का खूनी अंत

पुलिस और परिजनों की मानें तो यह पूरा मामला महज एक अंधविश्वास या पारिवारिक कलह भर नहीं है, बल्कि सात साल पहले शुरू हुई एक रंजिश की परिणति है। देवर-भाभी के कथित प्रेम-प्रसंग से शुरू हुआ यह विवाद पहले एक भाई की जान ले चुका था। अब उसी विवाद ने तीन और लोगों की जान ले ली। मामले की गहनता से जांच में जुटी पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि क्या इस हत्याकांड के पीछे कोई और भी शामिल था या यह पूरी तरह अकेले अरविंद के आवेश और वर्षों की दबी हुई कुंठा का नतीजा था।

 

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