भदोही को लेकर कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब संत रविदास नगर नाम से जाना जाएगा जिला

 मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर

लखनऊ। वाराणसी से सटे भदोही जिले का नाम एक बार फिर से बदल दिया गया है। अब इस जिले को फिर से संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से पहचान मिलेगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिले का नाम ‘संत रविदासनगर भदोही’ के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।

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सपा सरकार ने भी बदला था नाम

इससे पहले सपा की सरकार में जिले के नाम से संत रविदास का नाम हटा दिया गया था और भदोही कर दिया गया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम दोबारा जोड़ने के साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान भी बरकरार रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार से जिले का नाम बदल कर दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने की कोशश की है।

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 कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि, जिले का नाम संत रविदासनगर भदोही होगा। सरकार ने भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास के योगदान को इस निर्णय का आधार बनाया है। नए नाम में संत रविदास के सम्मान के साथ भदोही की पहचान भी शामिल रहेगी।

 सबसे पहले मायावती सरकार में बदला गया था नाम

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब भदोही का नाम बदला गया है। इससे पहले भी कई बार इसका नामकरण हो चुका है। वर्ष 1997 में मायावती सरकार ने सबसे पहले इस जिले का नाम बदल कर संत रविदास नगर किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार बनी तो जिले का नाम बदलकर एक बार फिर से भदोही कर दिया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम फिर शामिल करने का निर्णय लिया है।

दलित और राजभर समाज को संदेश

संत रविदास दलित समाज की आस्था और सामाजिक चेतना के प्रमुख प्रतीक हैं। वहीं भदोही की ऐतिहासिक पहचान भार राज से जुड़ी मानी जाती है। राजभर समाज इस विरासत को अपनी परंपरा से जोड़कर देखता है। ऐसे में जिले के नए नाम में संत रविदास और भदोही, दोनों को स्थान देने का राजनीतिक महत्व है। इसे दोनों समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजस्व संहिता के तहत हुआ नाम परिवर्तन

प्रदेश सरकार की तरफ से कहा गया है कि, नाम परिवर्तन का निर्णय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लिया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर किसी राजस्व क्षेत्र का नामकरण कर सकती है। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप भी बताया गया है।

 

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