वीर सावरकर की वजह से राजनाथ पर भड़के ओवैसी, कहा- अब ये नया राष्ट्रपिता बना देंगे

देश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर वीर सावरकर के नाम पर सियासी जंग देखने को मिल रही है। दरअसल, वीर सावरकर को लेकर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया बयान एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को रास नहीं आया है। राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि अब ये नया राष्ट्रपिता बना देंगे।

ओवैसी ने शेयर किया पत्र

दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि जेल में बंद सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर अंग्रेजों के सामने दया याचिका डाली थी। उनके इस बयान पर ओवैसी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्वीट करते हुए एक पत्र साझा किया। अपने इस ट्वीट में उन्होंने लिखा कि ये उन्होंने सावरकर को लिखा था। ओवैसी ने लिखा कि सावरकर को लिखे लेटर में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के सामने दया याचिका डालने का कोई जिक्र नहीं किया है। ओवैसी ने लिखा कि सावरकर ने अंग्रेजों के सामने पहली याचिका 1911 में डाली थी, तब गांधी अफ्रीका में थे। सावरकर ने फिर 1913-14 में याचिका दाखिल की थी।

ओवैसी ने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या ये झूठ है कि ‘वीर’ ने तिरंगे को नकार दिया था और वो भगवा को झंडे के तौर पर चाहते थे? ओवैसी ने राजनाथ सिंह के भाषण पर सवाल उठाते हुए आगे कहा, ‘कल आपने अपने भाषण में कहा था कि सावरकर ने हिंदू उसको माना था जिसकी जन्मभूमि या मातृभूमि भारत था। लेकिन सावरकर ने हिंदू को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया था जिसके लिए भारत जन्मभूमि और पवित्र भूमि थी।’

उन्होंने आगे लिखा कि उनके (सावरकर) विचार में भारत मुसलमानों और इसाइयों के लिए पवित्र भूमि नहीं थी और इसलिए वो भारत के प्रति वफादार नहीं हो सकते थे। रक्षा मंत्री के रूप में इस पर आपका क्या विचार है? क्या आप इसे मानते हैं? ओवैसी ने ये भी कहा जिसने भी आपका भाषण लिखा है, उसे निकाल देना चाहिए।

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आपको बता दें कि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि जेल में बंद सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर ही अंग्रेजों को दया याचिका लिखी थी। इस बारे में वो बताते हैं कि सावरकर को लेकर कई तरह झूठ फैलाए गए हैं। ऐसा कहा गया था कि सावरकर ने अंग्रेजों के सामने कई बार दया याचिका डाली थी। लेकिन सच तो ये है कि सावरकर ने ये सब गांधी जी के कहने पर किया था। उन्हीं के कहने पर उन्होंने जेल में बैठ दया याचिका दाखिल की थी

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