यूपी में आर्द्रभूमि संरक्षण को नई दिशा: 22 आर्द्रभूमियां अधिसूचित, 275 का सर्वे पूरा, 5.36 करोड़ की परियोजनाएं जारी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमि संरक्षण को सिर्फ पर्यावरण तक सीमित न रखते हुए इसे गंगा पुनर्जीवन, जल सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी के साथ जोड़कर आगे बढ़ा रही है। गंगा के किनारे स्थित 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को प्रदेश में विधिवत अधिसूचित किया जा चुका है। अब इनके वैज्ञानिक और समन्वित प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाओं (आईएमपी) पर काम तेज किया जा रहा है। 8 आर्द्रभूमियों के प्रबंधन प्रस्ताव तैयार हैं, जिनकी समीक्षा जारी है और जल्द ही इन्हें मंजूरी के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के पास भेजा जाएगा।

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राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि, आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण मिलने से इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संस्थागत आधार मजबूत हुआ है। एकीकृत प्रबंधन योजनाओं में आर्द्रभूमि के प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सीधा संबंध गंगा और उसकी सहायक नदियों के नदी तंत्र को मजबूत करने से है।

तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाएं

वर्तमान में मुजफ्फरनगर, प्रयागराज और बलिया में आर्द्रभूमि विकास की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से आर्थिक मदद मिल रही है। तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5.36 करोड़ रुपये है। प्रयागराज में नुमईया दह झील एवं खेड़ुवा ताल, बलिया में दहताल रेवती और मुजफ्फरनगर में कालेवाला झील को लेकर अलग-अलग संरक्षण एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं।

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प्रयागराज की 591.78 हेक्टेयर क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि में स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ आवास पुनर्स्थापन और जल गुणवत्ता सुधार का काम चल रहा है। इसके साथ ही आर्द्रभूमि के स्वास्थ्य में सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। बलिया की 34.70 हेक्टेयर दहताल रेवती में जल संचयन संरचनाओं को मजबूत करने, तटवर्ती इलाके में पौधरोपण और भूजल पुनर्भरण के कार्य कराए जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर की 88.36 हेक्टेयर कालेवाला झील में प्रदूषण नियंत्रण, तटवर्ती क्षेत्र के संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय अपनाए जा रहे हैं।

275 आर्द्रभूमियों का सर्वे  कंप्लीट

प्रदेश में गंगा तटवर्ती 27 जिलों में 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर स्थित कुल 275 आर्द्रभूमियों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण और हेल्थ कार्ड तैयार करने का कार्य पूरा हो चुका है। इनके लिए इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान का निरूपण भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 231 आर्द्रभूमियां गंगा के अलग-अलग नदी-खंडों में शामिल हैं, जिसमें बिजनौर से रामगंगा संगम तक 93, रामगंगा संगम से गोमती संगम तक 106 और गोमती संगम से घाघरा संगम तक 32 आर्द्रभूमियां हैं।

भूजल और नदी तंत्र को मिलेगा लाभ

आर्द्रभूमियां प्राकृतिक रूप से पानी को रोकने, प्रदूषकों को छानने और भूजल पुनर्भरण में मदद करती हैं। इनके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जल सुरक्षा मजबूत होने के साथ जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों को गंगा पुनर्जीवन की व्यापक कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।

आठ नई योजनाओं पर भी होगा काम

राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (उत्तर प्रदेश) के यूनिट हेड नॉलेज एंड प्लानिंग मिथिलेश कुमार (पद) ने बताया कि बदायूं, बुलंदशहर, कानपुर नगर, उन्नाव और मुजफ्फरनगर की आठ आर्द्रभूमियों के आईएमपी प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं। इनमें बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, कानपुर नगर की जैसरमऊ, उन्नाव की कुशराजपुर और मेला रामकुंवर तथा मुजफ्फरनगर की चौरावाला और मिलाखेड़ी शामिल हैं।

Wetland Conservation

इन प्रस्तावों की समीक्षा पूरी होने के बाद इन्हें मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस तरह आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण देने, उनका वैज्ञानिक आकलन करने और मौके पर संरक्षण परियोजनाएं चलाने की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में गंगा पुनर्जीवन को जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका से जोड़ रही है।

22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां, 10 जिलों में करीब 409.63 हेक्टेयर

उच्च प्राथमिकता वाली कुल 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां 10 जिलों में दर्ज हैं। इनमें अलीगढ़ की मुरारखास प्रेतनगर, सिसई और सीकरी आर्द्रभूमियां, कासगंज की बस्तौली-ब्रह्मपुर, सिकंदरपुर खुर्द और रामनछौनी, बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, उन्नाव की मेला रामकुंवर और कुशराजपुर तालाब, प्रयागराज की बड़ा तालाब, उपरिहा तालाब और नुमाईया दाही झील, फर्रुखाबाद की कुठिला झील, खरगपुर खंडौली और रामपुर टफरपुर आर्द्रभूमि, कानपुर नगर की जैसरमऊ, चंदौली की बबरना, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, मुजफ्फरनगर की मिलाखेड़ी व चौरावाला तालाब और भदोही की समदा ताल आर्द्रभूमि शामिल हैं। इन 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 409.63 हेक्टेयर है।

 

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