यूपी में माफियाओं की उड़ी नींद: मुख्तार अंसारी की बढ़ी बेचैनी, बांदा जेल की भी बढ़ाई गई सुरक्षा

उत्तर प्रदेश में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस हत्याकांड के बाद अन्य जेलों में बंद अपराधियों में खौफ भी व्याप्त है। हत्याकांड को लेकर तरह-तरह के बातें कहीं जा रही हैं। इन सबके बीच यूपी के अलग-अलग जेलों में बंद हाई प्रोफाइल क्रिमिनल्स की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा बांदा जेल में बंद बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी की है। जेल प्रशासन ने मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि अंसारी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी की निगरानी तेज कर दी गई है।

इतना ही नहीं, बाहर पीएसी जवानों की भी तैनाती की गई है। उन्हें अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके। जेल के बाहर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। पुलिस तमाम गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। जेल के अंदर जितनी भी चौकियां है, उन्हें भी अलर्ट पर रखा गया है। खबर तो यह भी है कि जेल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और जवानों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। सूत्रों का दावा है कि जिस दिन अतिक और अशरफ की हत्या की गई थी, उस दिन मुख्तार अंसारी को काफी बेचैन देखा गया। हालांकि, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

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जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और उसके बड़े भाई व गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सजा सुनाने का आदेश गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट 29 अप्रैल को जारी करेगी। अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गाजीपुर नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के शनिवार को कोर्ट में उपस्थित नहीं होने के कारण कोर्ट के आदेश की तारीख फिर से तय की गई। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई एक अप्रैल को पूरी हो चुकी थी जब अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों भाइयों पर 2007 में गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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