ज्ञानवापी मस्जिद मामले ने पकड़ा तूल, कोर्ट का फैसला आने के बाद सर्वे का समय तय होगा

ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्यवाही कर रहे एडवोकेट कमिश्नर को बदलने को लेकर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने वादी पक्ष और एडवोकेट कमिश्नर से आपत्ति मांगा है। अदालत का कहना है कि प्रार्थना पत्र की प्रति अभी तक वादी पक्ष के अधिवक्ताओं को प्राप्त नहीं करायी गयी है और न ही एडवोकेट कमिश्नर अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित हुए हैं। ऐसे में न्यायोचित होगा कि प्रार्थना पत्र की प्रति वादी पक्ष को दी जाए। अदालत ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के प्रार्थना पत्र पर अगली सुनवाई के लिए 9 मई 2022 की तिथि मुकर्रर कर दी है।

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी का अदालत के आदेश से सर्वे करने वाले सर्वे कमीशन के कमिश्नर की निष्पक्षता पर शक जाहिर करते हुवे प्रतिवादी पक्ष द्वारा दाखिल याचिका पर अदालत में गहमा गहमी के दरमियान जिरह पूरी हो गई है। दोनों पक्ष के अधिवक्‍ताओं की टीम और पैरोकारो की उपस्थिति में अदालत में जमकर जिरह हुई है। याचिका के वादी मस्जिद कमिटी के अधिवक्ता ने जमकर जिरह करते हुए अदालत से दरखास्त किया कि सर्वे कमिश्नर बदला जाए ताकि सर्वे निष्पक्ष हो सके। वर्त्तमान सर्वे कमिश्नर वादी के तरह काम कर रहे है।

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अदालत में जिरह के दरमियान याचिकाकर्ता मस्जिद कमिटी के अधिवक्ता ने दलील दिया कि कोर्ट ने आदेश दिया गया था कि 6 से 7 मई तक में सर्वे करा लिया जाए, इसका ये मतलब कदापी नहीं के 6 और 7 दोनों दिन जांच की जाए। जिसके मुताल्लिक दूसरे पक्ष ने कहा अब वहां पत्थर उल्टा पलटा गया या खोदा खादी हुई तो आप जांच के बाद आरोप प्रत्यारोप करिए आपत्ति करिए लेकिन जांच करने दीजिये।

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