13 साल बाद OTT पर ‘शाहिद’, लेखक ने स्ट्रीमिंग में हुई देरी पर उठाए सवाल, पूछा- अब क्यों?

राजकुमार राव की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘शाहिद’ आखिरकार ओटीटी पर स्ट्रीम होने जा रही है। ये फिल्म बड़े परदे पर रिलीज के 13 साल बाद प्राइम वीडियो पर देखने को उपलब्ध होगी। दर्शकों के लिए यह खबर राहत भरी है, लेकिन फिल्म के सह-लेखक और संपादक अपूर्व एम असरानी के लिए यह मौका कई सवाल भी लेकर आया है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर फिल्म के सफर और इसकी ओटीटी रिलीज में हुई देरी पर अपनी बात रखी।

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जगह पाने में 13 साल लग गए

सोशल मीडिया पर शेयर पोस्ट की शुरुआत में असरानी ने लिखा, राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली इस फिल्म को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर जगह मिलने में 13 साल का लंबा समय लग गया। पोस्ट में उन्होंने नई पीढ़ी के दर्शकों को फिल्म से परिचय भी कराया। उन्होंने बताया कि ‘शाहिद’ वकील शाहिद आजमी की कहानी है।

Shahid movie OTT

आजमी ने उन लोगों के मुकदमे लड़े, जिन पर आतंकवाद से जुड़े कानूनों के तहत आरोप लगे थे। असरानी के शब्दों में, आजमी उस दौर में कानूनी प्रक्रिया के पालन की लड़ाई लड़ रहे थे, जब मुसलमानों को बेगुनाही साबित होने से पहले ही दोषी मान लिया जाता था। उन्होंने लिखा, इसी हिम्मत की कीमत आजमी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। आजमी की हत्या कर दी गई थी।

देरी पर उठे सवाल

असरानी ने लिखा कि, वे अक्सर सोचते रहे हैं कि ‘शाहिद’ इतने बरसों तक किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं आई। उन्होंने याद दिलाया कि यह फिल्म 2014 से एक साल पहले रिलीज हुई थी। उनके मुताबिक, इसके बाद देश में ऐसा राजनीतिक माहौल बना, जिसमें असहमति रखने वाले, एक्टिविस्ट, पत्रकार और आरोपियों के अधिकारों की पैरवी करने वाले लोग तेजी से शक के घेरे में आने लगे। उन्होंने लिखा कि, इनमें से कई लोगों को बिना ट्रायल के सालों तक जेल में रहना पड़ा।

गौर करने की बात यह है कि, असरानी ने फिल्म की देरी को इसी माहौल से जोड़कर देखा है। यह उनका अपना नजरिया है। पोस्ट में देरी के किसी आधिकारिक कारण का जिक्र नहीं किया गया है।

 ‘कोशर’ शब्द का जिक्र

पोस्ट में असरानी ने सिर्फ अपनी फिल्म की बात नहीं की, बल्कि उन फिल्मकारों की मुश्किलों की तरफ भी इशारा किया जो ‘शाहिद’ जैसी कहानियां कहना चाहते थे। उनका कहना है कि, ऐसी कहानियों की तरफ खिंचने वाले कई फिल्मकार, अभिनेता और लेखक या तो उन्हें बनाने के लिए जूझते रहे, या फिर सिस्टम ने उन्हें ऐसी कहानियां कहने के लिए राजी कर लिया, जिन्हें उन्होंने कोशर यानी सिस्टम को मंजूर कहानियां कहा।

असरानी ने आगे लिखा कि ये कहानियां अपनी औसत गुणवत्ता के बावजूद राष्ट्रीय पुरस्कार जीतती रहीं, क्योंकि वे राजनीतिक तौर पर सिस्टम के अनुकूल थीं। ये उनके निजी विचार हैं। पोस्ट में उन्होंने किसी खास फिल्म या पुरस्कार का नाम नहीं लिया।

फिल्म पर गर्व है

पोस्ट का सबसे अहम हिस्सा वह सवाल है, जो असरानी ने खुद से और पाठकों से पूछा। उन्होंने लिखा कि ‘शाहिद’ जैसी फिल्म को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म 2026 में ही क्यों मिला। क्या माहौल बदल गया है? क्या डर की राजनीति का विरोध बढ़ रहा है?

इन सवालों का उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उनका कहना था कि, वजह चाहे जो भी हो, उन्हें इस फिल्म पर गर्व है। उनके अनुसार, इस फिल्म ने उन्हें सह-लेखक और संपादक के रूप में पहचान दी और उन्हें उस तरह के सिनेमा से दोबारा जोड़ा, जिसमें उनका भरोसा है।

 प्राइम वीडियो का जताया आभार

पोस्ट के आखिर में असरानी ने दर्शकों से सीधी अपील की, और कहा जिन्होंने फिल्म नहीं देखी है, वे इसे जरूर देखें, जो देख चुके हैं, वे इसे दोबारा देखें। उन्होंने इसे एक शानदार टीम की बनाई फिल्म बताया और कहा कि, यह उस हिम्मत वाले सिनेमा की याद दिलाती है, जिसे कभी बनाया जाता था और जिसकी तारीफ की जाती थी। पोस्ट का समापन उन्होंने प्राइम वीडियो के प्रति आभार जताते हुए किया।

क्या है फिल्म ‘शाहिद’ की कहानी?

हंसल मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘शाहिद’ 2013 में रिलीज हुई थी। यह एक जीवनी आधारित फिल्म है, जो वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की जिंदगी पर बनी है। साल 2010 में आजमी की हत्या कर दी गई थी।

Shahid movie OTT

फिल्म में राजकुमार राव ने ‘शाहिद आजमी’ का किरदार निभाया है। उनके साथ मोहम्मद जीशान अय्यूब, प्रभलीन संधू और बलजिंदर कौर जैसे कलाकार भी मुख्य भूमिकाओं के नजर आ रहे हैं।

 अब हर दर्शक पर पहुंचेगी फिल्म

ओटीटी पर आने का सबसे सीधा असर यह होगा कि अब फिल्म तक पहुंच आसान हो गई है। जो दर्शक सिनेमाघरों में इसे नहीं देख पाए थे, उनके पास अब प्राइम वीडियो पर इसे देखने का मौका है।

वहीं असरानी का पोस्ट इस लिहाज से भी ध्यान खींचता है कि उसमें एक फिल्म की रिलीज की खुशी के साथ उस पर चल रही बहस भी दिखती है। कौन-सी कहानी किस दौर में कहां पहुंचती है, इस पर उन्होंने अपनी राय खुलकर रखी है। फिलहाल फिल्म के ओटीटी पर आने की वजहों पर किसी और पक्ष की टिप्पणी आपके दिए लेख में शामिल नहीं है।

 

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