महंत दिग्विजयनाथ-अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर CM योगी का बड़ा बयान, सोशल मीडिया को लेकर कही ये बात

  • ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

  •  29 सितंबर तक श्रद्धालु मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के मुख से सुनेंगे कथा

गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, वर्तमान समय में सत्य और असत्य के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने अर्धसत्य के रूप में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्धसत्य कभी भी पूर्ण सत्य नहीं हो सकता, और जब मनुष्य सत्य एवं असत्य के बीच का अंतर पहचानने में असमर्थ हो जाता है, तो वह भ्रम की स्थिति में फंस जाता है। यही भ्रम आगे चलकर जीवन में अज्ञानता को जन्म देता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भले ही विज्ञान कितनी भी प्रगति क्यों न कर ले, स्थायी सुख-शांति की खोज में मनुष्य को अंततः भारत की सनातन परंपरा का ही सहारा लेना पड़ता है।

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उद्घाटन समारोह को किया संबोधित

मुख्यमंत्री योगी बुधवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के उद्घाटन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसमें गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ तथा वृंदावन के रेवासा धाम से पधारे कथा व्यास श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया।

CM YOGI

इसके उपरांत अखंड ज्योति की स्थापना की गई, व्यासपीठ का विधिवत पूजन-अर्चन हुआ और श्रीमद्भागवत की स्थापना के साथ कथा ज्ञान यज्ञ की औपचारिक शुरुआत हुई। यह आयोजन ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं तथा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में किया जा रहा है और 29 सितंबर तक चलेगा।

विचार और आचरण में एकरूपता जरूरी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिस व्यक्ति के विचार और आचरण में एकरूपता होती है, उसका व्यक्तित्व स्वतः ही प्रभावशाली बन जाता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के मन, वाणी और कर्म एक ही दिशा में अग्रसर होते हैं, तभी उसे जीवन में वास्तविक सफलता हासिल होती है।

इसके विपरीत यदि व्यक्ति कुछ और बोलता है, आचरण में कुछ और करता है तथा मन में कुछ अलग ही विचार रखता है, तो उसके जीवन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी दशा में व्यक्ति न तो कहीं का रहता है और न ही उसे कोई ठौर मिलती है। यही स्थिति जीवन में अज्ञानता की सबसे बड़ी जड़ भी बनती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज संपूर्ण विश्व की मानवता के समक्ष मानसिक अशांति एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आई है। यद्यपि विज्ञान ने अत्यंत उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी जीवन में स्थायी सुख-शांति प्राप्त करने का मार्ग केवल भौतिक उन्नति में नहीं खोजा जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा तथा कथाओं की पावन विरासत मनुष्य को उसके जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने और सही दिशा तलाशने में मदद करती है।

पांच हजार वर्षों से जीवंत है भागवत कथा की परंपरा

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि, श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा-परंपरा विगत पांच हजार वर्षों से भारतीय स्मृति और संस्कृति में अक्षुण्ण रूप से जीवित है। शुकदेव महाराज द्वारा राजा परीक्षित को इस पावन कथा का श्रवण कराए जाने के समय से लेकर वर्तमान तक एक लंबी कालावधि व्यतीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि युगों के बदलने के साथ सनातन धर्म ने अनेकानेक विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, उतार-चढ़ाव का क्रम भी निरंतर बना रहा, परंतु भारतीय स्मृति में ऋषि परंपरा और कथा-परंपरा सदैव जीवंत रही, जिसे कोई भी शक्ति मिटा नहीं सकी।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में भी जब कभी इस पावन कथा का आयोजन होता है, तब हजारों की संख्या में श्रद्धालु इसमें सम्मिलित होते हैं। श्रद्धालु कथा के माध्यम से जीवन के यथार्थ को अनुभव करते हैं, अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का प्रयत्न करते हैं और अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग खोजते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म की नवीन प्रेरणा प्रदान करती है।

धर्म, संस्कृति और विरासत को समझने का सुअवसर

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष दो-तीन बार आयोजित होने वाली पावन कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपने धर्म, संस्कृति, परंपरा, मूल्यों तथा विरासत को समझने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि, कथा की ये पावन परंपराएं जीवन-मार्ग को सुगम और सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि, श्रद्धालुओं के लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि, इस वर्ष उन्हें वृंदावन धाम से पधारे परम वीतरागी संत मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के श्रीमुख से इस पावन कथा को श्रवण करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के गोरक्षपीठ आगमन पर उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि, उन्होंने अपने विचारों के अनुरूप ही अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया है।

साप्ताहिक कार्यक्रमों की कड़ी में कथा ज्ञान यज्ञ

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष साप्ताहिक कार्यक्रमों की एक शृंखला आयोजित की जाती है। इसी क्रम में अपराह्न सत्र में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ तथा प्रातःकालीन सत्र में भारत की सनातन परंपरा से संबंधित महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों पर विद्वत समाज की गोष्ठियां आयोजित होती हैं। मुख्यमंत्री योगी ने दोनों ब्रह्मलीन आचार्यों के श्रीचरणों में नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे मौजूद

इस अवसर पर अयोध्या धाम से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य एवं सुग्रीव किलाधीश स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य, जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य, बड़े भक्तमाल के स्वामी अवधेश दास, स्वामी रामानंद दास, महंत राजू दास, महंत राम लखन दास, महंत बालक दास तथा गाजियाबाद के दूधेश्वरनाथ मंदिर से पधारे जूना अखाड़ा के श्रीमहंत नारायण गिरि समेत अनेक संत-महात्मा और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

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