अगर आप भी बार-बार भूल जाते हैं चीजें, तो हो जाएं सावधान, कहीं ये डिमेंशिया के लक्षण तो नहीं

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी चीजें भूल जाना आम बात हो गई है। कभी चाबियां कहां रखीं हैं, याद नहीं रहता, तो कभी कोई जरूरी मीटिंग या किसी से हुई बातचीत दिमाग से निकल जाती है। ज्यादातर लोग इसे उम्र, तनाव या व्यस्तता की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब यह समस्या बार-बार होने लगे और व्यक्ति खुद को पहले जैसा महसूस न करे, तो सवाल उठता है कि, क्या यह सिर्फ दिमागी थकान है या फिर डिमेंशिया जिसे मनोभ्रंश भी कहते हैं, जैसी गंभीर स्थिति की शुरुआत?

अल्जाइमर और डिमेंशिया में फर्क 

डिमेंशिया एक प्रगतिशील न्यूरोडिजेनरेटिव स्थिति है, जिसमें याददाश्त के साथ-साथ सोचने, समझने, फैसला लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। अल्जाइमर इसका सबसे आम प्रकार है। वहीं दिमागी थकान तनाव, नींद की कमी, ज्यादा स्क्रीन टाइम या मानसिक ओवरलोड से होती है, जो आमतौर पर आराम और जीवनशैली बदलाव से ठीक हो जाती है। दोनों में भूलने की समस्या दिखती है, लेकिन इनके बीच कुछ फर्क भी होता है, जिसे समझना बहुत जरूरी है।

डिमेंशिया

इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि, दिमागी थकान में भूलना ‘अस्थायी’ और ‘स्थिति-निर्भर’ होता है। व्यक्ति थकान महसूस करता है, लेकिन थोड़ी देर आराम करने, पानी पीने या ध्यान केंद्रित करने पर चीजें याद आ जाती हैं। वह अपने रोजमर्रा के काम, जैसे खाना बनाना, ड्राइविंग या बातचीत, सामान्य रूप से कर पाता है। वहीं डिमेंशिया में भूलना ‘प्रगतिशील’ और ‘स्थायी’ होता जाता है। व्यक्ति सिर्फ चाबियां नहीं भूलता, बल्कि यह भूल जाता है कि, चाबियां क्या होती हैं या उन्हें किसलिए इस्तेमाल किया जाता है।

डिमेंशिया के लक्षण

चिकित्सक कहते हैं कि, अगर कोई बार-बार एक ही सवाल कर रहा है, जबकि उस बात का जवाब उसे बार-बार दिया जा रहा है, तो ये डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है। इसी तरह से, हाल की घटनाओं या बातचीत को याद न रख पाना, जबकि पुरानी यादें मजबूत रहती हैं। परिचित रास्तों या जगहों पर भटक जाना। परिचित चेहरों या रिश्तेदारों को पहचानने में देरी या भ्रम। फैसले लेने, योजना बनाने या बहु-कार्य करने में कठिनाई। समय और तारीख के बारे में उलझन। मूड में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन या उदासी।
रोजमर्रा के कामों में गड़बड़ी, जैसे गैस बंद करना भूलना या खाना जलाना आदि भी डिमेंशिया के लक्षण हैं।

दिमागी थकान के लक्षण

थकान महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल।
छोटी-छोटी बातें भूलना, लेकिन याद करने पर तुरंत याद आ जाना।
काम के बीच-बीच में थकावट या ‘ब्रेन फॉग’।
नींद पूरी न होने पर ज्यादा भूलना।
आराम, अच्छी नींद और ब्रेक लेने से सुधार होना।

ये हैं अंतर 

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, डिमेंशिया और थकान ने  फर्क करने का सबसे आसान तरीका है, अगर भूलने की समस्या सिर्फ थकान या तनाव के समय बढ़ती है और आराम करने पर ठीक हो जाती है, तो यह दिमागी थकान है, लेकिन अगर भूलना रोज बढ़ रहा है, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है और परिवार वाले भी नोटिस कर रहे हैं, तो यह डिमेंशिया की शुरुआत हो सकती है।

कैसे बचें

विशेषज्ञ कहते हैं कि, याददाश्त को मजबूत रखने और दिमागी थकान से बचने के लिए रोज 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।
संतुलित आहार लें, जिसमें ओमेगा-3 (मछली, अखरोट), एंटीऑक्सीडेंट (फल-सब्जियां), विटामिन B12 शामिल हो।
रोज 30 मिनट व्यायाम या वॉक करें, इससे ब्रेन में ब्लड फ्लो बढ़ता है।
दिमाग को एक्टिव रखें, जैसे पढ़ना, लिखना, पहेलियां, नई भाषा या संगीत सीखना।
तनाव से दूर रहे इसके लिए, मेडिटेशन, योग या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें।
स्क्रीन टाइम कम करें, खासकर रात में।
छोटी बातों को नोटबुक या फोन में लिखने की आदत डालें।

लोगों से मिलें, दोस्तों-परिवार से बातचीत दिमाग को तेज रखती है।

कब लें डॉक्टर से सलाह

अगर निम्न लक्षण 3-6 महीने से लगातार दिख रहे हों, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या जेरिएट्रिकियन से मिलें

बार-बार एक ही बात पूछना।
परिचित जगहों पर भटक जाना।
व्यवहार में बदलाव (चिड़चिड़ापन, अवसाद)।
फैसले लेने में कठिनाई।
रोजमर्रा के कामों में असमर्थता।

डॉक्टर कहते हैं कि, शुरुआती जांच से अल्जाइमर या अन्य डिमेंशिया का पता चल सकता है। दवाएं, थेरेपी और जीवनशैली बदलाव से स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बार-बार भूलना हमेशा डिमेंशिया नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। समय रहते फर्क समझकर सही कदम उठाना महत्वपूर्ण है। स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक सक्रियता और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। अगर आपको या आपके किसी परिचित को ऐसी समस्या हो रही है, तो देर न करें – सही समय पर जांच और सलाह लें, इससे स्थिति को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।

 

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