विजय सिन्हा ने दी महागठबंधन को मात, जाने क्यों बना बिहार में ये ऐतिहासिक चुनाव

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन आज स्पीकर पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक विजय सिन्हा ने जीत हासिल की है। एनडीए उम्‍मीदवार के रूप में उतरे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले विजय सिन्हा पहले बीजेपी विधायक हैं। इससे पहले कभी भी भाजपा के खाते में विधानसभा स्पीकर की सीट नहीं गई है।

बिहार विधानसभा के लिए भाजपा विधायक विजय सिन्हा को स्पीकर चुना गया है, जबकि महागठबंधन प्रत्‍याशी अवध बिहारी चौधरी को हार मिली है। विजय सिन्हा के पक्ष में 126 वोट पड़े। वहीं, महागठबंधन उम्मीदवार को 114 विधायकों का समर्थन रहा। वहीं, चुनाव के दौरान विपक्ष ने सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति को लेकर हंगामा किया। विपक्ष का कहना था कि नीतीश कुमार विधायक नहीं हैं, इसलिए उन्हें सदन से बाहर भेजा जाए।

नीतीश की मौजूदगी पर उठे सवाल

राजद नेता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने नीतीश कुमार की मौजूदगी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, विधानसभा में लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। जनादेश का अपहरण किया जा रहा है। सदन में नीतीश कुमार क्यों मौजूद हैं, जबकि वह विधायक ही नहीं हैं। विपक्ष ने मांग की है कि नीतीश कुमार को सदन से बाहर किया जाए, क्योंकि वह विधायक नहीं हैं।

वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई। इसके अलावा, अशोक चौधरी और मुकेश सहनी की भी उपस्थिति पर आपत्ति जताई गई। इस दौरान नारेबाजी भी की गई।

मांझी ने दिया विपक्ष को जवाब

हालांकि, प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए वह सदन में मौजूद रह सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि नीतीश कुमार स्पीकर पद के लिए हो रहे चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन वह सदन में रहेंगे।’ बता दें कि नीतीश कुमार विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। वह बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं।

राबड़ी देवी सीएम थीं तब लालू मौजूद रहे थे

बिहार विस में इससे पहले भी स्पीकर के चुनाव के समय दूसरे सदन के सदस्य मौजूद रहे हैं। जब राबड़ी देवी बिहार की मुख्‍यमंत्री थीं, तब उनके पति लालू प्रसाद यादव सांसद होने के बावजूद सदन में मौजूद रहे थे।

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क्‍यों बना ये ऐतिहासिक चुनाव?

बिहार विधानसभा के स्पीकर का चुनाव इस बार 51 साल बाद ऐतिहासिक इसलिए है, क्योंकि एक से अधिक प्रत्याशी मैदान में हैं। आमतौर पर सत्तापक्ष के पास बहुमत होने से उसके प्रत्याशी को सर्वसम्मति से स्पीकर चुन लिया जाता है। इससे पहले 1969 में ऐसी स्थिति बनी थी। तब सत्ता पक्ष ने रामनारायण मंडल को प्रत्याशी बनाया था, जबकि विपक्ष की ओर से रामदेव प्रसाद दावेदार थे। आखिरकार रामनारायण मंडल जीत गए थे।

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