
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वैश्विक मंच से भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने एक बार फिर भारत के साथ अपने देश की गहरी और अटूट दोस्ती को दुनिया के सामने रखा। UNGA के मंच से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम टोबगे ने भारत को भूटान का सबसे भरोसेमंद साझेदार बताया। टोबगे ने कहा, भूटान की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ (GMC) को साकार करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अहम योगदान है।
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टोबगे के बयान से बढ़ी भारत की साख
टोबगे ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, परियोजना को मोदी की अगुवाई वाली भारत सरकार और असम राज्य सरकार का ऐतिहासिक सहयोग मिल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देशों के शीर्ष नेता वैश्विक मंच से अपने-अपने देशों की विदेश नीति और आर्थिक प्राथमिकताओं को साझा कर रहे हैं। भूटान जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश का भारत के प्रति इस तरह खुलकर भरोसा जताना दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती साख का प्रमाण माना जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करने के दौरान भूटानी प्रधानमंत्री ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की भौगोलिक स्थिति का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, यह परियोजना भारतीय सीमा के ठीक पास स्थित है, जो भूटान का सबसे करीबी और भरोसेमंद पड़ोसी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, इस प्रोजेक्ट को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का प्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है, साथ ही पड़ोसी राज्य असम की सरकार भी इसमें सक्रिय सहयोग कर रही है।
भारत की आर्थिक ताकत का जिक्र
शेरिंग टोबगे ने भारत की आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि, भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के साथ-साथ सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर वाला देश भी है। यही वजह है कि, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार (गेटवे) के रूप में उभर सकती है।
भूटानी प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि, यह परियोजना एक विशाल आर्थिक क्षेत्र को आपस में जोड़ने की क्षमता रखती है। उन्होंने अपने संबोधन में भूटान की एक खासियत का जिक्र करते हुए कहा कि, उनका देश निवेशकों को एक ऐसी चीज देता है जो कोई और नहीं दे सकता, और वह है विश्वास। उन्होंने कहा कि, विश्वास एक ऐसी पूंजी है जिसे पैसों से नहीं खरीदा जा सकता, यह राजनीतिक स्थिरता, कानून के शासन और प्रतिबद्धताओं के सम्मान से अर्जित होता है। उनके अनुसार, जो भी निवेशक दीर्घकालिक निवेश की योजना बना रहे हैं, उन्हें सबसे पहले विश्वास बहाली में निवेश करना चाहिए, क्योंकि यही किसी भी स्थायी आर्थिक साझेदारी की बुनियाद होती है।
क्या है ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ परियोजना?
प्रधानमंत्री टोबगे ने जिस गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी का जिक्र किया, वह भूटान के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रूप से अहम परियोजना है। करीब 2500 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र एक स्वायत्त विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो असम के साथ लगती भूटान की दक्षिणी सीमा पर स्थित है। इस परियोजना का लक्ष्य इस क्षेत्र को एक टिकाऊ वेलनेस हब और ग्रीन-टेक्नोलॉजी केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यावरण अनुकूल विकास और आध्यात्मिक कल्याण की सोच को आधुनिक आर्थिक ढांचे के साथ जोड़ा जाएगा।
भूटान की परियोजना को भारत का सहयोग
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में भारत की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। खासतौर पर सीमा-पार रेलवे लिंक की स्थापना और बिजली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में भारत का सहयोग परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा भारतीय हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन को सुगम बनाने में भी भारत की भूमिका उल्लेखनीय है, जिससे गेलेफू क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
India is a trusted friend, Bhutan PM Tshering Tobgay during his UNGA Speech says
Points Bhutan’s Key project Gelephu Mindfulness City (GMC) has support of PM Modi, Assam Govt pic.twitter.com/edDSbgIZgQ
— Sidhant Sibal (@sidhant) September 23, 2026
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत ने भूटान की इस परियोजना को मजबूत सहयोग दिया है। हाल ही में भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए भूटान को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराई है, जो इस बात का संकेत है कि, भारत इस परियोजना को केवल कूटनीतिक समर्थन ही नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय सहायता के जरिए भी आगे बढ़ाना चाहता है।
भारत-भूटान संबंधों की मजबूत बुनियाद
गौरतलब है कि, भारत और भूटान के बीच दशकों पुराने घनिष्ठ राजनयिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। भूटान की गिनती लंबे समय से दक्षिण एशिया में भारत के सबसे भरोसेमंद और स्थिर साझेदारों में होती है। दोनों देशों के बीच जलविद्युत परियोजनाओं, व्यापार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। अब भूटान की गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसी परियोजना को भारत का समर्थन मिलना इस बात का स्पष्ट इशारा है कि दोनों देशों के रिश्ते कितने गहरे और मजबूत हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे वैश्विक मंच से भूटानी प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल भारत-भूटान संबंधों की मजबूती को दर्शा रहा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि, छोटे देश किस तरह अपने बड़े और भरोसेमंद पड़ोसियों के सहयोग से बड़ी विकास परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सतत विकास की मिसाल
जानकारों का मानना है कि, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसी परियोजनाएं आने वाले समय में क्षेत्रीय संपर्क, निवेश और सतत विकास के मामले में एक मिसाल बन सकती हैं, बशर्ते इन्हें समय पर और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से आया शेरिंग टोबगे का यह बयान भारत की वैश्विक छवि और क्षेत्रीय नेतृत्व क्षमता को बयां कर रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ विश्वास आधारित दीर्घकालिक साझेदारी बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
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