HPV से लेकर H. pylori तक, संक्रमण से बढ़ रहा कैंसर का खतरा, ये है रोकथाम के उपाय

  • 2024 में देश के कुल कैंसर मामलों का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा संक्रमण से जुड़ा 

कैंसर की रोकथाम को लेकर एक नई वैश्विक रिसर्च ने अहम पहलू की ओर ध्यान खींचा है। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में पता चला है कि, भारत में 2024 के दौरान करीब 1.9 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे। यह उस साल देश में सामने आए कुल कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत है। दुनियाभर में भी कैंसर के करीब 12 प्रतिशत मामले संक्रमण से जुड़े पाए गए।

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बढ़ता है खतरा

रिसर्च में बताया गया है कि, कुछ वायरस और बैक्टीरिया लंबे समय तक शरीर में संक्रमण बनाए रखते हैं और इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि, ऐसे संक्रमणों की समय पर रोकथाम, जांच और इलाज से कैंसर के कुछ मामलों को कम किया जा सकता है।

From HPV to H. pylori

अध्ययन में इस्तेमाल किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में कैंसर के करीब 15,62,581 नए मामले सामने आने का अनुमान था। इसी साल कैंसर से लगभग 9,08,828 मौतों का अनुमान भी लगाया गया है। इन मामलों में से करीब 1.9 लाख को संक्रमण से जोड़ा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि, हर संक्रमण सीधे कैंसर में बदल जाता है। अध्ययन में केवल उन संक्रमणों को शामिल किया गया है, जिनका कुछ खास प्रकार के कैंसर से वैज्ञानिक रूप से संबंध स्थापित हो चुका है।

भारत में HPV सबसे बड़ी वजह

रिसर्च के अनुसार, भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर मामलों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। HPV से जुड़े मामलों की संख्या एक लाख से अधिक बताई गई है। इसका सबसे प्रमुख संबंध सर्वाइकल यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से है।

राहत की बात यह है कि, HPV संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग से बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी IARC के मुताबिक, लगातार बना रहने वाला हाई-रिस्क HPV संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है।

H. pylori से जुड़े हजारों मामले

भारत में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) संक्रमण से जुड़े करीब 47 हजार कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से पेट में संक्रमण पैदा करता है और इसका संबंध पेट के कैंसर से है। दुनियाभर के आंकड़ों में भी H. pylori सबसे अहम संक्रमणों में शामिल रहा। अध्ययन के मुताबिक, 2024 में इससे करीब 7.6 लाख कैंसर मामले जुड़े थे, जो दुनिया के कुल कैंसर मामलों का लगभग 4 प्रतिशत है।

EBV और हेपेटाइटिस से भी जुड़े मामले

रिसर्च में एपस्टीन-बार वायरस (EBV) से भारत में करीब 22 हजार कैंसर मामले जुड़े पाए गए। हेपेटाइटिस-B वायरस से करीब 10 हजार और हेपेटाइटिस-C वायरस से करीब 5,300 मामलों का संबंध बताया गया है। हेपेटाइटिस-B और C जैसे संक्रमणों का संबंध लिवर कैंसर से है, जबकि EBV कई तरह के कैंसर से जुड़ा पाया गया है। IARC का कहना है कि, संक्रमण और कैंसर के बीच का संबंध अलग-अलग संक्रमण और कैंसर के प्रकार के आधार पर बदलता रहता है।

 23 लाख मामले संक्रमण से जुड़े

वैश्विक स्तर पर अध्ययन में 2024 में करीब 2.3 मिलियन यानी 23 लाख नए कैंसर मामलों को संक्रमण से जुड़ा पाया गया। यह उस साल दुनिया में सामने आए सभी नए कैंसर मामलों का करीब 12 प्रतिशत है।

शोधकर्ताओं ने कुल 12 रोगजनकों का आकलन किया। इनमें से पांच प्रमुख संक्रमणों ने संक्रमण से जुड़े लगभग सभी कैंसर मामलों में बड़ा योगदान दिया। इनमें H. pylori से 7.6 लाख, HPV से 7.5 लाख, हेपेटाइटिस-B वायरस से 3.6 लाख, EBV से 2.6 लाख और हेपेटाइटिस-C वायरस से करीब 1.6 लाख मामले जुड़े थे।

77 प्रतिशत सामने आए

अध्ययन की एक अहम बात यह है कि, संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ दुनिया के सभी हिस्सों में एक समान नहीं है। कम और मध्यम आय वाले देशों में ऐसे कैंसर के करीब 77 प्रतिशत मामले पाए गए। क्षेत्रवार देखें, तो पूर्वी एशिया में संक्रमण से जुड़े कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। यहां करीब 9.9 लाख मामले दर्ज किए गए, जो वैश्विक संक्रमण-संबंधित मामलों का लगभग 42 प्रतिशत है।

रोकथाम ही सबसे बड़ा हथियार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि कैंसर के कुछ मामलों को टीकाकरण, जांच और समय पर इलाज से रोका जा सकता है। ताजा अध्ययन इस बात को आंकड़ों के साथ मजबूती देता है। HPV और हेपेटाइटिस-B के खिलाफ वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग से बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल सकता है। पेट की लगातार शिकायत रहने पर जांच कराने से H. pylori जैसे संक्रमण की पहचान और इलाज संभव है।

From HPV to H. pylori

विशेषज्ञों का मानना है कि, जागरूकता की कमी, जांच की सीमित पहुंच और समय पर इलाज न मिल पाना बड़ी चुनौतियां हैं। कम और मध्यम आय वाले देशों में संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ ज्यादा होने की यह एक बड़ी वजह मानी जाती है।

अध्ययन से साफ संकेत मिलता है कि संक्रमण की रोकथाम पर ध्यान देकर कैंसर के बोझ को कुछ हद तक घटाया जा सकता है। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में, जहां हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं, टीकाकरण और स्क्रीनिंग को बढ़ावा देना बेहद अहम माना जा रहा है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना और समय पर जांच कराना कैंसर से बचाव की दिशा में सबसे जरूरी कदम है।

 

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