राहुल गांधी के मुस्लिम लीग वाले बयान पर मचा घमासान, भाजपा ने पाकिस्तान से जोड़ा, तो पवन खेड़ा बोले अनपढ़ हो भाई?

राहुल गांधी के मुस्लिम लीग वाले बयान पर सियासी घमासान मच गया है. बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका में राहुल गांधी के मुस्लिम लीग वाले बयान को बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने पाकिस्तान के मुस्लिम लीग जिन्ना से जोड़ दिया. जिस पर विवाद खड़ा गया है. अमित मालवीय ने ट्वीट कर रहा कि जिन्ना की मुस्लिम लीग, जो धार्मिक आधार पर भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार की पार्टी है.राहुल गांधी के अनुसार एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ पार्टी है. राहुल गांधी भले ही कम पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनका बयान कपटी और कुटिल जैसा लगता है.

अमित मालवीय के ट्वीट का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ‘अनपढ़ हो भाई? केरल की मुस्लिम लीग और जिन्ना की मुस्लिम लीग में फ़र्क़ नहीं मालूम? जिन्ना वाली मुस्लिम लीग वो जिस के साथ तुम्हारे पूर्वजों ने गठबंधन किया. दूसरी वाली मुस्लिम लीग वो, जिसके साथ भाजपा ने गठबंधन किया था.’

बता दें कि कांग्रेस नेताओं का कहना  है कि  राहुल गांधी ने अमेरिका के वाशिंगटन डी. सी. स्थित नेशनल प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League) का जिक्र किया था. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को केरल में सामान्य भाषा में मुस्लिम लीग के नाम से ही जाना जाता है. बीजेपी नेता अमित मालवीय जिस मुस्लिम लीग की बात कर रहे हैं वो पाकिस्तान के जनक जिन्ना की मुस्लिम लीग है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा इसी बात को लेकर बीजेपी पर हमलावर हैं.

राहुल गांधी ने क्या कहा था

दरअसल राहुल गांधी ने वॉशिंगटन डीसी के नेशनल प्रेस क्लब में एक सवाल के जवाब में कहा था कि मुस्लिम लीग पूरी तरह से सेक्युलर है. इनमें नॉन-सेक्युलर जैसा कुछ नहीं है.’ केरल में कांग्रेस पार्टी का इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ गठबंधन है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका में राहुल गांधी का एक और बयान, मुस्लिमों के बाद मुस्लिम लीग पर कही ये बात

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर होती जा रही है जो किसी से छिपी नहीं है और यह बात सभी जानते हैं. मुझे लगता है कि लोकतंत्र के लिए प्रेस की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है और आलोचना को सुनना चाहिए.यह सिर्फ प्रेस की आजादी नहीं है, यह हर तरफ हो रहा है. संस्थागत ढांचे पर भी शिकंजा कसा जा रहा है… आपको यह सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करना चाहिए. मुझे नहीं पता कि आप यह कैसे करेंगे लेकिन आपको पूछना चाहिए. भारत के पास बहुत मजबूत व्यवस्थाएं हैं जो पहले से मौजूद हैं, वह व्यवस्था कमजोर हो चुकी हैं.अगर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए तो ये मसले अपने आप सुलझ जाएंगे.आपके पास संस्था का एक स्वतंत्र समूह होना चाहिए जो दबाव और नियंत्रण में न हो

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