जंग किसी मसले का हल नहीं बल्कि खुद एक मसला हैः जमात-ए-इस्लामी हिन्द

भारतीय मुसलमानों के संगठन जमात-ए-इस्लामी हिन्द ने यूक्रेन-रूस यु़द्ध पर आज एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता, बल्कि यह खुद एक समस्या है। इसमें जान व माल के नुकसान के सिवाय कुछ हासिल नहीं होता है। इसलिए दोनों देशों के बीच यथाशीघ्र तनाव खत्म कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। इस जंग की वजह से यूक्रेन में फंसे हुए हिन्दुस्तानी छात्र और नागरिकों को सुरक्षित एवं संभावित मार्गों का इस्तेमाल करते हुए देश वापस लाने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।

जमात-ए-इस्लामी के पदाधिकारियों ने यूक्रेन में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के माता-पिता और परिजनों से संवेदना भी प्रकट की है। जमात मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर व जमात के राष्ट्रीय मामलों के सचिव मोहम्मद अहमद ने संबोधित किया।

जमात नेताओं ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नफरती बयान, साम्प्रदायिकता, आचार संहिता का उल्लंघन बड़े पैमाने पर हावी रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान ज़ाति-पांत के नाम पर वोटरों को बांटने की कोशिश की गई, जिसे निर्वाचन आयोग को सख्ती से रोकना चाहिए था। उनका कहना है कि अवाम की भूमिका अत्यंत सकारात्मक और प्रशंसनीय रही। इस बार विकास, रोजगार, शिक्षा और सेहत जैसी वास्तविक समस्याओं को महत्व दिया गया है। चुनाव के अवसर पर विज्ञापनों पर बहुत अधिक रकम खर्च की गई। इस पर रोक लगाने के लिए बहस होनी चाहिए और ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए, जो सत्ताधारी पार्टी को अपने हितों के लिए सरकारी तंत्र और कोष को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी पार्टी के विज्ञापन पर खर्च करने से रोक सके।

प्रोफेसर सलीम ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने, चुनाव परिणाम को प्रभावित होने से बचाने और धन और बल के अनुचित इस्तेमाल को रोकने के लिए चुनावों में सुधार की आवश्यकता है। उनका कहना है कि पारदर्शी चुनाव से नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा और इससे लोकतंत्र मज़बूत होगा। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि देश के मौजूदा विधानसभा चुनावों में कुछ पार्टियां यूक्रेन संकट का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। यह व्यवहार अनुचित और अमानवीय है।

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उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि यूक्रेन संकट के परिणामस्वरूप पेट्रोल, डीज़ल और आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि वह संभावित वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जमात के राष्ट्रीय मामलों के सचिव मोहम्मद अहमद ने उत्तर प्रदेश के चुनाव पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि अब लोगों में जागरूकता आई है। गांवों में रहने वाले लोग भी अब राजनीतिक पार्टियों की ओर से ध्रुवीकरण के हथकंडे को अब अस्वीकार करने लगे हैं।

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