स्पाइसजेट पर बड़ा संकट: बकाया वेतन न मिलने पर पायलटों ने उड़ान भरने से किया इनकार

नई दिल्ली। आर्थिक तंगी से जूझ रही विमानन कंपनी स्पाइसजेट के सामने अब संचालन का संकट खड़ा हो गया है। बकाया वेतन का भुगतान न होने से क्यू400 विमान उड़ाने वाले पायलटों ने उड़ान भरने से इनकार कर दिया है। इस कदम से एयरलाइन का परिचालन ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। पायलटों के संगठन एयरलाइन पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए इंडिया) ने भी उनके फैसले का समर्थन किया है।

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 40 पायलटों ने खड़ा किया हाथ

सूत्रों के मुताबिक, क्यू400 विमान उड़ाने वाले लगभग 40 पायलटों ने साफ कह दिया है कि, जब तक उनका बकाया वेतन नहीं मिलता, वे उड़ान नहीं भरेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कंपनी पहले से ही कामकाज और पैसों से जुड़ी कई दिक्कतों से घिरी है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर स्पाइसजेट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कंपनी की चुप्पी ने हालात को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

महीनों से बनी हुई है परेशानी

एएलपीए इंडिया के अनुसार, पायलट पिछले कई महीनों से कामकाज और आर्थिक परेशानियां झेल रहे हैं। संगठन का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के बकाया जरूरी लाभों का भुगतान भी लटका हुआ है।

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संगठन ने यह भी बताया कि विमानों से जुड़ी सेवाओं में भी दिक्कतें सामने आई हैं। इन्हीं हालात को देखते हुए पायलटों ने अपने सम्मान, विमान की सुरक्षा और अधिकारों को ध्यान में रखकर यह कड़ा फैसला लिया है।

 कितने विमान भर रहे उड़ान

विमानों की गतिविधि पर नजर रखने वाली वेबसाइट प्लेनस्पॉटर्स डॉट नेट के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल स्पाइसजेट के सिर्फ 10 विमान उड़ान भर रहे हैं, जबकि 37 विमान जमीन पर खड़े हैं। उड़ान भरने वाले इन 10 विमानों में क्यू400 भी शामिल है। ऐसे में पायलटों का यह रुख एयरलाइन की पहले से सीमित उड़ानों पर और असर डाल सकता है।

एएलपीए इंडिया ने जारी किया पत्र

एयरलाइन पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 9 अक्टूबर को एक पत्र जारी कर पायलटों के साथ खड़े होने की बात कही। संगठन ने भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को सुलझाने में पायलटों की हरसंभव मदद करेगा। पत्र से साफ है कि मामला अब केवल कंपनी और कर्मचारियों के बीच का नहीं रहा, बल्कि पेशेवर संगठन भी इसमें खुलकर उतर आया है।

पहले से ही संकट में रही है कंपनी

स्पाइसजेट की मुश्किलें नई नहीं हैं। जून में आई रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने मार्च से कई पायलटों के वेतन भुगतान में देरी की है और आपातकालीन कर्ज के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट योजना का सहारा लेने की बात कही थी। मार्च तक कंपनी के पास 375 पायलट थे। एक समय देश की दूसरी सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन रही स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी 2019 के करीब 15 प्रतिशत से घटकर अब 3.4 प्रतिशत रह गई है और वह चौथे स्थान पर खिसक चुकी है। पश्चिम एशिया के तनाव से ईंधन महंगा हुआ और हवाई क्षेत्र तक पहुंच सीमित हुई, जिससे कंपनी की पुरानी वित्तीय दिक्कतें और बढ़ीं। इस साल कंपनी का शेयर करीब 60 प्रतिशत टूट चुका है।

अन्य कर्मचारी भी प्रभावित

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, पायलटों के अलावा इंजीनियरिंग, ग्राउंड हैंडलिंग, सुरक्षा और केबिन क्रू समेत कई विभागों के कर्मचारियों को मार्च से वेतन नहीं मिला है। एएलपीए इंडिया के अध्यक्ष सैम थॉमस का कहना है कि वित्तीय संकट के बावजूद पायलट अक्सर उड़ान जारी रखते हैं, क्योंकि नौकरी छोड़ने से उनके उड़ान घंटों और लाइसेंस की शर्तों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने समय पर वेतन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी सुरक्षा के अभाव पर भी चिंता जताई।

सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल

पायलटों का कहना है कि उनका फैसला केवल वेतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने विमान की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। विमानन क्षेत्र में माना जाता है कि आर्थिक दबाव में काम करने वाले चालक दल की एकाग्रता और मनोबल पर असर पड़ सकता है, इसलिए यह मामला यात्रियों की सुरक्षा से भी जुड़ जाता है। जानकारों के अनुसार, ऐसे हालात में नियामक एजेंसियों की निगरानी और भी अहम हो जाती है।

स्पाइसजेट प्रबंधन पर टिकी निगाहें

अब सबकी निगाहें स्पाइसजेट प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह पायलटों का बकाया चुकाने के लिए क्या कदम उठाता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो क्यू400 विमानों की उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। एएलपीए इंडिया के समर्थन के बाद पायलट अपने रुख पर कायम दिख रहे हैं। कंपनी की ओर से जवाब आने तक संकट के और गहराने की आशंका बनी हुई है।

 

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