
रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों के ताजा मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी रियाद के हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने के बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। बताया जा रहा है कि, उन्हें बंकरों से लैस और कड़ी सुरक्षा वाले महलों में शिफ्ट कर दिया गया है। सैन्य रूप से ताकतवर माने जाने वाले देश के लिए यह स्थिति बेहद असहज है।
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हमलों ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल
रियाद एयरपोर्ट पर हुआ मिसाइल हमला सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसने देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं और शाही नेतृत्व की सुरक्षा को लेकर भी अंदरूनी हलकों में फिक्र बढ़ा दी है। नतीजतन MBS की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। यह चिंता इसलिए भी गहरी है कि सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े रक्षा खरीदारों में गिना जाता है। इसके बावजूद हूतियों की मिसाइलें राजधानी तक पहुंचने में कामयाब रहीं। यही बात सत्ता के भीतर बेचैनी की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है।
मिसाइलों को नहीं रोक पा रहा एयर डिफेंस
अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों के हमले बढ़ने के बाद मोहम्मद बिन सलमान बेहद सतर्कता के साथ बंकरों वाले और कड़ी निगरानी वाले महलों के बीच आवाजाही कर रहे हैं। उनके साथ खासतौर पर चुने गए विशेष गार्डों का दस्ता रहता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्राउन प्रिंस छिपने को मजबूर हैं, क्योंकि हूतियों की मिसाइलें रियाद तक पहुंचीं और एयर डिफेंस उन्हें रोकने में नाकाम रहा। इससे आशंका गहराई है कि न सिर्फ शाही महल, बल्कि देश का ऊर्जा ढांचा भी जोखिम में है। ध्यान रहे कि, यह सारी जानकारी रिपोर्ट और अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। सऊदी सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि का जिक्र उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
24 घंटे में दो हमले
रविवार को राजधानी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि 11 अन्य प्रभावित हुए। यह हमला उस घटना के ठीक 24 घंटे बाद हुआ, जिसे सऊदी अरब पर पिछले एक दशक का सबसे घातक हमला बताया जा रहा है। उस हमले में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक मिसाइल गिरी थी, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हुए।

लगातार हुए इन दो हमलों ने सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक साफ संदेश पहुंचाया है कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं। विश्लेषकों के मुताबिक किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाना केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। इससे देश की आर्थिक गतिविधियों और विदेशी निवेशकों के भरोसे पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
छह दिनों से महलों के बीच आवाजाही
अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि 41 वर्षीय MBS बीते छह दिनों से बंकरों वाले और कड़ी सुरक्षा वाले महलों के बीच ही आ-जा रहे हैं। उन्हें आखिरी बार मंगलवार को सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जब उन्होंने राष्ट्रीय दान अभियान के समर्थन में रक्तदान किया था। एहतियात के तौर पर रियाद में स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है, जिससे राजधानी के आम नागरिकों में भी चिंता का माहौल है।
सऊदी-हूती टकराव
हूती यमन का ईरान समर्थित विद्रोही गुट है, जिसने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। तब से यह संघर्ष यमन को गंभीर मानवीय संकट की ओर धकेलता रहा है। इस दौरान हूती सऊदी अरब के भीतर भी मिसाइलों और ड्रोन से हमले करते रहे हैं। वर्ष 2019 में सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हुए बड़े हमले ने ऊर्जा सुरक्षा की कमजोरियां उजागर कर दी थीं।
दुनिया के कई बड़े देशों ने की हमले की निंदा
सऊदी अरब पर हुए हमलों की दुनिया के कई बड़े देशों ने निंदा की है। यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इन्हें ‘खतरनाक रूप से बिगड़ती स्थिति’ करार दिया। उन्होंने हूती विद्रोहियों से आम नागरिकों वाले स्थानों पर हमले रोकने की अपील की। उनके अनुसार ऐसे हमले दुनिया भर में झटके पैदा कर रहे हैं और अहम वैश्विक परिवहन व ऊर्जा केंद्रों को अस्थिर कर रहे हैं।
इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी बनी चुनौती
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने सऊदी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों को रोकने के लिए जरूरी इंटरसेप्टर मिसाइलें सऊदी अरब के पास कम पड़ रही हैं। इससे सेना की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, रियाद के लिए पूरे देश को एयर डिफेंस के दायरे में रखना कठिन साबित हो रहा है, इसलिए वह मिसाइल डिफेंस बैटरियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे और शाही महलों की सुरक्षा की जा सके। जानकारों का कहना है कि सस्ते ड्रोन और मिसाइलों के मुकाबले महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल लंबे समय में किसी भी देश के लिए चुनौती बन सकता है।
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