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छह सीमांत जिलों के करीब 250 बाल वैज्ञानिक ले रहे हिस्सा
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जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर केंद्रित है इस बार की थीम
बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में पांचवें राज्य स्तरीय सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शानदार आगाज हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंडलसेरा वार्ड स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने बाल वैज्ञानिकों से सीधा संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) को एक करोड़ रुपये की धनराशि देने की घोषणा भी की।
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विद्यार्थियों से सीधा संवाद
कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री धामी बाल वैज्ञानिकों के बीच पहुंचे और छात्र-छात्राओं से खुलकर बातचीत की। विद्यार्थियों ने उनसे कई तरह के सवाल पूछे, जिनके मुख्यमंत्री ने जवाब दिए। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया। कई विद्यार्थियों ने उनके साथ सेल्फी भी ली। दूरदराज के पर्वतीय इलाकों से आए बच्चों के लिए यह मौका खास रहा, क्योंकि उन्हें प्रदेश के मुखिया से सीधे अपनी बात कहने का अवसर मिला।
यूकोस्ट को एक करोड़ रुपये देने का ऐलान
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद यानी यूकोस्ट को एक करोड़ रुपये की धनराशि दी जाएगी। यूकोस्ट ही इस दो दिवसीय आयोजन का आयोजक है।

परिषद राज्य में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यक्रम चलाती है। माना जा रहा है कि, यह राशि परिषद की गतिविधियों को मजबूती देगी और विद्यार्थियों तक विज्ञान से जुड़े अवसर पहुंचाने में मददगार साबित होगी।
नौ और दस अक्टूबर को हो रहा आयोजन
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से नौ और दस अक्टूबर को आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय महोत्सव में प्रदेश के छह सीमांत जिलों के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग शामिल हैं। इन जिलों से करीब 250 विद्यार्थी महोत्सव में पहुंचे हैं और अलग-अलग प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
‘जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन’ पर जोर
इस साल महोत्सव की मुख्य थीम ‘जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन’ रखी गई है। पर्वतीय राज्य होने के नाते उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम हमेशा बना रहता है, इसलिए बच्चों को इस विषय से जोड़ना अहम माना जा रहा है। आयोजकों का मकसद है कि विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन के असर को समझें, आपदा से निपटने के तरीकों के बारे में सोचें और अपने मॉडल व प्रस्तुतियों के जरिए समाधान सुझाएं।
एआई, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित इंटरनेट की जानकारी
महोत्सव में विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी जा रही है। डिजिटल दौर में बच्चे कम उम्र से ही इंटरनेट और मोबाइल से जुड़ रहे हैं, ऐसे में उन्हें साइबर खतरों के प्रति जागरूक करना जरूरी माना जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए विषयों की जानकारी से सीमांत इलाकों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीक से जुड़ने का मौका मिलेगा।
मॉडल से लेकर नाटक तक, कई प्रतियोगिताएं
दो दिन के इस आयोजन में वैज्ञानिक मॉडल प्रदर्शन, कविता पाठ, विज्ञान क्विज और विज्ञान नाटक जैसी कई प्रतियोगिताएं हो रही हैं। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक समझ का प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं बच्चे अपने बनाए मॉडल के जरिए समस्याओं का समाधान बता रहे हैं, तो कहीं नाटक और कविता के माध्यम से विज्ञान को आसान भाषा में समझा रहे हैं।
वैज्ञानिक सोच विकसित करना मकसद
इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच को विकसित करना और उन्हें भविष्य के नवाचार के लिए प्रेरित करना है। आयोजकों का कहना है कि सीमांत और दूरदराज के इलाकों के बच्चों को भी वही मंच मिलना चाहिए, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को आसानी से उपलब्ध होता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे आयोजन
सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव उत्तराखंड में हर साल अलग-अलग जिलों में आयोजित किया जाता है। मुख्यमंत्री धामी ने 19 नवंबर 2022 को चंपावत के जवाहर नवोदय विद्यालय में इस महोत्सव का पहला संस्करण शुरू किया था। तब मुख्यमंत्री ने बताया था कि यह दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित होने वाला पहला विज्ञान आधारित महोत्सव है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य हर दूरस्थ क्षेत्र तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाना और हर बच्चे में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।

वर्ष 2023 में यह महोत्सव चमोली में हुआ था, जिसमें छह सीमांत जिलों के 240 बाल वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था। उस आयोजन में पोस्टर प्रदर्शनी, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, कविता पाठ और विज्ञान ड्रामा जैसी प्रतियोगिताएं जूनियर और सीनियर वर्ग के लिए अलग-अलग कराई गई थीं। इस तरह बागेश्वर में हो रहा आयोजन उसी सिलसिले की पांचवीं कड़ी है।
जिला स्तर से राज्य स्तर तक का सफर
इस तरह के राज्य स्तरीय महोत्सव में पहुंचने से पहले बाल वैज्ञानिकों को जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से गुजरना पड़ता है। पिछले साल बागेश्वर में हुए जिला स्तरीय महोत्सव में तीनों विकासखंडों से 40-40 यानी कुल 120 बाल वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था और उनमें से 40 का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया जाना था। यानी राज्य स्तर पर पहुंचे विद्यार्थी अपने-अपने जिलों में प्रतिस्पर्धा से निकलकर आए हैं।
बच्चों के लिए खास मौका
सीमांत जिलों के कई गांव और कस्बे मुख्य शहरों से दूर हैं। ऐसे इलाकों के बच्चों के लिए राज्य स्तर का मंच और मुख्यमंत्री के साथ संवाद का अवसर आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिहाज से ऐसे आयोजन बच्चों के लिए सीखने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का भी मौका बनते हैं।
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