ब्रह्म स्थान में दोष हो तो थम सकती है तरक्की, घर के बीच में न करें ये गलतियां

अक्सर लोग घर की साज-सज्जा और कमरों की दिशा पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन घर के ठीक बीचों-बीच वाले हिस्से को इग्नोर कर देते हैं। वास्तु शास्त्र में मकान के इस बीच वाले हिस्से को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। इसे घर का दिल और नाभि माना जाता है। मान्यता है कि, जैसे शरीर के सुचारू रूप से काम करने के लिए नाभि का स्वस्थ रहना आवश्यक है, वैसे ही घर में बरकत और सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस हिस्से यानी ब्कारह्म स्थान को हल्का और साफ रहना जरूरी है।

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वास्तुशास्त्र के जानकारों का कहना है कि, अगर ब्रह्म स्थान में दोष हो, तो अच्छी-खासी चल रही तरक्की में बाधा आने लगती है। बिना वजह खर्चे बढ़ सकते हैं,  घर में किसी न किसी की तबीयत खराब रहने लगती है। ऐसे ही तमाम तरह की समस्याएं आने लगती हैं जिससे पैसा अधिक खर्च होने लगता है।  ऐसे में जानकार कुछ आम गलतियों से बचने की सलाह देते हैं।

क्या है ब्रह्म स्थान

वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि, किसी भी भवन का केंद्र बिंदु यानी बीच का स्थान ब्रह्म स्थान कहलाता है। यह हिस्सा आकाश तत्व से जुड़ा होता है, इसलिए इसका खुला और हवादार रहना अनिवार्य है।

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पुराने समय में भारतीय घरों के बीच में खुला आंगन होता था, जहां से रोशनी और ताजी हवा पूरे घर में पहुंचती थी। आज के फ्लैट और सीमित जगह वाले मकानों में यह हिस्सा अक्सर सामान रखने या दूसरे कामों में इस्तेमाल होने लगा है। जानकार कहते हैं कि, बस यही से शुरू होती है असली समस्या।

ब्रह्म स्थान में इन 5 गलतियों से बचें

भारी-भरकम सामान रखना

कई लोग घर के बीच में बड़ा सोफा सेट, भारी डाइनिंग टेबल या लकड़ी की अलमारी रख देते हैं। वास्तु जानकारों का मानना है कि, इस जगह पर वजन रखने से पूरे घर की पॉजिटिव एनर्जी दब जाती है। उनके अनुसार इसका असर घर के कमाने वाले सदस्यों के करियर पर पड़ता है और काम में अड़चनें आने लगती हैं, इसलिए इस हिस्से को जितना हो सके खाली रखने की सलाह दी जाती है।

सीढ़ियां या टॉयलेट बनवाना

आधुनिक फ्लैटों और घरों में कई बार जगह बचाने के चक्कर में बीच में सीढ़ी या बाथरूम बना दिया जाता है। वास्तु के हिसाब से इसे सबसे बड़ा दोष माना गया है। जानकारों का कहना है कि, इससे घर के लोगों में मानसिक तनाव बढ़ सकता है। परिवार के सदस्यों में गंभीर बीमारियां भी पनप सकती हैं।

गैस चूल्हा या बिजली का सामान

ब्रह्म स्थान खुला और आकाश तत्व से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि, यहां रसोई बनाने, गैस चूल्हा रखने या इनवर्टर-जनरेटर जैसी चीजें रखने से घर में कलह का माहौल बन जाता है। वास्तु विशेषज्ञ कहते हैं कि, इसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है और पैसा पानी की तरह खर्च होने लगता है। अग्नि और बिजली से जुड़ी चीजों को भूलकर भी इस स्थान पर नहीं रखना चाहिए।

कबाड़ या जूते-चप्पल रखना

घर के बीच में पुराना कबाड़, टूटी चीजें, झाड़ू या जूते-चप्पल उतारने की आदत अगर है तो इसे तुरंत बदल देना चाहिए। जानकार कहते हैं कि, यह जगह जितनी गंदी रहेगी, घर में उतनी ही नकारात्मकता फैलेगी। साफ-सफाई की दृष्टि से भी यह आदत ठीक नहीं मानी जाती, क्योंकि घर का केंद्र सबसे ज्यादा आवाजाही वाली जगह होता है।

बीच में भारी पिलर या खंभा आना

घर बनवाते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि, घर के ठीक बीच में कोई बड़ा खंभा या बीम न आए। वास्तु में इसे ब्रह्म स्थान का भारी होना कहा जाता है। ऐसा होने से परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है, इसलिए निर्माण की योजना बनाते समय आर्किटेक्ट के साथ इस बिंदु पहले से ही चर्चा कर लेनी चाहिए।

घर के केंद्र को ठीक रखने के सरल नियम

जगह को खुला और रोशन रखें

ब्रह्म स्थान को जितना हो सके खाली छोड़ देना चाहिए। यहां ताजी हवा और अच्छी रोशनी आनी चाहिए, ताकि पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। अगर संभव हो तो इस हिस्से के आसपास खिड़की या रोशनदान से प्राकृतिक रोशनी आने का इंतजाम करें।

साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

फर्श को हमेशा साफ सुथरा रखें। अगर जगह को सजाना ही हो, तो एक हल्का पायदान या मैट बिछा देना चाहिए। भारी और चटख सजावट से बचना चाहिए।

आंगन हो तो तुलसी लगाएं

अगर आपका पुराना मकान है और बीच में खुला आंगन है, तो वहां तुलसी का पौधा लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। तुलसी को हिंदू परंपरा में पवित्र माना जाता है और इसकी नियमित देखभाल से घर का वातावरण भी शांत बना रहता है।

दोष बन चुका हो तो क्या करें

फ्लैट सिस्टम में अगर तोड़फोड़ मुमकिन न हो, तो जानकार इस जगह पर एक छोटा पीतल का पिरामिड, क्रिस्टल बॉल या वास्तु दोष निवारण यंत्र रखने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार इससे दोष के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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