न्यूयॉर्क/वाशिंगटन । वॉशिंगटन डीसी में मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के नए विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक ने दोनों लोकतांत्रिक देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते का औपचारिक स्वागत करना रहा। जयशंकर की यह यात्रा और रुबियो के साथ उनकी चर्चा यह स्पष्ट करती है कि ट्रंप प्रशासन के साथ भारत के संबंध न केवल स्थिर हैं, बल्कि व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में और अधिक प्रगाढ़ होने जा रहे हैं।

Delighted to meet US @SecRubio this afternoon.
A wide ranging conversation that covered our bilateral cooperation agenda, regional and global issues.
Facets of India – US Strategic Partnership discussed included trade, energy, nuclear, defence, critical minerals and… pic.twitter.com/1rbXJHgEQY
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 3, 2026
व्यापार और शुल्क कटौती से आर्थिक संबंधों को मिलेगी नई गति
इस बैठक की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह घोषणा थी, जिसमें उन्होंने भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते पर सहमति बनने की बात कही थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्री जयशंकर और मार्को रुबियो ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और नए आर्थिक अवसर खुलेंगे। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस वार्ता को ‘व्यापक और सकारात्मक’ बताते हुए साझा किया कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी अब ऊर्जा, परमाणु, रक्षा और उच्च तकनीक जैसे निर्णायक क्षेत्रों में विस्तार कर रही है।
क्रिटिकल मिनरल्स: भविष्य की तकनीक और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण समझौता
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘महत्वपूर्ण खनिजों’ की खोज, खनन और प्रसंस्करण में द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक रूप देना रहा। बुधवार को अमेरिका द्वारा आयोजित किए जा रहे पहले ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ सम्मेलन से ठीक पहले हुई इस चर्चा का वैश्विक महत्व है। लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिज आज के युग में इलेक्ट्रिक वाहनों, अर्धचालक और रक्षा उपकरणों के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। भारत और अमेरिका ने इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक औपचारिक तंत्र विकसित करने पर चर्चा की है, ताकि चीन जैसे देशों पर निर्भरता को कम किया जा सके और साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
क्वाड और हिंद-प्रशांत: क्षेत्रीय स्थिरता पर साझा दृष्टिकोण
विदेश मंत्री जयशंकर और मार्को रुबियो ने अपनी बातचीत का समापन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रतिबद्धता के साथ किया। दोनों नेताओं ने ‘क्वाड’ समूह जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर जोर दिया। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने माना कि एक समृद्ध और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र न केवल उनके साझा हितों के लिए जरूरी है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है। इस बैठक ने यह संदेश दिया है कि ट्रंप प्रशासन के तहत भी अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की केंद्रीय भूमिका को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा।
Pleased to meet US Treasury Secretary Scott Bessent in Washington DC today. @SecScottBessent
Had a useful discussion on advancement of India – US economic partnership and strategic cooperation.
🇮🇳 🇺🇸 pic.twitter.com/tfNMpTT8wH
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 3, 2026
ऐतिहासिक सम्मेलन और भविष्य की रूपरेखा
एस. जयशंकर की यह 2 से 4 फरवरी की यात्रा वाशिंगटन में होने वाले पहले ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ के लिए बेहद अहम है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शिरकत करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य तकनीकी नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिजों को सुरक्षित करने के लिए एक वैश्विक सहयोग तंत्र तैयार करना है। भारत की इसमें भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के प्रबंधन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रही है। जयशंकर इस दौरान अमेरिकी प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे आगामी वर्षों के लिए भारत-अमेरिका संबंधों का रोडमैप तैयार होगा।


