
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को अब एक नया भव्य और सांस्कृतिक स्वरूप मिलने वाला है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में शहर के सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार (सांस्कृतिक गेटवे) बनाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले पर उन्होंने मुहर लगा दी है, जिससे लखनऊ में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।

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मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि, राजधानी में प्रवेश करते ही यूपी की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिकता और ऐतिहासिक गौरव की झलक दिखनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि, लखनऊ से जुड़े प्रमुख मार्गों पर ऐसे द्वार बनाए जाएं, जो संबंधित धार्मिक और सांस्कृतिक गंतव्यों की पहचान को दर्शाएं। ये द्वार न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएंगे, बल्कि पर्यटकों और यात्रियों को तुरंत यूपी की सनातन संस्कृति से जोड़ेंगे।
सात प्रमुख द्वार और उनके नाम
बैठक में इन सात द्वारों के नाम और थीम तय कर दिए गए हैं, जो लखनऊ से निकलने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनेंगे
संगम द्वार – रायबरेली-प्रयागराज रोड पर। यह द्वार त्रिवेणी संगम और महाकुंभ की परंपरा को दर्शाएगा।
नंदी द्वार – सुल्तानपुर-वाराणसी रोड पर। श्री काशी विश्वनाथ धाम और बनारस की आध्यात्मिकता का प्रतीक।
सूर्य द्वार – बाराबंकी-अयोध्या रोड पर। श्री राम जन्मभूमि और अयोध्या की दिव्यता को दिखाएगा।
व्यास द्वार – नैमिषारण्य मार्ग पर। नैमिषारण्य के ऋषि व्यास और पुराणों की विरासत का प्रतीक।
धर्म द्वार – हस्तिनापुर मार्ग पर। महाभारत और हस्तिनापुर की धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व को उजागर करेगा।
कृष्ण द्वार – आगरा-मथुरा रोड पर। श्री कृष्ण और वृंदावन-मथुरा की भक्ति परंपरा का प्रतिनिधित्व।
शौर्य द्वार – उन्नाव-झांसी रोड पर। रानी लक्ष्मीबाई और झांसी की वीरता-शौर्य की कहानी को जीवंत करेगा।
ये नाम और थीम उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को एक साथ जोड़ते हैं, जो अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि, प्रत्येक द्वार पर संबंधित गंतव्य की पहचान स्पष्ट रूप से उकेरी जाए, ताकि यात्री प्रवेश करते ही उसकी महत्ता समझ सकें।
डिजाइन और निर्माण की विशेषताएं
द्वारों का डिजाइन भव्य और आकर्षक होगा। इनमें नक्काशीदार पत्थर का काम, अलंकृत स्तंभ, भित्तिचित्र, फव्वारे, कलात्मक लाइटिंग और हरे-भरे लैंडस्केप शामिल होंगे। ये द्वार शहर की पुरानी विरासत जैसे रूमी दरवाजा, अकबरी दरवाजा और आलमबाग गेट से प्रेरित होंगे, लेकिन आधुनिक तकनीक से बने होंगे। निर्माण कार्य में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड्स का भी उपयोग किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी कार्य एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और अन्य संबंधित एजेंसियों से समन्वय में समयबद्ध तरीके से पूरे हों। आवश्यक अनुमतियां ली जाएंगी और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
विकास की दिशा में बड़ा कदम
यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन विकास की नीति का हिस्सा है। योगी सरकार पहले से ही अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मथुरा-वृंदावन के विकास जैसे कार्यों से राज्य को आध्यात्मिक केंद्र बना रही है। अब लखनऊ को भी ‘सांस्कृतिक गेटवे’ के रूप में पेश किया जाएगा, जो पर्यटकों को आकर्षित करेगा और शहर की पहचान मजबूत करेगा।अधिकारियों के अनुसार, ये द्वार न केवल सौंदर्य बढ़ाएंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट देंगे। पर्यटन बढ़ने से होटल, ट्रांसपोर्ट और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इधर, अयोध्या से जुड़ने वाले प्रमुख छह मार्गों पर रामायण से प्रेरित भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण भी किया जाएगा, जिसमें राम द्वार, लक्ष्मण द्वार, शत्रुघ्न द्वार, भरत द्वार, सीता द्वार और हनुमान द्वार शामिल हैं। अयोध्या- सुल्तानपुर मार्ग पर स्थित भरत द्वार इसी श्रृंखला का अहम हिस्सा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक होगा, बल्कि इसे रामायण काल की थीम पर आधारित मूर्तियों, नक्काशी, प्रकाश व्यवस्था के साथ ही अन्य सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। ये द्वार यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को त्रेता युग की याद दिलाएंगा।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सरकारी इमारतों के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट में एकरूपता की कमी पर असंतुष्टि जाहिर की। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क निर्माण की तरह, सभी नए बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्ट में 5 साल का परफॉर्मेंस-बेस्ड मेंटेनेंस क्लॉज अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। पुरानी इमारतों के रखरखाव के लिए एक कॉर्पस फंड भी बनाया जाए। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, इमारतों, सड़कों, पुलों, सीवर लाइनों और पानी की सप्लाई पाइपलाइनों जैसी परियोजनाओं का थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट IIT, NIT और राज्य/सरकारी तकनीकी संस्थानों द्वारा किया जाना चाहिए।
राज्य ने वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत व्यय और राजस्व बढ़ाने में देश में एक नया मानक स्थापित किया है। अब लक्ष्य खर्च की गुणवत्ता और डिजिटल पारदर्शिता को और मजबूत करना है, जिससे उत्तर प्रदेश सबसे कुशल और भरोसेमंद वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बन सके।
स्किल ट्रेनिंग सेंटरों में अखबार पढ़ना अनिवार्य किया गया
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने राज्य के सभी शॉर्ट-टर्म स्किल ट्रेनिंग सेंटरों में रोजाना अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि 75 जिलों में चल रहे 800 से ज़्यादा स्किल ट्रेनिंग सेंटरों में फिलहाल एक लाख से ज़्यादा ट्रेनी नामांकित हैं। इससे पहले, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया था।
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