उत्तराखंड: ड्रोन पॉलिसी बनी लेकिन उड़ने का मार्ग ही नहीं, दून-पिथौरागढ़ में इस कारण से कॉरिडोर बनने में हो रही मुश्किलें

उत्तराखण्ड प्रदेश में ड्रोन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक जिले से दूसरे में सामान भेजने तथा आपदा में सहायता के मकसद से धामी सरकार ने ड्रोन नीति पर मंजूरी दे दी है लेकिन ड्रोन उड़ाने के मार्ग ही नहीं बन पा रहे। ड्रोन कॉरिडोर पर नागर विमानन महानिदेशालय (DCGA) को निर्णय लेना है लेकिन दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी बात नहीं बन रही है।

ड्रोन नीति पर कुछ महीनों पहले कैबिनेट ने मुहर लगा दी थी। इसकी अधिसूचना भी जल्द ही जारी होने वाली है। इस नीति से करीब 1 साल पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) ड्रोन काॅरिडोर बनाने की कवायद में लगा हुआ है। इसके लिए DCGA को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिला। फिर प्रस्ताव भेजा गया लेकिन जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

अब शासन स्तर से रिमाइंडर भेजा जाएगा। दरअसल, ड्रोन काॅरिडोर का चिह्निकरण DCGA की अनुमति बिना संभव नहीं है। पिथौरागढ़ पूरा रेड जोन है, जहां ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता। राजधानी देहरादून में भी लगभग 70% भाग रेड जोन में आता है। चमोली, उत्तरकाशी में भी काफी क्षेत्र ऐसा है।चूंकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये संवेदनशील हैं, इसलिए वहां गृह या रक्षा मंत्रालय की अनुमति के बिना ड्रोन कॉरिडोर बनाना संभव नहीं हो सकता। लिहाजा, अब प्रदेश में ड्रोन उड़ाने की योजना तभी सफल हो सकेगी, जबकि केंद्र सरकार इसमें सहयोग देगी। ITDA की निदेशक नितिका खंडेलवाल का कहना है कि पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था, अब रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि कॉरिडोर की राह आसान होगी।

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