धोनी ने रोहित-विराट की उम्र पर सवाल उठाने वालों को दिया करारा जवाब…संन्यास का फैसला कोई और नहीं, वे खुद करेंगे’

धोनी ने अनुभव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रिकेट जैसे दबाव वाले खेल में अनुभव रातों-रात हासिल नहीं किया जा सकता।

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। खेल प्रसारक जतिन सप्रू के साथ एक विशेष साक्षात्कार में धोनी ने सीनियर बल्लेबाज विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। धोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए उम्र केवल एक संख्या होनी चाहिए, न कि उसके करियर का फैसला करने वाला मापदंड। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक रोहित और कोहली फिट हैं और मैदान पर रन बना रहे हैं, तब तक किसी को भी उन्हें यह बताने का अधिकार नहीं है कि उन्हें कब खेलना बंद करना चाहिए। धोनी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह फैसला पूरी तरह से खिलाड़ियों का होना चाहिए कि वे 2027 के वनडे विश्व कप का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।

धोनी ने अनुभव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रिकेट जैसे दबाव वाले खेल में अनुभव रातों-रात हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए समझाया कि 20 साल के युवा में वह परिपक्वता तब तक नहीं आ सकती, जब तक उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक दबाव का सामना न किया हो। धोनी के अनुसार, “अनुभव तभी आता है जब आप 80-85 मैच खेल चुके हों और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करना सीख चुके हों।” उन्होंने चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया कि टीम में युवाओं और अनुभवी खिलाड़ियों का सही संतुलन होना अनिवार्य है। धोनी ने यह भी मांग की कि चयन का पैमाना सबके लिए एक समान होना चाहिए जो फिट है और प्रदर्शन कर रहा है, वह टीम में रहेगा, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो।

 

साक्षात्कार के दौरान चर्चा का रुख 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में शुरू होने वाले टी20 विश्व कप की ओर भी मुड़ा। धोनी, जिन्होंने 2007 में भारत को पहला टी20 विश्व कप जिताया था, मौजूदा टीम को लेकर काफी उत्साहित दिखे। उन्होंने सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम को ‘विश्व की सबसे खतरनाक टीमों में से एक’ करार दिया। धोनी का मानना है कि इस टीम के पास वह सब कुछ है जो एक चैंपियन टीम में होना चाहिए—अनुभव, निडर बल्लेबाजी और संतुलित गेंदबाजी। हालांकि, उन्होंने एक खास चेतावनी भी दी। धोनी ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों में ‘ओस’ (Dew) एक ऐसा कारक है जिससे उन्हें हमेशा डर लगता था। ओस की वजह से टॉस की भूमिका अत्यधिक बढ़ जाती है, जो कभी-कभी मैच के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

धोनी ने भारतीय प्रशंसकों को आश्वस्त किया कि यदि परिस्थितियां तटस्थ रहती हैं, तो भारत दुनिया की किसी भी सर्वश्रेष्ठ टीम को हराने का माद्दा रखता है। उन्होंने कप्तान सूर्यकुमार यादव के ‘शांत और स्थिर’ नेतृत्व की भी सराहना की, जो खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आजादी देते हैं। धोनी ने अंत में उम्मीद जताई कि टीम के मुख्य खिलाड़ी चोटिल न हों और टूर्नामेंट के दौरान अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाएं। 2026 के इस बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले धोनी का यह समर्थन और विश्लेषण न केवल टीम इंडिया का मनोबल बढ़ाने वाला है, बल्कि उन आलोचकों को भी चुप कराने वाला है जो लगातार सीनियर खिलाड़ियों की उम्र पर सवाल उठा रहे थे।

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