
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। ये दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित। प्रदोष महीने में दो बार पड़ता है। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। इस दिन व्रत करने और प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय, आमतौर पर शाम 5-8 बजे के बीच) में पूजा करने से विशेष फल मिलता है। यह व्रत कलियुग में अति मंगलकारी माना जाता है।

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परेशानियों ने मिलती है निजात
इस बार प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है,जो बेहद शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को भी समर्पित माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस खास दिन कुछ उपाय करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है और भगवान शिव और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।
शुक्रवार का दिन धन की देवी लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल मिलते हैं। इस बार शुक्रवार को प्रदोष व्रत का संयोग इस दिन को और भी खास बना रहा है। इसलिए, अगर आप शुक्रवार को कुछ खास उपाय करते हैं, तो आपको देवी लक्ष्मी और भगवान शिव दोनों का आशीर्वाद मिल सकता है। इससे आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य भी आ सकता है। तो आइए, शुक्रवार के उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं…
देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का उपाय
शुक्रवार को स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इस दिन गुलाबी या हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद, विधि-विधान से भगवान शिव और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। सुबह देवी लक्ष्मी को गुलाब के फूल चढ़ाएं और तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं। फिर, शाम को देवी लक्ष्मी की आरती में कपूर ज़रूर शामिल करें और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं। पूरी श्रद्धा से यह सरल उपाय करने से भक्त को देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद मिल सकता है और घर का माहौल सकारात्मक रहता है।
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भगवान शिव का आशीर्वाद पाने का उपाय
इस बार शुक्रवार को प्रदोष व्रत पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव बहुत दयालु होते हैं, इसलिए, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का गंगाजल, शहद, दही आदि से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही, उन्हें बेलपत्र ज़रूर चढ़ाएं। माना जाता है कि, ऐसा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। अभिषेक के बाद, भगवान शिव की पूजा और आरती भी विधि-विधान से करनी चाहिए।
परेशानियों को दूर करने का उपाय
अगर आपके जीवन में एक के बाद एक परेशानियां आ रही हैं या आर्थिक दिक्कतें हैं, तो आप शुक्रवार को यह उपाय कर सकते हैं। इसके लिए, देवी लक्ष्मी की पूजा करते समय उन्हें ताज़े गुलाब के फूलों के साथ कुछ पीली कौड़ियां चढ़ाएं। इसके बाद, ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। यह अनुष्ठान करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और आर्थिक समस्याओं से राहत मिल सकती है। पूजा के बाद, कौड़ियों को लें, उन्हें लाल कपड़े में बांधें और उस जगह रखें जहां आप अपना पैसा रखते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि, आपका खजाना कभी खाली नहीं रहेगा और जीवन मे आने वाली हर समस्या से निजात मिलेंगी।
वैवाहिक जीवन में सुख के लिए उपाय
प्रदोष व्रत के दिन, भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए। साथ ही, देवी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। यह अनुष्ठान करने से वैवाहिक जीवन की समस्याओं से राहत मिल सकती है और पति-पत्नी के बीच रिश्ता मजबूत होता है। प्रदोष व्रत के दिन, शाम को प्रदोष काल में महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करना चाहिए। इससे जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है और प्रगति के नए रास्ते खुल सकते हैं।
अलग-अलग वार के प्रदोष का अलग फल मिलते हैं, जैसे शुक्रवार प्रदोष से धन-समृद्धि, शनिवार प्रदोष से शनि दोष निवारण, आदि।
मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर नृत्य करते हैं, इसलिए इस दिन की पूजा विशेष फलदायी होती है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें, व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल साफ करें, शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।
प्रदोष काल में (सूर्यास्त के आसपास) पूजा शुरू करें।सामग्री: बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप, फल, मिठाई, बिल्वपत्र (21 या 108)।
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाएं।
मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” का जप करें।
शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव आरती गाएं।
कम से कम 1, 11, 21 या अधिक दीपक जलाएं।
व्रत में फलाहार या निर्जला रहें (संभव हो तो)।
अगले दिन पारण करें (सुबह स्नान के बाद)।
नियम
झूठ न बोलें, क्रोध न करें, तुलसी पत्र न चढ़ाएं ,मांस-मदिरा से दूर रहें।



