कोटा में आठ महीने में 22 छात्रों ने की आत्महत्या, आखिर बच्चे क्यों अपना रहे यह रास्ता ?

कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं की चिंता बढ़ती जा रही है। इस हालत के पीछे कई कारण हैं, जिनमें माता-पिता का दबाव, प्रतिस्पर्धा की भावना, और सड़क परिवहन के कारण बच्चों की समस्याएं शामिल हैं। इस स्थिति में, बच्चों को सहायता और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

इस कारण बच्चे कर रहे आत्महत्या
कोटा में छात्रों के आत्महत्या मामलों की आवृत्ति चिंताजनक है, जहाँ बच्चों की प्रेशर से भरी जिंदगी ने उन्हें अपने आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जिससे उनकी ज़िन्दगी खतरे में पड़ गई है। इसके साथ ही अभिभावकों की उम्मीदें और अपेक्षाएं उन पर दबाव डाल रही हैं, जिससे वे दिन पर दिन अधिक तनावग्रस्त महसूस करने लगे हैं। आपको बता दे, यह तबादला देखने के बावजूद कि बच्चे अपने स्कूल में शिक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करते हैं, अधिकांश छात्रों के पास उचित मार्गदर्शन की कमी होती है। जिसके कारण छात्र कुछ दबाव सहन कर रहे है, उनके लिए यह एक बोझ बनता जा रहा है।

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इन उपायों से दिखा सकते हैं सही मार्ग
विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों के आत्महत्या के पीछे के कारणों में एक ‘डबल मेथड’ भी हो सकता है, जिसमें उन्हें कोई सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाता है। ऐसे मामलों में, वे निराश होकर ऐसे कदम उठा लेते हैं जिनमें कोई सकारात्मक विचार नहीं आता। बता दे, कोटा और अन्य बड़े शहरों में छात्रों के आत्महत्या के मामले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं, और इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें मोटिवेशनल सेमिनार और मानसिक परीक्षण शामिल हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को सही मार्ग पर लाना है।

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