
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक और कड़ा कदम उठाया है। उनके इस कदम से अब बाजार में बिकने वाले अंडों की शुद्धता और ताजगी को लेकर ग्राहकों को संशय में नहीं रहेगा। दरअसल, प्रदेश सरकार ने आगामी 1 अप्रैल से एक नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब हर एक अंडे पर उसकी एक्सपायरी डेट अंकित करना अनिवार्य होगा।
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खराब अंडों की बिक्री पर लगेगी लगाम
पशुपालन विभाग द्वारा जारी इस आदेश का सीधा असर प्रदेश के लाखों अंडा उत्पादकों, व्यापारियों और करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बाजार में पुराने या खराब अंडों की बिक्री पर पूरी तरह से लगाम लगाना है।

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के पशुपालन विभाग ने अंडों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई नियमावली तैयार की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इस नियम के तहत अंडा उत्पादकों को न केवल एक्सपायरी डेट, बल्कि वह तारीख भी लिखनी होगी जिस दिन अंडा मुर्गी ने दिया था। इससे उपभोक्ता को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि अंडा कितना पुराना है।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने इस नए नियम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, जो व्यापारी, किसान या दुकानदार इस नियम का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नियमों का पालन न करने पर दो तरह की कार्रवाई हो सकती है।
पहली- बिना तारीख वाले अंडों के स्टॉक को मौके पर नष्ट कर दिया जाएगा।
दूसरा- उन अंडों पर मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त का लेबल लगा दिया जाएगा, जिससे उन्हें बाजार में खाने के लिए नहीं बेचा जा सकेगा।
अंडों की उम्र और स्टोरेज का समय
विशेषज्ञों और शोध के अनुसार, अंडों की गुणवत्ता पूरी तरह से उनके रखरखाव और तापमान पर निर्भर करती है।
सामान्य तापमान (30°C): अगर अंडों को सामान्य कमरे के तापमान पर रखा जाता है, तो वे अधिकतम दो सप्ताह तक ही खाने योग्य रहते हैं।
कोल्ड स्टोरेज (2°C से 8°C): यदि अंडों को रेफ्रिजरेशन या कोल्ड स्टोरेज में रखा जाए, तो उनकी शेल्फ लाइफ बढ़कर 5 सप्ताह तक हो सकती है।
चूंकि उत्तर प्रदेश में ज्यादातर छोटे दुकानदार अंडों को खुले में या सामान्य तापमान पर रखते हैं, इसलिए अंडों के जल्दी खराब होने का खतरा बना रहता है। अब अंडों पर मुहर लगने से ग्राहक खुद अपनी आंखों से देख सकेंगे कि वे जो खरीद रहे हैं, वह ताजा है या नहीं।
व्यापारियों के सामने बड़ी चुनौती
सरकार के इस फैसले ने जहां उपभोक्ताओं को खुश किया है, वहीं अंडा व्यापारियों के सामने बड़ी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के नियमों के अनुसार, अंडों को सब्जियों के साथ कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता क्योंकि दोनों के लिए अलग-अलग आर्द्रता और तापमान की आवश्यकता होती है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अंडों के लिए विशेष कोल्ड स्टोरेज की भारी कमी है। पूरे प्रदेश में केवल आगरा और झांसी में ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं जहां अंडों को वैज्ञानिक तरीके से स्टोर किया जा सकता है। बुनियादी ढांचे की इस कमी के कारण व्यापारियों को डर है कि अंडों पर मुहर लगाने और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने में उन्हें तकनीकी और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
नये नियम से आएगी पारदर्शिता आएगी
मुकेश मेश्राम ने कहा कि पहले खाद्य सुरक्षा से जुड़े इन नियमों का पालन ठीक से नहीं हो पा रहा था और उपभोक्ता भी इस बात से अनजान थे कि, वे कितने दिन पुराना अंडा खा रहे हैं। कई बार खराब अंडों के सेवन से फूड पॉइजनिंग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आती थीं। अब नई व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी और अंडा उत्पादन क्षेत्र में एक नई जवाबदेही तय होगी।
पशुपालन विभाग ने सभी हितधारकों को 1 अप्रैल से पहले अपनी तैयारी पूरी करने की सलाह दी है। व्यापारियों को अंडों पर लेबलिंग या मुहर लगाने की मशीनरी और व्यवस्था जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश को ‘ईटिंग राइट’ (सही खान-पान) की दिशा में अग्रणी बनाने का संकल्प है।
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