70 साल से विस्थापित हिंदुओं का वनवास खत्म, मात्र 1 रुपये की लीज पर जमीन देगी योगी सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक न्याय की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए हिंदू परिवारों के जीवन में दशकों से व्याप्त अनिश्चितता के अंधेरे को खत्म कर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले के तहत कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में 63 विस्थापित हिंदू परिवारों को पुनर्वासित करने के लिए मात्र एक रुपये के प्रतीकात्मक लीज रेंट पर जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

इसे भी पढ़ें-  उत्तर प्रदेश में धरोहर स्थलों की जर्जर स्थिति पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का संज्ञान

इन जिलों में बसाए जा रहे शरणार्थी

यह निर्णय न केवल इन परिवारों को एक स्थायी ठिकाना और कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। पिछले कई दशकों से ये परिवार अस्थाई ठिकानों पर रहने को मजबूर थे, लेकिन अब सरकार के इस मानवीय दृष्टिकोण से उन्हें अपना घर और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सकेगा।

इस फैसले का एक और व्यापक पहलू भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय आए करीब 12,380 शरणार्थी परिवारों से जुड़ा है, जिन्हें उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जैसे जिलों में बसाया गया था। पिछले 70-75 वर्षों से ये परिवार खेती और निवास के लिए आवंटित जमीन का उपयोग तो कर रहे थे, लेकिन कानूनी तौर पर उनके पास मालिकाना हक नहीं था।

कागजी स्वामित्व न होने के कारण इन हजारों परिवारों को अपने ही अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ता था। वे न तो अपनी खेती के लिए बैंकों से कर्ज ले पाते थे और न ही अपनी कड़ी मेहनत से उपजाई गई फसल को सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच सकते थे। मालिकाना हक के अभाव में उन्हें अपनी फसल बिचौलियों को सस्ते दामों पर बेचनी पड़ती थी, जिससे वे आर्थिक रूप से पिछड़ते जा रहे थे।

खुल जाएंगे बैंक के दरवाजे

योगी कैबिनेट ने इन शरणार्थी परिवारों की दशकों पुरानी पीड़ा को समझते हुए उन्हें उनकी जमीन पर पूर्ण स्वामित्व देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। अब ये परिवार अपनी एक एकड़ तक की अधिकृत कृषि भूमि के असली मालिक कहलाएंगे, बशर्ते वह जमीन सीलिंग, चारागाह, तालाब या खलिहान जैसी सार्वजनिक श्रेणी में न आती हो।

स्वामित्व मिलने के बाद अब इन किसानों के लिए बैंकों के दरवाजे खुल जाएंगे और वे किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर आधुनिक खेती कर सकेंगे। साथ ही, अब वे गर्व के साथ सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकेंगे, जिससे बिचौलियों का शोषण समाप्त होगा। यह कदम संशोधित नागरिकता अधिनियम 2019 की मूल भावना को धरातल पर उतारने जैसा है, जहां धार्मिक उत्पीड़न या विभाजन की त्रासदी झेलकर आए लोगों को भारत की मिट्टी पर उनका वाजिब हक दिया जा रहा है।

मिलेगा सीधा लाभ

तराई के जिलों में बसे इन बंगाली और पंजाबी हिंदू परिवारों के लिए यह फैसला किसी दूसरी आजादी से कम नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीलीभीत में 4000, बिजनौर में 3856, लखीमपुर खीरी में 2350 और रामपुर में 2174 परिवारों को इस ऐतिहासिक निर्णय का सीधा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री का यह संकल्प दर्शाता है कि विकास की दौड़ में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान देना ही सुशासन की असली पहचान है। जहां पिछली सरकारों ने इन विस्थापितों की समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल रखा था। वहीं वर्तमान सरकार ने इन्हें वोट बैंक के बजाय सम्मानित नागरिक मानकर उनके जख्मों पर मरहम लगाया है। अब ये 12 हजार से अधिक परिवार उत्तर प्रदेश के नवनिर्माण में पूरी ताकत के साथ भागीदार बन सकेंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य दे पाएंगे।

 

इसे भी पढ़ें- नवनिर्माण के 9 वर्ष, स्वास्थ्य सेवाओं में देश में अग्रणी बना उत्तर प्रदेश

Related Articles

Back to top button