
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले पुराने कानूनों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश सरकार अब दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, जिसे आम भाषा में शॉप एक्ट कहा जाता है, को पूरी तरह से समाप्त करने की तैयारी कर रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार छह दशकों से लागू इस पुराने कानून की जगह एक बिल्कुल नया और आधुनिक कोड लागू करने की योजना बना रही है। यह बदलाव प्रदेश के व्यापारिक ढांचे में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है, जिसका सीधा असर लाखों छोटे-बड़े व्यवसायों पर पड़ने वाला है।
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ओएसएच कोड लागू होगा
सरकार की मंशा है कि, पुराने और अप्रासंगिक हो चुके शॉप एक्ट के स्थान पर व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कोड, जिसे संक्षेप में ओएसएच कोड कहा जा रहा है, को लागू किया जाए। यह नया कोड केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नई श्रम संहिताओं के अनुरूप बनाया जा रहा है, ताकि राज्य स्तर पर भी श्रम कानूनों में एकरूपता और आधुनिकता लाई जा सके।
किन-किन प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा असर
इस बदलाव का दायरा बेहद व्यापक है। सरकार द्वारा प्रस्तावित इस नए कोड का असर प्रदेश भर के लाखों दुकानदारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कॉर्पोरेट ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य छोटे-मोटे कारोबारों पर पड़ने की पूरी संभावना है। इन सभी प्रकार के व्यवसायों को अब नए ओएसएच कोड के दायरे में लाकर उनका पंजीकरण कराना अनिवार्य किया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि, नए नियमों के तहत अब सिर्फ 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली वाणिज्यिक इकाइयों को भी श्रम विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा, जबकि इससे पहले तक 20 कर्मचारियों तक की संख्या वाले प्रतिष्ठानों को इस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से छूट प्राप्त थी। यानी अब पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्या में छोटे व्यवसायों को भी सरकारी दायरे में लाया जाएगा।
क्या है शॉप एक्ट
अब सवाल उठता है कि, आखिर यह शॉप एक्ट है क्या और इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर निगरानी रखने और उन्हें नियमित करने के उद्देश्य से एक विशेष कानून बनाया गया था, जिसे दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम यानी शॉप एक्ट के नाम से जाना जाता है। यह कानून वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश में लागू किया गया था, यानी इसे लागू हुए अब करीब छह दशक से अधिक का समय बीत चुका है।
इस एक्ट के अंतर्गत शुरुआत में यह प्रावधान था कि, जिन भी दुकानों या प्रतिष्ठानों में कोई भी एक कर्मचारी भी काम करता हो, उन सभी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि, कामगारों के कार्य के घंटे, उनकी सुरक्षा, वेतन और अन्य सुविधाओं से जुड़े मानकों का पालन हो सके और सरकार के पास सभी वाणिज्यिक इकाइयों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड मौजूद रहे।
2024 में हुआ था बड़ा संशोधन
समय के साथ इस पुराने कानून में बदलाव की जरूरत महसूस की गई। इसी क्रम में योगी सरकार ने 2 जनवरी 2024 को शॉप एक्ट में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी प्रदान की थी। इस संशोधन के तहत एक बड़ी राहत देते हुए एक से लेकर 19 कर्मचारियों तक की संख्या वाले प्रतिष्ठानों को श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया था। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी कार्यवाही के बोझ से राहत देना था, ताकि वे आसानी से अपना कारोबार चला सकें।

इस संशोधन के बाद केवल उन्हीं प्रतिष्ठानों के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य रखा गया था, जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हों। इस बदलाव से प्रदेश के लाखों छोटे दुकानदारों और व्यवसायियों को काफी राहत मिली थी, क्योंकि अधिकांश छोटे प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की संख्या 20 से कम ही होती है।
नए नियम से खड़ी हुई विरोधाभास की स्थिति
हालांकि, अब स्थिति में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा देशभर में नई श्रम संहिताओं को लागू किया जा चुका है, जिनके तहत व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ा ओएसएच कोड अस्तित्व में आया है। जब इस नए ओएसएच कोड और उत्तर प्रदेश में पहले से लागू शॉप एक्ट के संशोधित प्रावधानों की तुलना की गई, तो दोनों के बीच एक स्पष्ट विरोधाभास सामने आया।
मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के शॉप एक्ट के अनुसार 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को रजिस्ट्रेशन से छूट प्राप्त है। वहीं, दूसरी ओर, केंद्र द्वारा लाए गए ओएसएच एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यानी दोनों कानूनों में रजिस्ट्रेशन की सीमा को लेकर स्पष्ट फर्क है, जिसकी वजह से प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।
इसी वजह से बदलाव की तैयारी
इसी विरोधाभासी स्थिति को दूर करने और केंद्र की नई श्रम संहिताओं के साथ राज्य के कानूनों को सामंजस्यपूर्ण बनाने के उद्देश्य से ही अब उत्तर प्रदेश सरकार पुराने शॉप एक्ट को पूरी तरह से समाप्त करके नए ओएसएच कोड को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि, इससे राज्य और केंद्र के कानूनों के बीच एकरूपता आएगी और व्यवसायियों के लिए भी नियमों को समझना और उनका पालन करना आसान हो जाएगा।
हालांकि, इस बदलाव के लागू होने के बाद व्यापारिक जगत में इसे लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। एक तरफ जहां बड़े कारोबारी संगठन इसे व्यवस्था में सुधार के तौर पर देख सकते हैं। वहीं छोटे व्यापारियों के मन में रजिस्ट्रेशन की सीमा घटकर 10 कर्मचारियों तक आने से नई चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं। फिलहाल, इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय और नई नीति का पूरा खाका सामने आना अभी बाकी है, जिसके बाद ही इसके वास्तविक प्रभावों का सही आकलन किया जा सकेगा।
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