योगी सरकार ने बढ़ाई गेहूं की कीमतें, किसानों के खाते में सीधे पैसा भेजेंगी एजेंसियां, ये 34 प्रस्ताव भी पास

 लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई कैबिनेट की बैठक में 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। सरकार ने किसानों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 160 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिससे अब नई दर 2585 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 30 मार्च से खरीद शुरू होगी।

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बैठक में हुए कई बड़े निर्णय

जानकारी के अनुसार, सूबे की राजधानी लखनऊ में स्थित लोकभवन में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और किसानों के कल्याण से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इस बैठक में कुल 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिनमें सबसे प्रमुख फैसला खाद्य एवं रसद विभाग से संबंधित गेहूं खरीद नीति को लेकर रहा।

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सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में शानदार बढ़ोतरी करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कीमतों में 160 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा इजाफा किया गया है, जो प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना और बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराना है।

घर के पास ही बिकेगा गेहूं

इस विशाल खरीद अभियान को सफल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, गेहूं की सरकारी खरीद 30 मार्च से शुरू होकर 15 जून तक निरंतर जारी रहेगी। किसानों की सुविधा के लिए पूरे प्रदेश में करीब 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसी भी किसान को अपना अनाज बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

इन केंद्रों पर न केवल अनाज की गुणवत्ता की जांच होगी, बल्कि किसानों के बैठने और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। कैबिनेट ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे सीधे पात्र किसानों को ही सरकारी लाभ मिल सके।

इन प्रमुख एजेंसियों को जिम्मेदारी

खरीद की इस विशाल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने आठ प्रमुख एजेंसियों को जिम्मेदारी दी है। इन एजेंसियों में भारतीय खाद्य निगम, उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, प्रांतीय सहकारी संघ, प्रादेशिक सहकारी संघ, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं।

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ये सभी एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि, प्रदेश के हर कोने में खरीद की प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से चले। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि, भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पैसा सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजा जाएगा। इससे न केवल भुगतान में तेजी आएगी बल्कि पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

इन 34 प्रस्तावों पर चर्चा

गेहूं खरीद के अलावा कैबिनेट बैठक में अन्य 34 प्रस्तावों पर भी गहन चर्चा हुई और उन्हें स्वीकृति दी गई। इनमें बुनियादी ढांचे के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागीय मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैबिनेट से पारित सभी प्रस्तावों का क्रियान्वयन तत्काल प्रभाव से धरातल पर शुरू किया जाए।

लोकभवन में हुई इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सबसे ऊपर हैं। 30 मार्च से शुरू होने वाला यह खरीद अभियान राज्य के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करने का काम करेगा।

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