
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले कई महीनों से जिस खास मौके इंतजार किया जा रहा था, वह अब बेहद करीब आ गई है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन में लंबित नियुक्तियों को लेकर अब अंतिम निर्णय की घड़ी आ गई है।
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल का स्वरूप इस हफ्ते बदल जाएगा। साथ ही संगठन में भी नए चेहरों की एंट्री होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद इन सभी नामों पर अंतिम मुहर लग जाएगी, जिसके बाद रविवार या सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।
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मंथन का दौर चरम पर
उत्तर प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य बैठाने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली में मंथन का दौर अपने चरम पर है। बृहस्पतिवार को दिल्ली के सियासी गलियारों में उस वक्त सरगर्मी बढ़ गई जब उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह अचानक दिल्ली पहुंचे।

इन दोनों दिग्गजों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के साथ घंटों तक बंद कमरे में लंबी मंत्रणा की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा केवल मंत्रिमंडल विस्तार ही नहीं, बल्कि संगठन के उन खाली पदों को भरना भी था जो काफी समय से रिक्त चल रहे हैं।
माना जा रहा है कि दिल्ली में हुई इस बैठक में उन नामों की सूची लगभग तैयार कर ली गई है, जिन्हें योगी कैबिनेट में जगह मिलनी है और जिन्हें संगठन की मुख्यधारा में शामिल किया जाना है।
अंतिम बैठक पर टिकी निगाहें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, इस बार का मंत्रिमंडल विस्तार केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए किया जा रहा है। पार्टी के भीतर इस बात पर भी चर्चा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जा सकता है, जबकि कुछ नए ऊर्जावान चेहरों को शामिल कर सरकार की छवि को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश होगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन और सरकार में बदलाव के लिहाज से अगले सप्ताह के शुरुआती दो-तीन दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाले हैं। दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद अब सबकी निगाहें उस अंतिम बैठक पर टिकी हैं, जो शुक्रवार या शनिवार को पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह के साथ होनी प्रस्तावित है।
तावड़े की भूमिका अहम
अमित शाह को भाजपा की चुनावी मशीनरी का चाणक्य माना जाता है और उनके साथ चर्चा के बाद ही यूपी की इस नई टीम को हरी झंडी मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे की तैयारियों की बात करें, तो यूपी में संगठन चुनाव के प्रेक्षक विनोद तावड़े की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
तावड़े ने हाल ही में लखनऊ में दो दिनों तक डेरा डाला था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की थीं। उन्होंने न केवल मंत्रिमंडल विस्तार बल्कि विभिन्न निगमों और बोर्डों में होने वाले मनोनयन को लेकर भी फीडबैक लिया था।
तावड़े ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट अमित शाह को पहले ही सौंप दी है और अब जो दिल्ली में बैठकें हो रही हैं, उनका मुख्य आधार वही रिपोर्ट है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि, संगठन और सरकार में नियुक्तियां इस तरह से हों कि कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हो और जनता के बीच सरकार की पहुंच और अधिक मजबूत हो।
सीएम आवास पर तैयारी तेज
लखनऊ में भी राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक तैयारियां सुगबुगाने लगी हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन शासन के गलियारों में चर्चा आम है कि, रविवार या सोमवार को राजभवन में बड़ा आयोजन हो सकता है। यह विस्तार इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को भी जगह मिल सकती है, जिससे गठबंधन की ताकत को और मजबूती दी जा सके। साथ ही, संगठन में उन पदाधिकारियों को विश्राम दिया जा सकता है, जो लंबे समय से एक ही पद पर बने हुए हैं और उनके स्थान पर नए खून को तरजीह दी जाएगी।
पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी मंथन है कि आगामी चुनावों से पहले किन सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक और बुंदेलखंड से लेकर तराई के इलाकों तक, हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कैबिनेट में दिखाई दे, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है।
बड़ा राजनीतिक संदेश
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि, यह विस्तार न केवल प्रशासनिक दृष्टि से सफल हो, बल्कि इसका एक ठोस राजनीतिक संदेश भी जाए। अब जब दिल्ली में अंतिम दौर की बैठकें शुरू हो चुकी हैं, तो यह साफ है कि इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली हैं।
अमित शाह के साथ होने वाली बैठक में जैसे ही अंतिम सूची पर हस्ताक्षर होंगे, वैसे ही लखनऊ में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश की जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब बस उस आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जो प्रदेश की सियासत को नई दिशा देने वाली है।
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