
देश के कुल दूध उत्पादन में 16% हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश नंबर-1 पर
लखनऊ। देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहा उत्तर प्रदेश आज एक नई आर्थिक और सामाजिक क्रांति की इबारत लिख रहा है। यहां दुग्ध उत्पादन में ऐसी क्रांति आई है कि, इसके उत्पादन में अग्रणी 5 राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी में 16 प्रतिशत योगदान अकेले उत्तर प्रदेश का है। ये महज एक आंकड़ा नहीं है बल्कि प्रदेश की बढ़ती ताकत और डेयरी संरचना का एक स्पष्ट उदाहरण है।
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40 फीसदी की हुई वृद्धि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में जो उछाल देखने को मिल रहा है, वह पिछले सात-आठ वर्षों की कड़ी मेहनत और योजनाबद्ध नीतियों का नतीजा है। वर्ष 2016-17 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन मात्र 277 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 तक बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। उत्पादन में दर्ज की गई लगभग 40 प्रतिशत की यह वृद्धि किसी भी राज्य के लिए एक मिसाल है।

इस शानदार सफर में उत्तर प्रदेश ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि, यह वृद्धि केवल संयोग नहीं बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों और निरंतर निगरानी का परिणाम है, जिसने पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक डेयरी उद्योग में बदल दिया है।
लाखों महिलाओं को मिला रोजगार
इस पूरी दुग्ध क्रांति की सबसे सशक्त और प्रेरणादायक कड़ी उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं हैं। योगी सरकार की पहल से पहली बार इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आज न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई हैं।
प्रदेश के 31 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध संग्रहण का अद्भुत रिकॉर्ड बनाया है। इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ,महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां अब तक करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार कर चुकी हैं। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि, जब ग्रामीण महिला शक्ति को सही संसाधन और सहयोग मिलता है, तो वह पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है।
सम्मान भी बढ़ा
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भौगोलिक आधार पर गठित महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों ने स्थानीय स्तर पर विकास के नए द्वार खोले हैं। बुंदेलखंड जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में जहां कभी संसाधनों की भारी कमी थी, वहां बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी ने महिलाओं को आर्थिक आजादी का स्वाद चखाया है।
इसी प्रकार पूर्वांचल के गौरव को काशी एमपीसीएल, अवध की समृद्धि को सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल की शक्ति को श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल और तराई क्षेत्र की खुशहाली को सृजन एमपीसीएल के माध्यम से नई ऊर्जा मिल रही है। इन संस्थाओं से करीब चार लाख महिला किसान सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, जो दूध उत्पादन से लेकर प्रबंधन तक की पूरी बागडोर अपने हाथों में संभाल रही हैं। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में उनके आत्मविश्वास और सम्मान को भी बढ़ा रहा है।
उत्तर प्रदेश में आई यह श्वेत क्रांति प्रदेश की बदलती हुई उस तस्वीर का प्रतीक है, जहां गांव, गरीब और किसान सरकार की नीतियों के केंद्र में हैं। पशुपालन विभाग के प्रयासों और मुख्यमंत्री के विजन ने दुग्ध उत्पादन को एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जहां से उत्तर प्रदेश अब देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक डेयरी हब बनने की दिशा में अग्रसर है।
डिजिटल माध्यमों से जोड़ा गया दुग्ध समितियों को
महिलाओं को इतनी बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से सशक्त बनाना न केवल राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान दे रहा है, बल्कि भविष्य के समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव भी रख रहा है। आज उत्तर प्रदेश का हर गांव इस सफलता की कहानी का हिस्सा है, जहां महिलाएं अपनी मेहनत से श्वेत क्रांति की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।

सरकार ने इस विकास यात्रा में तकनीक और पशु स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया है। नस्ल सुधार कार्यक्रमों के जरिए दुधारू पशुओं की गुणवत्ता बढ़ाई गई है, जिससे प्रति पशु दूध देने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, गांवों में दुग्ध समितियों को डिजिटल माध्यमों से जोड़ा गया है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी हुई है।
अब महिला पशुपालकों के बैंक खातों में दूध का पैसा सीधे और समय पर पहुंचता है, जिसने बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यह पारदर्शिता ही है जिसने अधिक से अधिक ग्रामीणों को डेयरी व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। योगी सरकार की नई डेयरी नीति ने निजी क्षेत्र के निवेशकों को भी आकर्षित किया है, जिससे प्रदेश में प्रोसेसिंग प्लांट और कोल्ड चेन का विस्तार हुआ है।
रुका पलायन
आंकड़े बताते हैं कि, उत्तर प्रदेश अब केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा, बल्कि अन्य राज्यों को भी दूध की आपूर्ति करने में सक्षम हो गया है। 388 लाख मीट्रिक टन का वार्षिक उत्पादन यह सुनिश्चित करता है कि, प्रदेश में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो रही है।
ग्रामीण इलाकों में इस उद्योग के विस्तार ने पलायन को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। जब युवाओं और महिलाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक आय का जरिया मिल रहा है, तो वे शहरों की ओर भागने के बजाय अपने पशुधन को ही अपनी संपत्ति मानकर संवार रहे हैं। यह सामाजिक स्थिरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि केवल सरकार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लाखों ग्रामीण परिवारों की मुस्कान में झलकती है जिनके आंगन में अब समृद्धि का वास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुना गया आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का सपना अब हकीकत में बदल रहा है।
16 प्रतिशत की राष्ट्रीय हिस्सेदारी के साथ यूपी ने यह संदेश दे दिया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो और जनता का साथ मिले, तो संसाधनों की कमी कभी प्रगति में बाधा नहीं बन सकती। आने वाले वर्षों में, उत्तर प्रदेश का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को और अधिक बढ़ाने और डेयरी उत्पादों के निर्यात में वैश्विक पहचान बनाने का है। यह श्वेत क्रांति आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और संपन्न प्रदेश की विरासत तैयार कर रही है।
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