
बॉलीवुड में एक फिल्म की सफलता अक्सर दूसरी फिल्म की किस्मत तय कर देती है। साल 1991 बॉलीवुड के लिए ऐसा ही साल था, जब एक नए चेहरे की एंट्री ने दो दिग्गज सितारों की फिल्म की कमर तोड़ दी। अजय देवगन ने, जो उस समय महज 22 साल के थे, अपनी पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ के साथ बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। ठीक, उसी समय रिलीज हुई अनिल कपूर और श्रीदेवी की फिल्म ‘लम्हे’ बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इस क्लैश ने अनिल कपूर को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया और श्रीदेवी का दमदार स्टारडम भी कुछ समय के लिए फीका कर दिया।
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डेब्यू फिल्म से ही धमाका
अजय देवगन का डेब्यू फिल्मी दुनिया के लिए एक धमाके की तरह था। दिवंगत स्टंट डायरेक्टर वीरू देवगन के बेटे अजय शुरू से ही फिल्म निर्माण में रुचि रखते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें एक्टर बना दिया।

संदेश कोहली द्वारा निर्देशित ‘फूल और कांटे’ में अजय ने लीड रोल किया। फिल्म में उनकी एक्शन और रोमांस की स्टाइल, खासकर मोटरसाइकिल पर किया गया वो आइकोनिक एंट्री सीन, आज भी याद किया जाता है। फिल्म 1 नवंबर 1991 को रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की और अजय देवगन रातोंरात सुपरस्टार बन गए।
‘लम्हे’ vs ‘फूल और कांटे’: बड़ा क्लैश
ठीक उसी समय, 29 नवंबर 1991 को अनिल कपूर और श्रीदेवी की फिल्म ‘लम्हे’ रिलीज हुई थी। मनमोहन सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म काफी चर्चा में थी। अनिल कपूर और श्रीदेवी उस वक्त बॉलीवुड के टॉप स्टार थे। फिल्म की भव्यता, लोकेशन, संगीत और कहानी को लेकर बड़ी-बड़ी उम्मीदें थीं। प्रोड्यूसर यश चौधरी और निर्देशक मनमोहन सिंह ने इसे एक प्रीमियम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार किया था, लेकिन अजय देवगन की तूफानी एंट्री के आगे ‘लम्हे’ का जादू काम नहीं कर सका।
फिल्म ‘लम्हे’ को औसत से नीचे का रिस्पॉन्स मिला जबकि ‘फूल और कांटे’ ने न सिर्फ घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया बल्कि दर्शकों के बीच भी खूब चर्चा बटोरी। अजय की फ्रेश इमेज, फिल्म का मास अपील वाला एक्शन-रोमांस फॉर्मूला और साउंडट्रैक ने युवा पीढ़ी को आकर्षित किया। दूसरी ओर ‘लम्हे’ को आर्टिस्टिक जरूर माना गया, लेकिन व्यावसायिक रूप से यह दर्शकों तक नहीं पहुंच सकी।
अनिल कपूर ने खुद बताई थी कहानी
कई साल बाद अजय देवगन ने लोकप्रिय शो ‘आप की अदालत’ में इस पूरे किस्से का खुलासा किया। अजय ने बताया कि ‘फूल और कांटे’ के प्रीमियर पर अनिल कपूर उनसे मिले थे। अनिल ने अजय को समझाया था कि, उनकी फिल्म नई है, कास्ट नई है, डायरेक्टर नया है और प्रोड्यूसर भी नया है। ऐसे में ‘लम्हे’ जैसी बड़ी फिल्म के सामने रिलीज करना जोखिम भरा हो सकता है।
अनिल कपूर ने अजय से रिलीज डेट आगे बढ़ाने या बदलने की अपील की थी, लेकिन फिल्म रिलीज हो गई और नतीजा उल्टा निकला। ‘लम्हे’ बॉक्स ऑफिस पर औसत रही, जबकि ‘फूल और कांटे’ ने सुपरहिट का दर्जा हासिल किया। इस क्लैश से अनिल कपूर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उस समय की अनुमानित रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘लम्हे’ की लागत काफी अधिक थी और उसकी कमाई उम्मीदों से काफी कम रही। अनिल कपूर उस समय कई बड़ी फिल्मों में व्यस्त थे, लेकिन यह क्लैश उनके करियर के उस दौर में एक बड़ा झटका साबित हुआ।
श्रीदेवी का स्टारडम भी प्रभावित
श्रीदेवी उस समय हिंदुस्तानी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्री मानी जाती थीं। ‘चालबाज’, ‘सदमा’, ‘नागिना’ जैसी फिल्मों के बाद उनका जलवा पूरे देश में था। ‘लम्हे’ में उन्होंने डबल रोल किया था, लेकिन फिल्म की असफलता से उनका स्टारडम भी थोड़ा प्रभावित हुआ। हालांकि, श्रीदेवी जैसी दमदार अभिनेत्री ने बाद में कई हिट फिल्में दीं, लेकिन 1991 का यह साल उनके लिए भी यादगार नहीं रहा।

इस घटना ने बॉलीवुड में एक बात साफ कर दी थी कि, कोई भी स्टार कितना भी बड़ा क्यों न हो, दर्शक की पसंद सबसे ऊपर होती है। अजय देवगन ने बिना किसी बड़े बैकग्राउंड के अपनी मेहनत और स्क्रीन प्रेजेंस से जगह बनाई, जबकि अनिल कपूर और श्रीदेवी जैसे स्थापित सितारों को भी इस क्लैश का खामियाजा उठाना पड़ा।
35 साल बाद भी अजय का जलवा बरकरार
आज जब अजय देवगन 35 साल के करियर को देखते हैं तो ‘फूल और कांटे’ उनका लॉन्चिंग पैड साबित हुआ। उन्होंने ‘सिंघन’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’, ‘दृश्यम’ सीरीज, ‘रुद्राक्ष’ और हालिया फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, अनिल कपूर भी आज भी सक्रिय हैं और कई युवा अभिनेताओं के लिए इंस्पिरेशन बने हुए हैं। यह किस्सा बॉलीवुड की उस कड़वी सच्चाई को दिखाता है जहां एक फिल्म की सफलता दूसरी को नुकसान पहुंचा सकती है।
रिलीज डेट का क्लैश आज भी बॉलीवुड की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। ‘फूल और कांटे’ और ‘लम्हे’ का यह मुकाबला आज भी उन गिने-चुने उदाहरणों में शामिल है, जहां एक नए आने वाले कलाकार ने स्थापित सितारों की फिल्म को पीछे छोड़ दिया। अजय देवगन की इस सफलता ने न सिर्फ उनके करियर की नींव रखी बल्कि यह भी साबित कर दिया कि बॉलीवुड में टैलेंट और सही टाइमिंग का अपना अलग महत्व है।
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