
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल बचाने और सोना न खरीदने की अपील के बाद बीजेपी शासित राज्यों में इस पर तेजी से अमल होने लगा है। पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस पर फैसला लिया और अब उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने ‘एक अधिकारी एक वाहन’ का प्रस्ताव पास किया है। इसके साथ ही उनकी कैबिनेट में कुल 19 प्रस्तावों पर मुहर लगी।
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राज्य को अग्रणी बनाने का रोडमैप तैयार
भविष्य की चुनौतियों और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सीएम धामी ने आज अपने तरकश से कई बड़े तीर छोड़े हैं। देहरादून स्थित सचिवालय में धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए 19 अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई।

यह बैठक न केवल नीतिगत फैसलों के लिहाज से ऐतिहासिक रही, बल्कि इसने उत्तराखंड को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बनाने का रोडमैप भी तैयार कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि, अब विलासिता के बजाय संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों में परिवहन, पर्यटन, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जो आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
फिजूलखर्ची पर नकेल कसने की तैयारी
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिकारियों ने फैसलों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार अब फिजूलखर्ची पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह गंभीर है। प्रशासनिक सुधार की दिशा में सबसे बड़ा कदम ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ के फॉर्मूले को मंजूरी देना है। लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि कई प्रभावशाली अधिकारी एक से अधिक सरकारी वाहनों का उपयोग कर रहे थे, जिससे राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।
अब इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल सरकारी तेल और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि, सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग जनता के हित में होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत विलासिता के लिए। इसके साथ ही सरकार जल्द ही एक नई ईवी पॉलिसी लाने जा रही है, जिसके तहत सरकारी खरीद में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य भर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बिछाने के लिए भी व्यापक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है।
पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के कम उपयोग की अपील का असर धामी कैबिनेट के फैसलों में साफ तौर पर दिखाई दिया। मुख्यमंत्री धामी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे दबाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के संकटों का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए कैबिनेट ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों को मिशन मोड में बढ़ाने का निर्णय लिया है।
राज्य के सभी होटलों, रेस्टोरेंटों और सरकारी आवासों में अब पीएनजी को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर पैनलों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों के प्रस्तावों को भी पारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि, प्रदेश का हर घर अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा करने की दिशा में आगे बढ़े।
पर्यटन के लिए खोला खजाना
उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन क्षेत्र के लिए भी कैबिनेट ने खजाना खोल दिया है। राज्य में घरेलू पर्यटन को एक नई ऊंचाई देने के लिए विजिट माय स्टेट अभियान को मंजूरी दी गई है। इस अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों, प्राचीन विरासत स्थलों, वेलनेस केंद्रों और इको-टूरिज्म सर्किटों का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
सरकार ने विशेष रूप से बेड एंड ब्रेकफास्ट और होमस्टे नीतियों में संशोधन करते हुए उन्हें और अधिक सरल और आकर्षक बनाया है ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड को दुनिया का पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया है। अब विदेशों और अन्य राज्यों से आने वाले लोग बिना किसी कानूनी अड़चन के उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में विवाह समारोह आयोजित कर सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी धामी सरकार ने एक बड़ा साहसिक कदम उठाया है। राज्य में भूमि विवादों को सुलझाने और खेती को वैज्ञानिक आधार देने के लिए चकबंदी प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रत्येक जिले में 10-10 गांवों का चयन किया जाएगा, जहां चकबंदी का काम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इन मामलों के निस्तारण के लिए 120 दिन की समय सीमा तय कर दी है, जिससे किसानों को वर्षों तक कचहरियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना तैयार
प्राकृतिक खेती और जीरो बजट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए भी किसानों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की गई है। मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उर्वरकों के संतुलित उपयोग का अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के उत्पादों को जैविक उत्पादों के रूप में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिल सके।

मुख्यमंत्री धामी ने कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य के भविष्य के लिए निवेश करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद बदली हुई परिस्थितियों में हमें अपने संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने खुद और उनके मंत्रियों द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए दुपहिया वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के उदाहरण देते हुए जनता से भी ऊर्जा बचाने का आह्वान किया।
कैबिनेट ने यह भी माना कि वैश्विक आर्थिक संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों का मुकाबला केवल दीर्घकालिक सुधारों से ही किया जा सकता है। इन 19 प्रस्तावों के माध्यम से सरकार ने न केवल अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया है, बल्कि राज्य के समग्र विकास के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार किया है जो आने वाले दशकों तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाएगा। अब देखना यह होगा कि इन फैसलों का धरातल पर क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है और आम जनता को इसका लाभ कब तक मिलना शुरू होता है।
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