
तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां से पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध की वापसी नामुमकिन नजर आ रही है। गुरुवार की सुबह ईरान के रणनीतिक और आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण केशम द्वीप से उठते धुएं के गुबार ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है।
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यूरोपियन यूनियन और कोपरनिकस सेंटिनल-2 की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के इस महत्वपूर्ण बंदरगाह को निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि, यह हमला अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेनाओं द्वारा किया गया है, जो न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है बल्कि वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर नियंत्रण पाने की एक सोची-समझी साजिश है।

इस हमले के बाद ईरान की तर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें आ रही हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि, उन्होंने फारस की खाड़ी में केशम द्वीप के दक्षिण में अमेरिका के एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अब लड़ाई केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे सैन्य टकराव में बदल चुकी है।
केशम द्वीप पर हमला
ईरान के केशम फ्री जोन के अधिकारियों के अनुसार, 1 अप्रैल की शाम से शुरू होकर 2 अप्रैल की दोपहर तक चले इस हमले में बहमन कमर्शियल बंदरगाह और दोहा मछली पकड़ने के घाट को भारी नुकसान पहुंचा है। सैटेलाइट इमेज में बंदरगाह की सुविधाओं से उठता काला धुआं साफ देखा जा सकता है, जो हमले की भीषणता को बयां कर रहा है। केशम द्वीप ईरान के लिए केवल एक भूखंड नहीं है, बल्कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के प्रभुत्व का केंद्र है।
ईरान इस द्वीप का उपयोग न केवल व्यापार के लिए करता है, बल्कि यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने और उनकी निगरानी करने के लिए भी इसका विशेष महत्व है। इस पोर्ट पर हमला करके अमेरिका और इजरायल ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने और उसके रणनीतिक नियंत्रण को कमजोर करने की कोशिश की है। हालांकि, ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने राहत की खबर देते हुए बताया है कि इस हमले में अब तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
ईरान का कड़ा रुख
केशम फ्री जोन के उप-प्रमुख मंसूर अजीमजादेह अर्देबिली ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों की धज्जियां उड़ाना बताया है। अर्देबिली के अनुसार, बहमन पूरी तरह से एक वाणिज्यिक बंदरगाह है, जहां से आम व्यापार और नागरिक आपूर्ति का काम होता है। इस तरह के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। अमेरिका और इजरायल लगातार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और अब वे ईरान के नागरिक ढांचे को अपना निशाना बना रहे हैं।
ईरान का आरोप है कि, अमेरिका और इजरायल जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों को निशाना बना रहे हैं, ताकि देश के भीतर अराजकता फैलाई जा सके और ईरानी जनता के मनोबल को तोड़ा जा सके।
क्यों अहम है ‘लारक-केशम गैप’
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस जलडमरूमध्य में ईरान के दो छोटे-छोटे द्वीप ‘लारक’ और ‘केशम’ स्थित हैं। इन दोनों द्वीपों के बीच के संकरे मार्ग को ‘लारक-केशम गैप’ या ‘लारक-केशम चैनल’ कहा जाता है।

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस चैनल का उपयोग पूरी दुनिया के व्यापारिक जहाजों की बारीकी से निगरानी करने के लिए किया है। ईरान केवल उन्हीं देशों के जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिनके साथ उसके संबंध अच्छे हैं या जिन्होंने ईरान के साथ विशेष समझौता किया है। ऐसे में इस रास्ते पर हमले का मतलब है कि, अमेरिका और इजरायल अब इस चेकपोस्ट को पूरी तरह से नष्ट करना चाहते हैं ताकि वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर ईरान का एकाधिकार खत्म हो सके।
IRGC का पलटवार
हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन IRGC ने एक सनसनीखेज दावा किया। IRGC के आधिकारिक बयान के अनुसार, फारस की खाड़ी के आकाश में घुसपैठ कर रहे एक अमेरिकी उन्नत लड़ाकू विमान को ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक मार गिराया है। यह विमान केशम द्वीप के दक्षिण में उस समय गिराया गया जब वह ईरानी क्षेत्र की जासूसी या हमले की फिराक में था।
यदि इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ा सैन्य और तकनीकी झटका होगा। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और अब अंदेशा जताया जा रहा है कि, अमेरिका इस नुकसान का बदला लेने के लिए ईरान के मुख्य भूभाग पर और भी घातक हमले कर सकता है।
अब तक हो चुकी हैं 2000 से ज्यादा मौतें
यह युद्ध अब ईरान के लिए एक मानवीय संकट में तब्दील हो चुका है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए व्यापक हमलों के बाद से ईरान में भारी तबाही का मंजर है। सरकारी और स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान के कई शहर खंडहरों में बदल चुके हैं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और इसके आसपास के द्वीप इस समय युद्ध का केंद्र बने हुए हैं क्योंकि यही वे स्थान हैं जहां से ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की इस ब्लैकमेलिंग शक्ति को खत्म करना है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आर-पार की जंग लड़ रहा है।
केशम बंदरगाह पर हमला केवल एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि यह मिडिल ईस्ट के भूगोल और भविष्य को बदलने की एक कोशिश है। अमेरिका और इजरायल की इस संयुक्त कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान को किसी भी कीमत पर रणनीतिक रूप से पंगु बनाना चाहते हैं। दूसरी ओर, ईरान द्वारा अमेरिकी विमान गिराने का दावा यह बताता है कि वह झुकने को तैयार नहीं है। आने वाले दिन इस क्षेत्र और पूरी दुनिया की शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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