
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों परिवारों और कर्मचारियों को नए साल के बाद एक बड़ी सौगात देते हुए कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णयों पर मुहर लगा दी है, जहां मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कैबिनेट की अहम बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया है।
इस बैठक का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित फैसला उत्तर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्रों और हज़ारों अनुदेशकों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी को लेकर रहा जिसके तहत सरकार ने शिक्षामित्रों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए उनके मासिक मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।
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इसी क्रम में प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी बड़ी वृद्धि की गई है, जिन्हें अब 9,000 रुपये के बजाय 17,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे और यह बढ़ी हुई राशि इसी चालू माह यानी अप्रैल 2026 से ही लागू मानी जाएगी जिसका सीधा अर्थ यह है कि आगामी 1 मई को जब शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के बैंक खातों में वेतन पहुंचेगा तो वह पूरी तरह से बढ़ी हुई दर के साथ होगा।
प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस निर्णय की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा से ही संविदा कर्मियों के हितों का ध्यान रखा है और इसी का परिणाम है कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के समय जो मानदेय मात्र 3,500 रुपये था उसे पहले बढ़ाकर 10,000 किया गया और अब इसे लगभग दोगुना करते हुए 18,000 रुपये के सम्मानजनक स्तर पर पहुंचाया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े क्रांतिकारी सुधार के उद्देश्य से योगी कैबिनेट ने सहायता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में भी आमूल-चूल परिवर्तन करने का निर्णय लिया है जिसके अनुसार अब मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति सीधे मदरसा प्रबंध तंत्र द्वारा न होकर नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से पारदर्शी लिखित परीक्षा द्वारा की जाएगी।

वर्तमान व्यवस्था में मदरसों के स्तर पर ही होने वाली भर्तियों में अक्सर धांधली और अपारदर्शिता की शिकायतें मिलती थीं जिन्हें दूर करने के लिए अब मदरसा शिक्षक बनने के इच्छुक उम्मीदवारों को कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा और इसके साथ ही मदरसों के संचालन के लिए सख्त नई गाइडलाइन भी तैयार की गई है, जिसमें सामान्य स्कूलों की तर्ज पर प्रतिदिन 8 घंटे की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत मदरसा प्रिंसिपल, सभी शिक्षकों और यहां तक कि, बच्चों की भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी और छात्रों का पूरा शैक्षणिक डेटा एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल पोर्टल पर रखा जाएगा ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी सहायता के सही उपयोग की निगरानी सुनिश्चित हो सके।
प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के अगले चरण के तहत 25 लाख नए टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दिला दी है, जिससे अब तक वितरित किए जा चुके करीब 60 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट के विशाल आंकड़े में और भी बड़ी बढ़ोतरी होगी और यह डिजिटल शक्ति प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ रहे छात्रों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोलेगी।
एक अन्य अत्यंत संवेदनशील और मानवीय फैसले में योगी सरकार ने पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए उन लगभग 12,000 हिंदू परिवारों को भूमि का कानूनी मालिकाना हक देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है जो पिछले 50 से 60 वर्षों से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जैसे तराई वाले जिलों में शरणार्थी के रूप में रह रहे थे और अब ये परिवार नागरिकता संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत न केवल भारतीय नागरिकता बल्कि अपनी जमीन के वास्तविक स्वामी भी कहलाएंगे जिससे उनकी पीढ़ियों का अनिश्चित भविष्य अब पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण और एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज की संकल्पना को साकार करते हुए कैबिनेट ने बलिया जिले में नए राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण को मंजूरी दी है, जो कारागार विभाग की खाली पड़ी जमीन पर निर्मित किया जाएगा और इसके लिए जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रूप में मर्ज कर दिया जाएगा, जहां बुनियादी ढांचा तैयार होते ही एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार होगा।
परिवहन क्षेत्र को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए प्रदेश के 49 प्रमुख बस स्टैंडों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का फैसला लिया गया है जिससे राज्य में निजी क्षेत्र के माध्यम से करीब 4,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश आने की संभावना है और इससे आम यात्रियों को बस अड्डों पर ही एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर के कैंपियरगंज में 491 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को भी कैबिनेट ने हरी झंडी दिखाई है जो 50 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होगा और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
दलितों, पिछड़ों और समाज सुधारकों के सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए सरकार ने ‘डॉ. बी.आर. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ का शुभारंभ किया है जिसके अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित महापुरुषों की मूर्तियों के आसपास सौंदर्यीकरण, बाउंड्री निर्माण और छतरी की व्यवस्था के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 1 करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किया गया है और एक मूर्ति के विकास पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे जिसकी विस्तृत गाइडलाइन आगामी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर जारी की जाएगी।
क्षेत्रीय विकास की दिशा में कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र में गंगा नदी पर चियौसर घाट पर पुल और लिंक रोड के निर्माण के लिए 288 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दी गई है जिससे उस क्षेत्र की लगभग 4 लाख की आबादी का आवागमन सुगम हो जाएगा। योगी कैबिनेट के ये तमाम फैसले यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है बल्कि वह समाज के हर वर्ग विशेषकर संविदा कर्मचारियों, युवाओं, विस्थापितों और ग्रामीण आबादी के सर्वांगीण उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन फैसलों को तत्काल प्रभाव से धरातल पर उतारने के लिए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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