
अलीगढ़। ‘तुम हो कौन, कोई लॉर्ड हो क्या?’…IAS अधिकारी के चैंबर में हंगामा, सपा, बसपा और कांग्रेस नेताओं पर जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक IAS अधिकारी के साथ अभद्रता और धमकी का मामला सामने आया है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
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नगर निगम आयुक्त में चेंबर में जबरन घुसे

नगर निगम आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा (IAS) के चैंबर में हथियारों के साथ जबरदस्ती घुसने, कुर्सी उठाकर हमला करने की कोशिश और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में समाजवादी पार्टी के नेता अज्जू इशहाक, बहुजन समाज पार्टी के नेता प्रशांत वाल्मीकि और कांग्रेस नेता आगा यूनिस सहित अन्य लोगों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह पूरा विवाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से शुरू हुआ था, जो अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है।
घटना की शुरुआत 23 फरवरी को उस वक्त हुई थी, जब नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने शहर के व्यस्त इलाके तस्वीर महल और तिब्बती कॉलेज (तिब्बिया कॉलेज) के पास सड़क किनारे अवैध रूप से लगे फल-सब्जी के रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने का अभियान चलाया। नगर निगम के अनुसार, इन ठेलों से यातायात बाधित हो रहा था और पैदल यात्रियों को असुविधा हो रही थी। ऐसे में टीम ने पहले चेतावनी दी, लेकिन वेंडर नहीं माने और विरोध करने लगे तो मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
मारपीट के दौरान एक फल विक्रेता ने नगर निगम के प्रवर्तन दल के कर्मचारी पर लोहे के बाट से हमला कर दिया, जिससे कर्मचारी के सिर में गंभीर चोट आई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था,जिसमें हमलावर को रेहड़ी से बाट निकालकर हमला करते देखा जा सकता है।
पुलिस ने शांत कराया मामला
सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। नगर निगम ने हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में संबंधित वेंडरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले दिन यानी 24 फरवरी को इस कार्रवाई के विरोध में सपा, बसपा और कांग्रेस से जुड़े नेता सैकड़ों समर्थकों के साथ नगर निगम आयुक्त के कार्यालय पहुंचे। वे FIR वापस लेने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे थे।
जनसुनवाई के दौरान मौजूद नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने स्पष्ट कहा कि कार्रवाई नियमानुसार की गई है और एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी। इसी दौरान तीखी नोंकझोंक शुरू हो गई। सपा नेता अज्जू इशहाक ने आयुक्त से ऊंची आवाज में कहा, “तुम हो कौन, कोई लॉर्ड हो क्या? यह वाक्य इतना जोर से बोला गया कि पूरे चैंबर में हंगामा मच गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने हथियार लेकर जबरदस्ती चैंबर में घुसने की कोशिश की, कुर्सी उठाकर हमला करने की धमकी दी और भद्दी-भद्दी गालियां दीं। तहरीर में कहा गया है कि वे नगर आयुक्त को जान से मारने की धमकी दे रहे थे।
नगर आयुक्त ने दी प्रतिक्रिया
सहायक नगर आयुक्त और प्रवर्तन दल के कर्मचारी किशोर कुमार शर्मा की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। सीओ तृतीय सर्वम सिंह ने पुष्टि की कि मुकदमा दर्ज हो चुका है और जांच शुरू कर दी गई है। मुकदमे में आईपीसी की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें धमकी, अभद्रता, सरकारी कार्य में बाधा, हथियारों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं शामिल हैं।नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाना उनका कर्तव्य है और वे कानून के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में नए वेंडिंग जोन बनाने की योजना है, लेकिन सड़कों पर अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मीणा ने कहा, हमला करने वालों पर पहले से मुकदमे हैं, और अब कार्यालय में धमकी देने वालों पर भी कार्रवाई होगी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सपा नेता अज्जू इशहाक आयुक्त पर उंगली उठाते और चिल्लाते दिख रहे हैं। वीडियो में तुम हो कौन, लॉर्ड हो क्या? वाला हिस्सा बार-बार शेयर किया जा रहा है। राजनीतिक दलों ने अलग-अलग बयान दिए हैं। सपा समर्थकों का कहना है कि यह गरीब वेंडरों के हक की लड़ाई है और प्रशासन उन्हें दबा रहा है।
वेंडर बोले- वैकल्पिक जगह नहीं है
वहीं, प्रशासन और भाजपा समर्थक इसे सरकारी अधिकारी के अपमान और कानून-व्यवस्था की चुनौती बता रहे हैं। अलीगढ़ में अतिक्रमण हटाने के अभियान अक्सर विवादास्पद रहते हैं, क्योंकि यहां सड़कों पर हजारों ठेले-पटरी वाले रोजगार कमाते हैं। नगर निगम का दावा है कि अतिक्रमण हटाने से शहर की सुंदरता और यातायात बेहतर होगा, जबकि वेंडरों का कहना है कि उनके पास वैकल्पिक जगह नहीं है।
इस घटना ने एक बार फिर स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकार और शहर की साफ-सफाई के बीच संतुलन की बहस छेड़ दी है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि मुकदमे में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या राजनीतिक दबाव में कोई बदलाव आता है। फिलहाल, यह मामला उत्तर प्रदेश में IAS अधिकारियों की सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप के मुद्दे को फिर से उजागर कर रहा है।



