
लखनऊ। इस समय गेहूं की कटाई का समय चल रहा है, लेकिन प्रदेश के विभिन्न जिलों के हो रही बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तमाम किसानों की पकी फसल कटने से पहले ही बारिश की भेंट चढ़ गई। लहलहाती सुनहरी फसलों पर हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं।
20 घंटे में पहुंचे सहायता राशि
खेत से लेकर खलिहान तक भीग रहे अनाज को देख कर किसान खून के आंसू रो रहे हैं, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी तकलीफ समझी है और सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को स्पष्ट और सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि, राहत कार्य में एक पल की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को दफ्तर छोड़कर खेतों में उतरने और 24 घंटे के भीतर प्रभावितों को सहायता राशि पहुंचाने का कड़ा आदेश दिया है।
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उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने रबी की मुख्य फसल, गेहूं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कटाई के इस महत्वपूर्ण समय में आई आपदा ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर पर हाई-लेवल समीक्षा की और राहत आयुक्त से लेकर जिलाधिकारियों तक को पूरी तरह सक्रिय रहने का निर्देश दिया।
जिलावार रिपोर्ट तलब
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि, संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रकृति की मार झेल रहे किसानों को नियमानुसार जल्द से जल्द उचित मुआवजा मिलना चाहिए और यदि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जिलावार विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और कहा है कि असमय बारिश से फसलों को कितना नुकसान हुआ है, इसकी सटीक जानकारी जल्द से जल्द शासन तक पहुंचाई जाए। उन्होंने आपदा का असर किसानों पर न्यूनतम रखने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि, जहां कहीं भी जनहानि, पशुहानि या कोई घायल हुआ है, वहां 24 घंटे के भीतर राहत और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। शासन की मंशा स्पष्ट है कि पीड़ित परिवार को सरकारी मदद के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
फील्ड में जाएं अधिकारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि, वे केवल दफ्तर में बैठकर कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न करें, बल्कि खुद फील्ड में जाएं और प्रभावित इलाकों का दौरा करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फसलों को हुए नुकसान का आंकलन वास्तविक स्थिति और जमीनी सच्चाई को देखकर किया जाए, ताकि किसानों को सही और पर्याप्त मुआवजा मिल सके। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को मिलकर फसल नुकसान का संयुक्त सर्वे करने का जिम्मा सौंपा गया है।
इस संयुक्त सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह है कि अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी न रहे और सर्वे की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे पूरा होते ही रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए ताकि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
खेतों से लेकर खलिहानों तक छाई इस चिंता के बीच मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बेहद संवेदनशीलता के साथ काम करने को कहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि राज्य सरकार हर कठिन परिस्थिति में किसानों और आम लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। बारिश से हुए हर नुकसान का सूक्ष्म आकलन कर किसानों को राहत दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि, किसी भी किसान को सरकारी प्रक्रिया के कारण अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसान खुद साझा करें जानकारी
प्रदेश के कई हिस्सों में गेहूं की कटाई चरम पर थी और कई किसानों ने फसल काटकर खलिहानों में सुरक्षित मड़ाई के लिए रखी हुई थी, लेकिन अचानक आई बारिश ने सारी उम्मीदों पर संकट के बादल ला दिए। खेतों में खड़ी फसलें तेज हवा के कारण झुक गई हैं, जबकि खलिहान में रखी फसल भीगने से खराब होने लगी है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि किसान खुद भी अपने नुकसान की जानकारी प्रशासन को साझा करें जिससे प्रक्रिया में और तेजी आए, जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उनके लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि, अगर कट चुकी फसल खलिहान में रखी थी और बारिश से नुकसान हुआ है, तो वह फसल 14 दिन तक बीमा कवर के दायरे में मानी जाएगी ऐसे प्रभावित किसान 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। समय पर जानकारी देने से उन्हें बीमा का लाभ मिलने में आसानी होगी।
धरातल पर उतरे आदेश
मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव कृषि और राहत आयुक्त को भी निर्देशित किया है कि वे फील्ड में काम कर रहे अधिकारियों के साथ सीधा समन्वय बनाए रखें और सभी जिलों से आने वाली जानकारी को समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराएं। उत्तर प्रदेश सरकार का यह त्वरित और कड़ा रुख उन लाखों किसानों के लिए राहत की बात है जिनकी मेहनत पर कुदरत का कहर बरसा है। अब जिला प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वे मुख्यमंत्री के इन आदेशों को कितनी सक्रियता से धरातल पर लागू करते हैं।
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