
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मार्च के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक से करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार दूसरे दिन बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और ओलावृष्टि का दौर जारी है। इससे रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं वज्रपात से करीब 5 लोगों की मौत हो गई है। मौसम विभाग ने 23 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें बुदेलखंड और पूर्वांचल के ज्यादातर जिले शामिल हैं।
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रविवार को भी खराब रहेगा मौसम
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि, रविवार तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा और सोमवार 23 मार्च से धीरे-धीरे सुधार शुरू होगा। शनिवार सुबह से ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम ने करवट ली है। लखनऊ और वाराणसी में रातभर रुक-रुककर बारिश होती रही, जिससे सड़कें कीचड़ से भर गईं और लोगों को ठंड का एहसास हुआ। गोरखपुर, जालौन, देवरिया, बलिया, मऊ जैसे पूर्वी जिलों में सुबह से तेज बूंदाबांदी और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चलीं।

पश्चिमी यूपी में आगरा, मथुरा, मेरठ, अलीगढ़, गाजियाबाद जैसे शहरों में जनवरी जैसा घना कोहरा छाया रहा। यहां विजिबिलिटी कई जगह 100 मीटर से भी कम हो गई, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया। पूरे प्रदेश में अधिकतम तापमान में अचानक 5 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान भी काफी नीचे आ गया।
पिछले 24 घंटों में अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, फैजाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ समेत 25 से अधिक जिलों में आंधी-बारिश का दौर रहा। ललितपुर जिले में ओलावृष्टि इतनी तेज हुई कि सड़कें और खेत सफेद चादर की तरह ढक गए। गोंडा में एक किसान का पूरा एक बीघा पत्तागोभी का खेत पानी में डूब गया। कई जगहों पर खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ने लगी हैं।
फैक्ट्री पर बिजली गिरी
मौसम की इस मार ने कई जगहों पर जानलेवा रूप धारण कर लिया। प्रयागराज, बलरामपुर, बहराइच और मिर्जापुर में आकाशीय बिजली गिरने से तीन किसानों सहित कुल पांच लोगों की मौत हो गई। सबसे दिल दहला देने वाली घटना झांसी जिले में हुई, जहां शुक्रवार देर शाम इंडो गल्फ बारुद फैक्ट्री (जो भारतीय सेना को गोला-बारूद सप्लाई करती है) पर वज्रपात हुआ।
इससे फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया, छत उड़ गई, आग लग गई और धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के 10 किलोमीटर क्षेत्र में सुनाई दिया। हादसे में फैक्ट्री मैनेजर के ड्राइवर की मौके पर मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य लोग घायल हुए। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर इलाके को खाली कराया और जांच शुरू कर दी है।
जमीन पर गिरी फसलें
यह मौसम परिवर्तन रबी फसलों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ है। इस समय गेहूं की बालियां पक रही हैं, सरसों में फलियां बन चुकी हैं, चना-मटर-मूंग में दाने भर रहे हैं और सब्जियों जैसे टमाटर, भिंडी, बैंगन, लौकी, खीरा में फूल और छोटे फल लगे हुए हैं। तेज हवाओं और बारिश से गेहूं की फसलें बड़े पैमाने पर जमीन पर गिर गई हैं।
सरसों की फलियां फट रही हैं, दाने झड़ रहे हैं। सब्जियों के फूल और छोटे फल गिरकर बर्बाद हो रहे हैं। लगातार नमी से फसल में सड़न और काले दाने पड़ने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बाजार में भाव काफी गिर सकते हैं।सिद्धार्थनगर जिले के इटवा, बिस्कोहार, खुनुवा, डुमरियागंज और बढ़नी क्षेत्रों में अकेले 100 एकड़ से ज्यादा गेहूं और सरसों प्रभावित हुई है।
महराजगंज, रायबरेली, मऊ, बलिया, देवरिया जैसे जिलों में भी खेतों में फसलें भीगी और गिरी हुई नजर आ रही हैं। किसानों का कहना है कि, नीलगाय से पहले ही परेशान थे, अब बारिश ने जो थोड़ी-बहुत फसल बची थी, उसे भी नष्ट कर दिया। दाने काले पड़ जाएंगे, कोई पैदावार नहीं बचेगी। ललितपुर में एक महिला किसान अपनी बर्बाद हो चुकी सरसों की फसल देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगा बीज, खाद और सिंचाई पर भारी खर्च किया था, लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो गया है।
तुरंत काट लें पकी फसलें
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तुरंत सलाह दी है कि, जो फसल पककर तैयार है, उसे फौरन काट लें और सुरक्षित, सूखी जगह पर रखें। खेतों में पानी जमा न होने दें, इसके लिए जल निकास की उचित व्यवस्था करें। नमी से सड़न रोकने के लिए फसल को हवादार जगह पर फैलाकर सुखाएं। अगले दो दिनों का पूर्वानुमान और राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अफगानिस्तान के पास सक्रिय हुआ यह पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ रहा है, इसलिए इसका असर पहले पश्चिमी यूपी में दिखा और अब पूर्वांचल तक पहुंच गया है। 22 मार्च को भी पूरे प्रदेश में बादल छाए रहेंगे। पश्चिमी और पूर्वी यूपी में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं। ओलावृष्टि और वज्रपात का खतरा बना रहेगा।
23 मार्च को मौसम साफ होने लगेगा। बादलों में कमी आएगी और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। मौसम विभाग का कहना है कि, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव 1-2 दिनों तक रहेगा, उसके बाद सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। गाजियाबाद में शनिवार सुबह मौसम साफ रहा और अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है। देवरिया में ईद-उल-फित्र की नमाज के दौरान भी हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे मौसम और ठंडा हो गया।
आईएमडी की अपील
मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों को फसल बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन राहत सामग्री और सलाह के लिए शिविर लगा रहा है। जहां एक तरफ इस बारिश से गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ फसलों और मानव जीवन को भारी नुकसान पहुंचा है। उम्मीद है कि सोमवार से मौसम खुशनुमा होगा और किसान अपनी बची-खुची फसल को बचाने में कामयाब होंगे।
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