
नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफार्मों पर भारत में संभावित लॉकडाउन को लेकर चल रही अटकलों पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि देश में लॉकडाउन लगाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है।
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यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच, केंद्रीय मंत्री ने न केवल अफवाहों का खंडन किया, बल्कि यह भी बताया कि कैसे मोदी सरकार भारतीय नागरिकों को वैश्विक महंगाई की मार से बचाने के लिए वित्तीय बोझ खुद उठा रही है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें।
$70 से $122 प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में जारी संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बेलगाम हो रही हैं। पिछले महज एक महीने के भीतर, कच्चे तेल के दाम $70 प्रति बैरल से उछलकर $122 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुँच गए हैं।
इस वैश्विक उछाल का असर दुनिया के लगभग हर कोने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है।
- दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतों में 30% से 50% तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
- अफ्रीकी देश में भी महंगाई की मार 50% तक पहुंच चुकी है।
- उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में भी कीमतें 20% से 30% तक बढ़ गई हैं।
मंत्री ने रेखांकित किया कि दुनिया भर के उपभोक्ता इस समय ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन की आवश्यक वस्तुओं पर पड़ रहा है।
जनता पर नहीं डाला बढ़ती कीमतों का बोझ
हरदीप पुरी ने बताया कि इस अभूतपूर्व संकट के समय भारत सरकार के सामने दो स्पष्ट विकल्प थे। पहला विकल्प यह था कि अन्य देशों की तरह अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए जाएं, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ न पड़े। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे विकल्प को चुना, जो कि कठिन था लेकिन जनहित में था।

सरकार ने फैसला किया कि वह अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का बोझ भारतीय नागरिकों के कंधों पर नहीं डालेगी। रूस-यूक्रेन संघर्ष के समय से ही सरकार अपनी इस प्रतिबद्धता पर कायम है। मंत्री के अनुसार, तेल कंपनियों को वर्तमान में पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान (Under-recovery) हो रहा है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने अपने राजस्व (Excise Duty और अन्य टैक्स) में भारी कटौती की है ताकि पंप पर आम आदमी के लिए कीमतें स्थिर बनी रहें।
घरेलू आपूर्ति पर कड़ा रुख
घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और कीमतें नियंत्रित रहें, इसके लिए सरकार ने ‘एक्सपोर्ट टैक्स’ (निर्यात कर) को लेकर भी सख्त कदम उठाए हैं। हरदीप पुरी ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का अनुचित लाभ उठाने से रोकने के लिए निजी और सार्वजनिक रिफाइनरियों पर निर्यात टैक्स लगाया गया है।
अब किसी भी रिफाइनरी को विदेशों में तेल निर्यात करने पर अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उत्पादित और रिफाइंड तेल का प्राथमिक उपयोग भारतीय नागरिकों और उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हो। सरकार की मंशा साफ है—पहले देश की ऊर्जा सुरक्षा, फिर व्यापार।
लेख के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में हरदीप पुरी ने देश में लॉकडाउन (Lockdown in India) की चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह निराधार और गलत हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्थिति निश्चित रूप से अनिश्चित है, लेकिन भारत सरकार ऊर्जा, सप्लाई चेन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर 24 घंटे नजर बनाए हुए है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश के किसी भी हिस्से में ईंधन या राशन की कोई किल्लत न हो। मंत्री ने जनता से संयम बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसी संवेदनशील स्थितियों में अफवाह फैलाना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक भी है।
केंद्रीय मंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि भारत ने अतीत में भी कई वैश्विक संकटों का डटकर सामना किया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था अब इतनी सक्षम है कि वह बाहरी झटकों को सह सके। सरकार एक समन्वित रणनीति के तहत काम कर रही है जिसमें पेट्रोलियम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
इन तीन बिन्दुओं पर फोकस
- देश में तेल और गैस के स्टॉक को पर्याप्त बनाए रखना।
- वैश्विक कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में महंगाई को नियंत्रित रखना।
- सप्लाई चेन को किसी भी बाधा से मुक्त रखना ताकि उद्योग और कृषि कार्य चलते रहें।
कुल मिलाकर, हरदीप सिंह पुरी का बयान यह स्पष्ट करता है कि भारत सरकार वैश्विक चुनौतियों के प्रति पूरी तरह सतर्क है, लेकिन देश के भीतर किसी भी प्रकार के ‘शटडाउन’ या ‘लॉकडाउन’ की कोई योजना नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल आम आदमी को अंतरराष्ट्रीय महंगाई से बचाने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बनाए रखने पर केंद्रित है।
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