
लखनऊ। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के केंद्रीय सभागार में 15–16 अप्रैल 2026 को आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और छात्रों ने हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन व ऑफलाइन) में भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. जीशान वारसी, डॉ. अंशल अली टाइगर, डॉ. अनस जमील और डॉ. पल्लवी ने किया।
संगोष्ठी का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसमें प्रो. अनन्या वाजपेयी (CSDS, नई दिल्ली) ने मुख्य वक्ता के रूप में अंबेडकर के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. मनुका खन्ना ने विशेष संबोधन दिया, जबकि प्रो. फुरकान कमर ने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया।
दूसरे दिन प्रो. अरविंदर ए. अंसारी, सचिव, इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी एवं जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रोफेसर ने विशेष व्याख्यान दिया, जिसने संगोष्ठी की अकादमिक चर्चा को नई गहराई प्रदान की।
दो दिनों के तकनीकी सत्रों में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में संवैधानिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और समावेशी विकास जैसे विषय प्रमुख रहे।
संगोष्ठी ने अकादमिक संवाद और विचार-विमर्श के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचार आज भी समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण में मार्गदर्शक हैं।



