
वॉशिंगटन। अभी तक मिडिल ईस्ट ही बारूद के ढेर पर बैठा था, लेकिन अब इसकी आंच समंदर तक भी पहुंच गई है। नतीजतन तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका और अधिक गहरा गई है। तनाव के इस चरम बिंदु पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति और सैन्य गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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अमेरिका की चेतावनी को किया इग्नोर
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के माध्यम से जानकारी दी कि अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में जारी अपनी सख्त नाकाबंदी के दौरान ईरानी झंडे वाले एक विशालकाय कार्गो जहाज़ टोस्का को बलपूर्वक रोककर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया है। यह कार्रवाई केवल एक जहाज़ को रोकने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी तरह की रियायत बरतने के मूड में नहीं है।

राष्ट्रपति ट्रंप के आधिकारिक बयान के अनुसार, टोस्का नामक यह कार्गो जहाज़ लगभग 900 फुट लंबा है और इसका वज़न किसी आधुनिक विमानवाहक पोत के बराबर है। बताया जा रहा है कि, इस जहाज़ ने अमेरिकी नेवी द्वारा लगाई गई नाकाबंदी को तोड़ने का दुस्साहस किया। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने जब इसे रुकने की चेतावनी दी और रेडियो संदेश भेजे, तो जहाज़ के चालक दल ने उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया।
इसके बाद ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नेवी ने जहाज़ के इंजन रूम पर सटीक हमला किया, जिससे जहाज़ की गति तुरंत ठप हो गई और उसे बीच समंदर में ही सरेंडर करने पर मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य कार्रवाई का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी जारी किया है, जिसमें अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ उस विशालकाय कार्गो जहाज़ को चारों ओर से घेरे हुए दिखाई दे रहे हैं।
पाकिस्तान पहुंच रहे जेडी वेंस
यह सनसनीखेज सैन्य घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक उच्चस्तरीय डेलिगेशन के साथ पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और दामाद जैरेड कुशनर के साथ-साथ स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य इस्लामाबाद में ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दूसरे दौर की शुरुआत करना है ताकि मध्य पूर्व में जारी इस रक्तपात को रोका जा सके।
पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच एक नाजुक पुल का काम कर रहा है। इस्लामाबाद के उस होटल को खाली करा लिया गया है जहां ये बातचीत होनी है और सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
हालांकि, कूटनीति की मेज पर सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां अमेरिका इसे शांति की कोशिश बता रहा है, वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने इस वार्ता की संभावनाओं को झूठ करार दिया है। तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और अपनी धमकी भरी ज़बान बंद नहीं करता, तब तक ईरान किसी भी समझौते के लिए मेज पर नहीं बैठेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में आकर कोई बातचीत नहीं करेगा, जिससे सोमवार को होने वाली इस प्रस्तावित बैठक पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं।
होर्मुज पर पसरा सन्नाटा
मैदान-ए-जंग की यह तपिश अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक धमनी होर्मुज़ स्ट्रेट तक पहुंच चुकी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स ने घोषणा की है कि, वह इस जलमार्ग को फिर से बंद कर रहा है। आईआरजीसी का तर्क है कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी मौजूदा संघर्षविराम की शर्तों का सीधा उल्लंघन है, इसलिए वे इस रास्ते को तब तक नहीं खोलेंगे जब तक नाकाबंदी खत्म नहीं होती। ज्ञात हो कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुज़रता है।
रविवार को मरीन ट्रैफिक के आंकड़े ने गवाही दी कि, होर्मुज़ स्ट्रेट में सन्नाटा पसरा है और जहाज़ों की आवाजाही पूरी तरह रुकी हुई है। आईआरजीसी ने दावा किया कि उन्होंने बोत्सवाना और अंगोला के झंडे वाले दो बड़े टैंकरों को रास्ता बदलने और वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने वैश्विक बाज़ारों में खलबली मचा दी है और कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट की रफ़्तार से ऊपर जा रही हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ने वाला है।
ईरान बोला- धमकी न दे अमेरिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर ईरान को अब तक की सबसे कठोर चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ को बंद करने की धमकी देकर सुपरपावर अमेरिका को ब्लैकमेल नहीं कर सकता। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, अगर वे शांति समझौते पर राजी नहीं होते, तो ईरान के हर महत्वपूर्ण पुल, बांध और बिजली संयंत्र को नष्ट करना मेरे लिए सम्मान की बात होगी। यह बयान स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब सीमित हमलों के बजाय पूर्ण युद्ध की तैयारी कर चुका है।

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने शनिवार को संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए फ्रांसीसी और ब्रिटिश जहाज़ों पर हमले किए। फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM ने पुष्टि की है कि उनके एक जहाज़ पर वॉर्निंग शॉट दागे गए थे। हालांकि ब्रिटेन ने अपने जहाज़ों पर हमले की रिपोर्ट को खारिज किया है, लेकिन भारत सरकार ने यह स्वीकार किया है कि इस इलाके में हुई क्रॉस-फायरिंग की चपेट में भारतीय झंडे वाले दो जहाज़ भी आए थे। यह घटना दर्शाती है कि इस युद्ध की आग अब निर्दोष देशों के व्यापारिक जहाज़ों तक भी पहुंच रही है।
48 घंटे में हो जायेगा फैसला
आगामी बुधवार को मौजूदा संघर्षविराम की समयसीमा समाप्त हो रही है। यदि सोमवार को पाकिस्तान में होने वाली बातचीत विफल रहती है, तो 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है। अमेरिका ने अपनी नौसेना को स्टैंडबाय पर रखा है। वहीं ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है। दुनिया भर के रणनीतिकार इस समय अपनी सांसे रोककर इस्लामाबाद और होर्मुज़ स्ट्रेट की ओर देख रहे हैं। क्या कूटनीति जीतेगी या बारूद की गंध पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी, इसका फैसला अगले 48 घंटों में होने वाला है।
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