
वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव के बीच अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नौसेना ने दो प्रमुख एम्फीबियस असॉल्ट शिप्स यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस बॉक्सर को मध्य पूर्व की तरफ रवाना कर दिया है। इन दोनों जहाजों में हजारों मरीन कमांडोज से हैं, इनकी तैनाती से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में भारी इजाफा हुआ है।
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तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है खर्ग द्वीप
जानकारों का मानना है कि, अमेरिका, ईरान के रणनीतिक खर्ग द्वीप पर कब्जा करने या नाकाबंदी करने की योजना बना रहा है जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है।
वाशिंगटन से मिली रिपोर्ट्स अनुसार, अमेरिकी पेंटागन ने यूएसएस बॉक्सर (Wasp-क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप) और उसके एम्फीबियस रेडी ग्रुप (ARG) को तेजी से मध्य पूर्व भेजा है। इस ग्रुप में यूएसएस पोर्टलैंड (San Antonio-क्लास) और USS कॉमस्टॉक (Whidbey Island-क्लास) भी शामिल हैं। इन जहाजों पर 11वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के करीब 2,500 सैनिक सवार हैं, जिनमें जमीनी और हवाई दोनों दस्ते शामिल हैं। इससे पहले, प्रशांत महासागर से यूएसएस त्रिपोली (America-क्लास) और उसके ARG को रवाना किया गया था, जिसमें 31वीं MEU के लगभग 2,200 मरीन शामिल हैं।

इस तरह, दोनों ग्रुप्स को मिलाकर अमेरिका ने करीब 4,700 से 5,000 मरीन कमांडोज को क्षेत्र की ओर भेज दिया है। यूएसएस त्रिपोली पिछले हफ्ते ही मध्य पूर्व की तरफ रवाना हो चुकी थी। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ये खाड़ी क्षेत्र में पहुंच जायेगा। यूएसएस बॉक्सर सैन डिएगो से हाल ही में रवाना हुई है। ऐसे में इसकी यात्रा में कई हफ्ते लग सकते हैं। ये तैनातियां उस समय हो रही हैं जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध तीन हफ्ते से अधिक पुराना हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही पर ईरान का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। ट्रंप प्रशासन की प्रमुख चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है।
आसमान छू रहीं तेल की कीमतें
आपको बता दें कि जंग के बीच ईरान ने इस होर्मुज स्ट्रेट जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक रिपोर्ट एम् बताया गया है कि, ट्रंप प्रशासन खर्ग द्वीप के चारों ओर नाकाबंदी या उस पर कब्जा करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से महज 20 मील दूर स्थित है और यहां से ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा होता है। इस द्वीप पर तेल टर्मिनल और निर्यात सुविधाएं हैं, जो तेहरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। पिछले हफ्ते अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, लेकिन जानबूझकर तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाया गया।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि, यदि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, तो द्वीप के तेल सुविधाओं पर भी हमला किया जा सकता है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, पेंटागन इस द्वीप को कब्जे में लेकर या नाकाबंदी करके ईरान पर दबाव बनाने की योजना पर विचार कर रहा है, ताकि ईरान जलडमरूमध्य खोलने पर मजबूर हो जाये, लेकिन खर्ग द्वीप पर अमेरिकी सैनिकों को उतारना आसान नहीं होगा।
ये द्वीप ईरान की मुख्य भूमि के बहुत करीब है, जिससे ईरानी मिसाइलों, ड्रोनों और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के हमलों का खतरा बहुत अधिक है। IRGC गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं। ऐसे में द्वीप पर उतरे अमेरिकी सैनिकों को यहां वियतनाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जहां छोटी-छोटी इकाइयों ने बड़ी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था।
आसान नहीं होगा पहुंचना
अमेरिकी एम्फीबियस जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर खाड़ी में पहुंचना होगा, जो ईरान के लिए आसान निशाना बन सकता है। ईरान के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और अनमैन्ड सरफेस वेसल्स हैं। ईरान पहले ही USVs का इस्तेमाल कर चुका है, जैसे कि एक अमेरिकी वाणिज्यिक जहाज पर हमला। ऐसे में इन जहाजों को सीधे ईरानी तट के नजदीक ले जाना जोखिम भरा है। अमेरिकी नौसेना MQ-4C Triton ड्रोनों का इस्तेमाल कर खर्ग द्वीप की निगरानी कर रही है, लेकिन जमीनी ऑपरेशन के लिए बड़े पैमाने पर हवाई कवर, मिसाइल डिफेंस और संभवतः सहयोगी देशों की मदद की जरूरत होगी।
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The US military has accelerated the deployment of thousands of Marines and sailors to help reinforce US troops in the Middle East amid the war against Iran.Four officials tell Newsmax the Boxer Amphibious Ready Group and the embarked 11th Marine…
— Carla Babb (@CarlaBNewsmax) March 19, 2026
फिलहाल कोई देश खुलकर अमेरिकी सैनिकों को ईरानी धरती पर उतारने में मदद करने को तैयार नहीं दिख रहा है। क्षेत्रीय देश जैसे सऊदी अरब, यूएई या अन्य खाड़ी देश ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है, लेकिन जमीनी ऑपरेशन से अमेरिकी सैनिकों की जान का बड़ा खतरा है।
कहा जा रहा है कि, नाकाबंदी या सीमित रेड्स ज्यादा संभावित हैं, बजाय पूर्ण कब्जे के। यदि अमेरिका खर्ग द्वीप पर उतरता है, तो यह युद्ध को नई ऊंचाई दे सकता है, जहां ईरान और उसके सहयोगी जवाबी हमले तेज कर सकते हैं। वर्तमान में अमेरिकी बलों की यह तैनाती क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। वैश्विक बाजार तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देख रहे हैं और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा। ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अमेरिका ईरान को हराने के लिए तैयार है, लेकिन जमीनी युद्ध की लागत बहुत अधिक हो सकती है।
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