ट्रंप ने ईरान को दी लास्ट चेतावनी, ‘होर्मुज खोल दो, वरना तबाही मचा देंगे’

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया की धरती पर एक बार फिर से महायुद्ध की आहट दिख रही है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां से वापसी का रास्ता दिखता हुआ नहीं नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि, इसका रास्ता केवल तबाही या किसी बड़े समझौते से ही होकर ही गुजरेगा।

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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े लहजे में अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि, अगर तेहरान ने मंगलवार तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका वहां भीषण बमबारी करेगा और ऐसी तबाही मचाएगा, जिसे ईरान कभी भूल नहीं पायेगा।

Donald Trump

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, इस स्थिति में अमेरिका न केवल ईरान के बुनियादी ढांचे को नष्ट करेगा, बल्कि वहां के तेल संसाधनों को भी अपने नियंत्रण में कर लेगा। ट्रंप की यह धमकी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा रही है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।

इस भीषण तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया है कि, पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम यानी सीजफायर को लेकर भी गंभीर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट में राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि, इस बातचीत को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।

कूटनीतिक स्तर पर यह आदान-प्रदान काफी संवेदनशील माना जा रहा है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच गुप्त रूप से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि, अगले 48 घंटों में किसी निश्चित समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, फिर भी इसे युद्ध को रोकने का एक अंतिम और साहसी प्रयास माना जा रहा है।

मंगलवार तक का अल्टीमेटम

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने ईरान के लिए तय की गई डेडलाइन को 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया है। अब यह समय सीमा पूर्वी समय सीमा के आनुसार, मंगलवार रात 8 बजे तक की है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है।

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उन्होंने लिखा है, मंगलवार को ईरान में बिजली संयंत्र दिवस और पुल दिवस एक साथ मनाया जाएगा। उन्होंने ईरान को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि, वे पागलपन छोड़ें और होर्मुज को खोल दें, अन्यथा उन्हें नरक जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप की इस धमकी का सीधा इशारा ईरान के पावर ग्रिड और परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की ओर है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक हालिया साक्षात्कार में ट्रंप ने अपनी सैन्य और आर्थिक स्थिति को बहुत मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि, अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान को दोबारा से खड़े होने में कम से कम 20 साल लगेंगे और वह भी तब जब उनका देश पूरी तरह खत्म होने से बच जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि, यदि मंगलवार शाम तक उनकी शर्तें नहीं मानी जाती हैं, तो ईरान में एक भी बिजली संयंत्र या पुल खड़ा नहीं रहने दिया जाएगा। ट्रंप की इस रणनीति को मैक्सिमम प्रेशर का चरम स्तर माना जा रहा है, जहां वे सैन्य ताकत के बल पर ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान ने किया झुकने से इंकार

दूसरी तरफ, ईरान ने इन धमकियों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबाफ ने ट्रंप के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि, बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियां सीधे तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी धमकियों से अमेरिका को कुछ भी हासिल नहीं होगा और तनाव कम करने का एकमात्र तरीका ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान करना है। गालिबाफ के अनुसार, इस खतरनाक खेल का अंत तभी हो सकता है जब अमेरिका अपनी साम्राज्यवादी सोच को त्याग कर वास्तविकता को स्वीकार करे।

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सीमा पर टिकी है, जो ट्रंप ने अमेरिका को दी है। एक तरफ ट्रंप की विनाशकारी चेतावनी है और दूसरी तरफ 45 दिनों के सीजफायर की नाजुक उम्मीद। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं और ट्रंप अपने कहे अनुसार कार्रवाई करते हैं, तो न केवल ईरान बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल और क्षेत्रीय अस्थिरता के डर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान और तुर्किए की मध्यस्थता रंग लाती है या पश्चिम एशिया में शांति आती है या फिर एक बार फिर से वहां बम और मिसाइलें आग बरसाएंगी।

 

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