
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद! डोनाल्ड ट्रंप के एक चौंकाने वाले बयान ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के ऊर्जा नेटवर्क पर हमलों को टालने के ट्रंप के दावे के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। क्या यह अयातुल्लाह और ट्रंप के बीच किसी गुप्त समझौते का संकेत है या महज एक रणनीतिक बयान?
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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और गहराते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों और वित्तीय बाजारों में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्ध के कारण लगभग बंद हो चुका सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ जल्द ही खुल सकता है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा कि, यदि तेहरान के साथ जारी बातचीत सफल रहती है, तो इस समुद्री मार्ग का नियंत्रण संभवतः वे और अयातुल्लाह मिलकर करेंगे।
वैश्विक बाजार में दिखा असर

ट्रंप के इस बयान का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तत्काल देखने को मिला। जैसे ही यह खबर फ्लैश हुई कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा नेटवर्क पर होने वाले संभावित हमलों को अगले पांच दिनों के लिए टाल रहा है, निवेशकों ने राहत की सांस ली।
कच्चा तेल
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद जगी है।
शेयर बाजार
अनिश्चितता कम होने के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में हरियाली लौट आई और प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए।
मुद्रा और बॉन्ड
अमेरिकी डॉलर में हल्की कमजोरी देखी गई, जबकि सरकारी उधार की लागत (Bond Yields) में भी कमी आई है।
28 फरवरी से चल रहा युद्ध
फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही खुलेगा, बशर्ते तेहरान के साथ हमारी बातचीत पटरी पर रहे। जब उनसे नियंत्रण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, होर्मुज का नियंत्रण शायद मैं और अयातुल्लाह मिलकर करेंगे या फिर शायद मैं और वो शख्स, जो भी अगला अयातुल्लाह बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि, ट्रंप का यह बयान ईरान में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करता है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद से ईरान में नेतृत्व को लेकर स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है।
ईरान ने ख़ारिज किया दावा
एक तरफ जहां ट्रंप अच्छी बातचीत का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान की आधिकारिक फार्स न्यूज़ एजेंसी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि, अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, कोई बातचीत नहीं हुई है।
ईरान का यह सख्त रुख उस तनावपूर्ण सप्ताह के बाद आया है जिसमें दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी रहा। 18 मार्च को इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले ने आग में घी डालने का काम किया था, जिसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित रास लफ्फान एलएनजी प्लांट को निशाना बनाया था। ईरान ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि, अगर अमेरिका उनके पावर प्लांट्स को निशाना बनाता है, तो वह खाड़ी क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को तबाह कर देगा, जो अमेरिकी सैन्य बेसों को बिजली की आपूर्ति करते हैं।
जल्द खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। 28 फरवरी के हमलों के बाद से यह मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गया था और लगभग बंद पड़ा था। इसके बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा मंडरा रहा था। ट्रंप का यह दावा कि वे इसे जल्द खुलवा देंगे, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक संजीवनी की तरह देखा जा रहा है।

ट्रंप ने यह तो कहा कि हमले पांच दिन के लिए टाल दिए गए हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि, इस तथाकथित बातचीत में कौन शामिल था। क्या ओमान या कतर जैसे देश मध्यस्थता कर रहे हैं? या फिर ट्रंप प्रशासन सीधे ईरानी सेना के किसी धड़े से संपर्क में है? समझौते की शर्तें क्या होंगी, इस पर अभी भी रहस्य बरकरार है।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की यह रणनीति मैक्सिमम प्रेशर और मैक्सिमम नेगोशिएशन का मिश्रण है। वे एक तरफ हमले की धमकी देते हैं और दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता खोलकर बाजारों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।
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