महंगा हुआ दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का सफर, NHAI ने जारी की नई टोल दरें

 गाजियाबाद। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेज़ में लोनी टोल प्लाज़ा और काठा टोल प्लाज़ा के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बुरी खबर है। दरअसल, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नए टोल रेट तय किए हैं। ये रेट हाईवे के इस खास हिस्से पर दोनों तरफ़ जाने वाली गाड़ियों पर एक जैसे लागू होंगे। प्राइवेट और छोटी गाड़ियों के लिए एक तरफ़ (सिंगल ट्रिप) की फ़ीस 240 रूपये तय की गई है। अगर आप 24 घंटे के अंदर वापस आते हैं, तो आपको वापसी के लिए 360 रूपये देने होंगे। रेगुलर यात्रियों के लिए, 50 ट्रिप का मंथली पास 7,960 रूपये में मिलेगा।

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व्यावसायिक वाहनों की दर में बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि, जो लोग महीने में कम से कम 25 दिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं, उनके लिए यह पास किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि इससे प्रति यात्रा खर्च काफी कम हो जाता है। सिर्फ निजी कारें ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक वाहनों के वर्ग में भी दरों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हल्के व्यावसायिक वाहन, जिनमें एलसीवी और मिनी बसें शामिल हैं, उनके लिए सिंगल ट्रिप का किराया अब 385 रुपये हो गया है।

इन वाहनों के लिए रिटर्न ट्रिप का शुल्क 580 रुपये और मासिक पास की कीमत 12,855 रुपये रखी गई है। जैसे-जैसे वाहनों का आकार और एक्सल की संख्या बढ़ती है, टोल की दरें भी उतनी ही भारी होती जाती हैं। भारी वाहनों जैसे साधारण बसों और दो एक्सल वाले ट्रकों को अब एक तरफ की यात्रा के लिए 810 रुपये चुकाने होंगे। यदि ये वाहन 24 घंटे के भीतर लौटते हैं, तो उन्हें 1,210 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि इनका मासिक पास 26,940 रुपये का बनेगा। यह वृद्धि ट्रांसपोर्टरों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इसका सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ने की संभावना है।

छोटे निवेश जैसा होगा मासिक पास लेना

बड़े मालवाहक और मल्टी एक्सल वाहनों के लिए, तो दरें और भी ज्यादा चौंकाने वाली हैं। तीन एक्सल वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए सिंगल ट्रिप का शुल्क 880 रुपये और रिटर्न ट्रिप का 1,320 रुपये तय किया गया है, जबकि इनका मासिक पास 29,390 रुपये का होगा। वहीं, 4 से 6 एक्सल वाले भारी कंस्ट्रक्शन मशीनरी या मल्टी एक्सल व्हीकल के लिए सिंगल ट्रिप का टोल 1,265 रुपये तक पहुंच गया है।

इन विशाल वाहनों के लिए रिटर्न ट्रिप का खर्च 1,900 रुपये और मासिक पास 42,245 रुपये का होगा। सबसे ऊपरी श्रेणी में आने वाले अति विशाल वाहन, जिनमें 7 या उससे अधिक एक्सल होते हैं, उनके लिए टोल दरें अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं। इन ओवरसाइज़्ड वाहनों को सिंगल ट्रिप के लिए 1,545 रुपये और रिटर्न ट्रिप के लिए 2,315 रुपये का भुगतान करना होगा। इनका मासिक पास लेना किसी छोटे निवेश जैसा है, जिसकी कीमत 51,430 रुपये निर्धारित की गई है।

NHAI की इस नई टोल नीति का सबसे सकारात्मक पहलू मंथली पास के जरिए मिलने वाली भारी बचत है। यदि कोई कार मालिक मासिक पास की सुविधा लेता है, तो उसे एक ट्रिप की लागत मात्र 159 रुपये के करीब पड़ेगी। अगर इसकी तुलना 240 रुपये की सामान्य सिंगल ट्रिप से की जाए, तो यह लगभग 33 प्रतिशत से भी ज्यादा की सीधी बचत है।

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा

प्राधिकरण का उद्देश्य इस व्यवस्था के जरिए हाईवे पर नकद लेनदेन को कम करना और नियमित यात्रियों को लंबी लाइनों तथा उच्च लागत से बचाना है। टोल दरों में यह विशेष छूट केवल उन्हीं यात्रियों को मिलेगी जो फास्टैग के जरिए सक्रिय मंथली पास का उपयोग करेंगे। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए NHAI ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना फास्टैग वाले वाहनों से दोगुना जुर्माना वसूला जाना जारी रहेगा।

यात्रियों को इन नई दरों के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों का भी ध्यान रखना होगा। रियायती रिटर्न रेट का लाभ तभी मिलता है जब वापसी का सफर टोल प्लाजा पार करने के ठीक 24 घंटे के भीतर पूरा कर लिया जाए। इसके अलावा, भारत सरकार की अधिसूचना (GSR No. 950 (E)) के तहत जिन वाहनों को टोल फ्री श्रेणी में रखा गया है, वे पहले की तरह ही बिना किसी शुल्क के आवाजाही कर सकेंगे।

अधिकारिक बेवसाइट पर दर्ज करा सकेंगे शिकायतें

इस सूची में एम्बुलेंस, दमकल विभाग के वाहन और अन्य वीआईपी सुरक्षा वाहन शामिल हैं। यात्रियों की सुविधा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए NHAI ने गाजियाबाद स्थित प्रोजेक्ट डायरेक्टर कार्यालय को नोडल केंद्र बनाया है। यदि किसी यात्री को लगता है कि उससे गलत टोल वसूला गया है या मासिक पास के एक्टिवेशन में कोई समस्या आ रही है, तो वे सीधे प्रोजेक्ट डायरेक्टर के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

दिल्ली-सहारनपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह हिस्सा भविष्य में देहरादून तक की दूरी को काफी कम कर देगा, लेकिन फिलहाल बढ़ी हुई टोल दरों ने स्थानीय यात्रियों के बीच चर्चा छेड़ दी है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि बेहतर सड़कों और कम समय में यात्रा पूरी करने की सुविधा के बदले प्राधिकरण को रख-रखाव के लिए राजस्व की आवश्यकता होती है, लेकिन आम आदमी के लिए यह बोझ तब तक भारी लगता है जब तक कि वे मंथली पास जैसे विकल्पों का रुख नहीं करते।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, बढ़ी हुई टोल दरों का असर इस रूट पर वाहनों के घनत्व और स्थानीय व्यापार पर किस तरह पड़ता है। फिलहाल, हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने फास्टैग को रिचार्ज रखें और लंबी अवधि के लाभ के लिए मासिक पास की सुविधा का चयन करें।

 

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